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May 10, 2022
मधुकर कहिन
लो भाई !!!! अजमेर में बनकर तैयार हो गया भाजपा का आलीशान कार्यालय
अजमेर की बेघर कांग्रेस आज भी चलती है नेताओं के घर से
यहाँ के निकम्मे कांग्रेस नेताओं को वजह से ही अजमेर में कांग्रेस बन कर रह गई है बेघर लुगाई
नरेश राघानी
आज सुबह जब आकर ऑफिस बैठा ,तो मोबाइल पर भाजपा के नेताओं के संदेश आने लगे। हर नेता चाहे वह भाजयुमो का शहर अध्यक्ष राहुल जयसवाल हो या फिर भाजपा के शहर अध्यक्ष डॉ प्रियशील हाडा के प्रवक्ता गण। सभी सारे मीडिया को मैसेज भेज भेज कर कल सुबह 11:00 बजे जयपुर रोड स्थित भाजपा के नवनिर्मित कार्यालय के उद्घाटन* हेतु लोगों को आमंत्रित कर रहे हैं। भाजपा में जैसे उत्सव का माहौल बन गया है।
आपको जानकारी हेतु बताना चाहूंगा की–अजमेर में कांग्रेस के पास कांग्रेस कार्यालय के नाम पर किसी जमाने में जयपुर रोड पर मदन निवास नामक किराए का घर होता था। वह भी किसी धन्ना सेठ या किसी ट्रस्ट से किराए पर लिया हुआ था। जिसका वाद अजमेर शहर की जिला कांग्रेस कमेटी अपने अध्यक्षों के मार्फत कई सालों से झेलती आ रही थी। जिसके चलते यह भवन जर्जर अवस्था में पहुंच गया था। जहाँ बस मकड़ी के जाले और मिट्टी ही जमी हुई दिखाई देती थी। और कार्यालय केवल कांग्रेस की मीटिंग के दिन ही खोल कर साफ किया जाता था।
वर्षों बाद यह कार्यालय कांग्रेस अध्यक्ष महेंद्र सिंह रलावता के कार्यकाल के दौरान पूरी तरह से साफ सफाई और रंग रोगन करवा के तयार किया गया। और जैसा एक राजनैतिक दल का कार्यालय होना चाहिए उस रूप से कार्यालय संचालित किया जाना प्रारंभ हुआ।
जब रलावता का अध्यक्षीय कार्यकाल खत्म हुआ *यह कांग्रेस का घर केवल महेंद्र सिंह रलावता के निजी कार्यालय के रूप में ही नजर आने लगा। और हो भी क्यों नहीं ??? आखिर महेंद्र सिंह रलावता ही एक ऐसे अध्यक्ष थे जिन्होंने कांग्रेस के इस किराए के घर को वाकई कार्यालय की तरह चलाया। अब सुनने में आया है कि शायद रलावता ने भी यह भवन मकान मालिकों से बातचीत करके खुद के लिए ले लिया है।
बात करते हैं आगे की ... जैसे ही विजय जैन को शहर कांग्रेस अध्यक्ष* बनाया गया। तो वह अजमेर की बेघर कांग्रेस को उठाकर केसरगंज स्थित एक छोटी सी दुकान के भीतर लेकर चले गए । जो दुकान खुद विजय जैन का निजी कार्यालय हुआ करती थी। जैन का कार्यकाल भी खतम ही हुआ समझो। अब तो भाई !!! यही लगता है कि जैसे ही विजय जैन को पद मुक्त किया जाएगा , और किसी नए व्यक्ति को जब कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जाएगा , तो शायद वह फिर इस बेघर कांग्रेस को अपने घर से संचालित करने लगे।
लेकिन यहाँ सवाल यह है कि .... आखिर कांग्रेस जैसी राष्ट्रव्यापी 70 साल देश पर राज कर चुकी पार्टी अजमेर जिले में अपना घर भी नहीं बना सकी ????
