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August 18, 2022
तीर्थ नगरी पुष्कर के सरोवर किनारे बने गौ घाट पर गौ रक्षा के लिए बलिदान देने वाले राठौड़ राजपूत वीरों को श्रद्धांजलि और तर्पण का आयोजन किया गया । इस दौरान सांसद भागीरथ चौधरी , समाज सेवी भँवर सिंह पलाड़ा, पुष्कर नगर पालिका अध्यक्ष कमल पाठक, उपाध्यक्ष शिव स्वरूप महर्षि, राम सेवा आश्रम के महंत नंदरामशरण महाराज, मां सावित्री सेवा समिति पुष्कर के विक्रम सिंह सहित सर्व धर्म समाज के सैकड़ों लोग मौजूद रहे । इस दौरान आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने गौ सेवा के लिए मेड़तिया राजपूत वीरों की गाथा को याद करते हुए उनके बलिदान को नमन किया । साथ ही वैदिक मंत्रोच्चार के बीच स्वर्गीय आत्माओं के लिए सरोवर के पवित्र जल से तर्पण किया गया । इतिहासकारों की मानें तो विक्रम संवत 1737 भाद्रपद की सप्तमी की दोपहर औरंगजेब के सिपहसालार तहव्वुर खान ने पुष्कर के वराह मंदिर को खंडित कर ब्राह्मणों और गौ माताओं की पुष्कर घाट पर कुर्बानी देने की योजना बनाई थी । इस योजना की सूचना कुंवर राज सिंह को दी गई। जिस पर कुंवर राज सिंह ने अपने विवाह मंडप से पुष्कर की ओर कूच कर दिया । मुगलों और राजपूतों के बीच हुए चार दिवसीय युद्ध के दौरान तकरीबन 700 क्षत्रिय रणबाकुरों ने गौ रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान देकर गायों और ब्राह्मणों की जान बचाई अंत में राजपूत सेना विजय हुई और मुगल सेना के तहव्वुर खान अजमेर स्थित तारागढ़ की ओर भाग छूटा । इस युद्ध में कुंवर राज सिंह की गर्दन कटने के बावजूद वह दोनों हाथों से युद्ध लड़ते रहे । इसलिए उन्हें झुंझार जी की उपाधि मिली । जिनकी स्मृति में आज भी कस्बे के राष्ट्रीय राजमार्ग 89 पर हाई सेकेंडरी स्कूल के पास स्मारक बना हुआ है । इन्हीं गौ रक्षक सेनानियों के बलिदान को याद रखने के लिए सरोवर किनारे गऊघाट की स्थापना की गई थी । इस घटना से जुड़े पौराणिक स्थलों का उल्लेख हरविलास शारदा और जनरल टॉड जैसे इतिहासकारों की किताबों में आज भी दर्ज है । इतना ही नहीं राजपूत समाज का इतिहास लिखने वाली राव परंपरा की बही खातों में इस घटना का विस्तृत लेख पढ़ने को मिलता है । इस दौरान गौ घाट पर जिला परिषद सदस्य एवं पूर्व सरपंच महेंद्र सिंह मझेवला,कर्नल रघुवीर सिंह गोयला, दशरथ सिंह भिलावट, महेंद्र सिंह कड़ेल,सुदर्शन इंदौरिया, विहिप के लेखराज सिंह राठौड़, रेशु जयकुमार पाराशर, जितेन्द्र सिंह नोसल, अशोक सिंह रावत,राजेन्द्र सिंह रावत, विष्णु शर्मा ,नेहरू पण्डित,तख्त सिंह , बालकिशन पाराशर, जगदेव सिंह राठौड़, सूरज नारायण पाराशर,मदन सिंह रावत सहित अनेक लोग मौजूद रहे
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