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July 28, 2022
हरियाली अमावस्या के मौके पर धार्मिक नगरी पुष्कर में हजारो श्रदालुओ ने भारी अव्यवस्थाओ के बीच पवित्र सरोवर में आस्था की डुबकी लगाकर पूजा अर्चना की । दिनभर सरोवर के तट पर पितृ कार्य और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे। किसी ने अपने पूर्वजो की आत्मशांति के लिए पिंडदान किये तो किसी ने पितरों को तर्पण देकर उनके निमित्त ब्राह्मणो को भोजन करवाकर यथाशक्ति दान -पूण्य किया । तीर्थ पुरोहितो के अनुसार हरियाली अमावश्या के अवसर पर तीर्थराज पुष्कर में स्नान और दान पुण्य करने का विशेष महत्व है । आमवस्या के दिन जो भी श्रदालु पवित्र सरोवर में स्नान कर पितरो का तर्पण करता है उसको मानसिक और शारीरिक पीडाओ से मुक्ति मिलती है । इन्ही मान्यताओ के चलते सरोवर के 52 घाटो पर दिन भर श्रदालुओ का मेला लगा रहा। पद्म पुराण में वर्णित कथा के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम ने अपने पिता दशरथ का इसी तीर्थ में पिंडदान दिया था । पांच प्रमुख शहरों में से एक पुष्कर सरोवर पित्र कार्य हेतु उत्तम माना जाता है । इन्ही मान्यताओं के चलते सरोवर के बावन घाटों पर दिनभर श्रृद्धालुओं का मेला लगा रहा। वहीं मंदिरों और बाजारों में भी दिनभर रौनक बनी रही।
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