इसका उत्तर है –सिर्फ और सिर्फ यहां के स्वार्थी और खुद तक सीमित खुदगर्ज कांग्रेस नेताओं के आपसी बैर की वजह से .... ही कांग्रेस अजमेर में आज तक बेघर है।
जानते हैं कैसे ??? इसका उत्तर इतिहास में छिपा है।
इतिहास में जरा पीछे उतर कर देखें तो – किशनगढ़ के वरिष्ठ नेता स्वर्गीव सत्यनारायण मोदानी ने , निजी खर्च पर किशनगढ़ में कांग्रेस कार्यालय का निर्माण किया था। उन्होंने अपना सारा जीवन कांग्रेस के गीत गाते गाते फूंक दिया । परंतु उन्हें कुछ खास प्राप्त नहीं हुआ। पुराने कांग्रेसी यह अच्छी तरह जानते हैं, कि मोदानी जब यह भवन बनवा रहे थे तब वह यही चाहते थे, कि गांधी परिवार का कोई व्यक्ति आकर कांग्रेस कार्यालय का उद्घाटन करें और उस समारोह में वह इस नए जिला कार्यालय की चाबी प्रदेश कांग्रेस को समर्पित कर दें। परंतु यह हो ना सका। क्यूंकि कांग्रेस के भीतर ही वैश्य समाज से जो उन के राजनैतिक प्रतिद्वंदी थे , उन्हें यह लगने लगा की इस से मोदानी का कद हाईकमान के सामने बहुत बड़ा हो जायेगा , और उन लोगों ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस आलाकमान के कान भर दिए और स्वर्गीय सत्यनारायण मोदानी का सपना साकार होने से रोक दिया गया। और वह कार्यालय मात्र किशनगढ़ कांग्रेस कमेटी का कार्यालय ही बनकर रह गया।
अजमेर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहते हुए भी कांग्रेसियों ने कार्यालय हेतु जमीन को व्यवस्था नहीं की । चाहे वो नरेन साहनी भगत हो या फिर डॉ श्रीगोपाल बाहेती किसी को भी इस बात का ख्याल नहीं रहा की कांग्रेस को एक घर बनवा दें।
पुरातन काल से ही जबरदस्त टांग खिंचाई और जूतम पैजार के आदि अजमेर के कांग्रेसी नेताओं के पास अपने राजनैतिक आकाओं की सेवा चंपी के लिए तो बहुत पैसे हैं लेकिन कांग्रेस कार्यालय के लिए किसी ने जेब में हाथ नहीं डाला।
हर बार नया अध्यक्ष आता है वह यही वादा करता है कि जब कांग्रेस सरकार आएगी तब कार्यालय हेतु जमीन अलॉट करवाकर जन सहयोग से कांग्रेस कार्यालय का निर्माण करवा देगा। परंतु जैसे ही उस व्यक्ति को अजमेर की कांग्रेस का अध्यक्ष पद मिल जाता है, उसे जयपुर बैठा राजनैतिक आका इतने लंबे लंबे निजी खर्चे बता देता है की नवनियुक्त अध्यक्ष बेचारे के पास कार्यालय तो छोड़िए खुद के लिए पैसा नहीं बचता है।
यही कारण है कि अजमेर में कांग्रेस एक ऐसी बेघर लुगाई बन कर रह गई है जिसे हराने वाला अध्यक्ष अपने घर से ही बैठकर चलाने लगता है।
ऐसे स्वार्थी वह खुद के आसपास अपनी दुनिया घुमाने वाले कांग्रेस हाईकमान के नेताओं को मैं याद दिलाना चाहता हूं, की *जरा अपने बारे में सोचना कम करें और कांग्रेस के बारे में सोचना शुरू कर दें। क्योंकि यह शहर कल सुबह जब भाजपा के कार्यालय का उद्घाटन होता हुआ देखेगा, तो जरूर उन सभी पूर्व कांग्रेस अध्यक्षों की नकारात्मक भूमिका पर सवाल खड़ा करेगा? जो पिछले 4 साल से प्रदेश में कांग्रेस की सरकार होने के बावजूद इस दिशा में कुछ नहीं सोच पाए।और बस अपनी ही सोचते रहे ।
खैर !!! अपुन का काम था सबको ये सब कुछ खोल खोल के खुला बोल के बताना , से कर दिया। अब देखें अजमेर के कांग्रेस नेताओं को कब शर्म आती है ?? या फिर आती भी है या नहीं।
फिलहाल तो यही दिखता है की अजमेर की कांग्रेस कल भी बेघर थी , आज भी बेघर है और शायद ऐसे ही सदा बेघर रहेगी।
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
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