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July 29, 2022
शहर के समता भवन में गुरुवार को धर्मसभा का आयोजन हुआ, जिसमें साधुमार्गी जैन शासन दीपक विनय मुनि ने प्रवचन देते हुए कहा कि हमारे देश को संत-महापुरुष और चरित्र आत्माओं का सानिध्य मिलता रहा, इस कारण हमें जिनवाणी सुनने का मौका मिल रहा है, जिसके चलते हमारे अंदर के कीटाणु बाहर निकलते जा रहे है। हमें आगम श्रमणोपाषक बनना है, हमें अपनी शक्ति को सर्जन में लगाना है। मुनि ने कहा कि अहंकार से कभी भी महान नहीं बन सकते, महान उच्च आचरण से बना जा सकता है। जिस प्रकार हनुमान जी ने कभी भी अपनी बल शक्ति का प्रदर्शन नहीं करा। हमें भी अपनी बुद्धि को फिजूल में नहीं लगाना चाहिए। अपनी संतानों को सुसंस्कार देने में पीछे नहीं रहना चाहिए। शुभ संकेत आने पर धर्म जागरण में लग जाना चाहिए। जीवन में जितना आलस्य प्रमाद होगा, उतनी बीमारियां बढ़ेगी। आज हरियाली अमावस्या है, इस दिन हमारे दिल को हरा-भरा बनाने में लगे रहना होगा। मधुर मुनि ने कहा कि हमको प्रकृति में रहना है, तो प्रकृति को प्रदूषण से बचने में लगे रहना चाहिए। मिट्टी के बर्तन सबसे शुद्ध होते है, हमे उपयोग में लेते रहना चाहिए। यह हमे पोषक देते है। जीवन में शेर, शायर व सपूत यह अपना रास्ता स्वयं बना लेते हैं। साधुमार्गी जैन संघ सदस्य नोरतमल बाबेल ने बताया कि आज वीर भ्राता पुलकित गुगलीया ने 16 के प्रत्याखान लिए व निरंतर तेले तप की लडी चल रही है।
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