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July 21, 2022
गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति को 13 साल में छह बार आंदोलन करने ओर अपने 72 लोगों की जान गवाने के उपरांत मिले 5% आरक्षण में भी 12 से अधिक जातियों को समाहित करने और इसमें अन्य जातियों को जोड़ने की सरकार की मंशा के खिलाफ गुर्जर समाज में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।आरक्षण संघर्ष समिति की महापंचायत के दौरान सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप और कार्रवाई की मांग पर चर्चा कर आंदोलन की रणनीति बनाई गई थी, जिसके तहत 21 जुलाई को आंदोलन का आगाज किया जाना था लेकिन प्रदेश के मौजूदा हालात और स्थिति को मद्देनजर रखते हुए इसे स्थगित किया गया और समिति पदाधिकारियों द्वारा गुरुवार को जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम रिमाइंडर ज्ञापन देकर एमबीसी आरक्षण में किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं करने की गुजारिश की गई है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष हरचंद् हांकला ने बताया कि पंचायत में निर्णय लिया गया था कि मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर फिलहाल जिला स्तर पर कार्रवाई की जाए। इसके बाद पूरे प्रदेश स्तर पर धरने प्रदर्शन और आंदोलन होंगे। एमबीसी आरक्षण में हस्तक्षेप ओर छेड़छाड़ बर्दास्त नहीं कि जायेगी। समिति संरक्षक हरि सिंह गुर्जर ने बताया कि गुर्जरों को मिले 5% आरक्षण में पूर्व में 5 जातियां जोड़ी गई थी इसके बाद 7 जातियां और जोड़ दी गई इस तरह से कुल 12 जातियां तो अभी तक 5% आरक्षण में समाहित की जा चुकी है। सरकार की मंशा और जातियों को भी जोड़ने की है। जिसके खिलाफ गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति आंदोलन का मानस बना रही है। गौरतलब है कि 13 साल में छह बार गुर्जर बनाम सरकार हुए गुर्जर आंदोलन में राजस्थान के 72 लोगों ने अपनी जान गवाई है। राज्य सरकार द्वारा राजस्थान पिछड़ा वर्ग संशोधन अधिनियम 2019 के तहत गुर्जर सहित पांच अन्य जातियां जिनमें गाड़िया लोहार, बंजारा, रेबारी और राईका को अति पिछड़ा वर्ग में 5% विशेष आरक्षण प्रदान किया गया है। बावजूद इसके अन्य जातियों को भी समाहित किया जा रहा है। जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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