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क़लमकार: पलाड़ा का वसुंधरा से मिलना क्या कोई नया गुल खिलायेगा

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February 26, 2021

प्रियशील हाड़ा अपनी मेयर पत्नी को लेकर पलाड़ा से सहयोग मांगने क्यों गए

पलाड़ा का वसुंधरा से मिलना क्या कोई नया गुल खिलायेगा




प्रियशील हाड़ा अपनी मेयर पत्नी को लेकर पलाड़ा से सहयोग मांगने क्यों गए





विधायक देवनानी का लगातार पलाड़ा के संपर्क में रहने का क्या आशय है 




क्या अंदरखाने में कुछ चल रहा है





सुरेन्द्र चतुर्वेदी





राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के समर्थन में सक्रिय हो रहे लोग संगठित हो रहे हैं ।लेटर बम इसकी बानगी है ।प्रदेश के शीर्ष नेता लेटर बम पर हस्ताक्षर करने वाले भी बीसों विधायकों से नाराज हैं। साफ कह चुके हैं कि इस तरह की अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी ।आए रोज भाजपा में मची हुई खलबली को लेकर समाचार प्रकाशित हो रहे हैं।






चटपटे समाचारों के बीच अजमेर के विभिन्न अखबारों में एक समाचार प्रकाशित हुआ। भाजपा से नाराज़ होकर ज़िला प्रमुख बनी श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा के पति भंवर सिंह पलाड़ा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ गुलदस्ता लेकर खड़े नज़र आए । गुलदस्ते के लाल गुलाबी फूल बता रहे थे कि उनकी खुशबू आज भी भाजपाई ही बनी हुई है ।





वसुंधरा राजे भंवर सिंह पलाड़ा की हमेशा सराहना करती रही हैं।वे उनकी बेबाक और स्पष्ट वक्ता की छवि को पसंद करती आई हैं।वे जानती हैं कि पलाड़ा राजस्थान के उन निडर और बेबाक़ नेताओं में से एक हैं जो वक्त आने पर किसी का भी हाजमा दुरुस्त करने में नहीं चूकते।





उन्हें पता है कि नाराज़ होने पर पलाड़ा अपनी नाराज़गी व्यक्त करने का कोई मौका नहीं चूकते।यही वज़ह है कि कई बार तो वे वसुंधरा जी तक को लेकर दो टूक हो चुके हैं ।





पलाड़ा राजस्थान के इकलौते ऐसे नेता हैं जो पार्टी को सम्मान देते समय अपने सम्मान का भी ध्यान रखते हैं ।वे भाजपा के परम भक्त नेताओं में से एक रहे । राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से उनका गहरा नाता रहा ।पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा एक तरफा रही। वे हमेशा भाजपा के भगवा रंग में हिंदूवादी परंपराओं के पोषक रहे ।






उन्होंने अपनी इसी एक निष्ठा को लेकर जब जिला प्रमुख के चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की तो उनकी इस इच्छा के विरोध में कई स्वार्थी नेता संगठित हो गए ।हाँ ,वे सब जो पलाड़ा के चमत्कारिक व्यक्तित्व से डरते थे। खौफ़ खाते थे इस बात से कि यदि पलाडा जिला प्रमुख बन गए तो उनके मुंह का लगा हुआ खून साफ़ हो जाएगा। पलाड़ा की ईमानदार छवि से डरे नेता संगठित हो गए ।अजमेर ज़िला देहात अध्यक्ष देवीशंकर भूतड़ा, ओंकार सिंह लखावत, प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर सतीश पूनिया, चंद्रशेखर शर्मा सहित और भी कई नेताओं ने एकमुश्त होकर यह तय कर लिया कि किसी भी हाल में पलाड़ा को टिकट नहीं दिया जाएगा । यही हुआ।उनको जिला परिषद चुनाव का टिकट ना देकर उनकी पत्नी को टिकट दिया गया ।और तो और चुनाव जीतने के बाद उन्होंने जब अपनी पत्नी श्रीमती सुशील कंवर के लिए जिला प्रमुख का टिकट मांगा तो भी इंकार कर दिया गया ।






पलाड़ा ने पार्टी के दिग्गजों को राजपूती आन बान और शान का असली रूप दिखाते हुए अपनी पत्नी श्रीमती सुशील कंवर पलाड़ा को जिला प्रमुख के लिए निर्दलीय चुनाव मैदान में उतार दिया। फिर पार्टी के सदस्य और कांग्रेस की मदद से उन्होंने नया इतिहास रच दिया।






पार्टी के पूनिया, चंद्रशेखर, भूतड़ा, लखावत सब धरे रह गए। उन्होंने जो चाहा करके दिखा दिया। उनकी पत्नी जिला प्रमुख बन गईं। पार्टी के चेहरे से मुखौटा उतार दिया गया ।





दूसरी तरफ लोग कहने लगे कि पलाड़ा अब कांग्रेस ज्वाइन कर लेंगे। कांग्रेसी नेताओं में भी इस बात का खौफ़ तारी हो गया कि यदि उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया तो उनका क्या होगा कांग्रेसी भी अच्छी तरह जानते हैं कि यदि पलाड़ा जैसे ईमानदार और स्वच्छ छवि के नेता उनकी पार्टी में आ गए तो उनके पांव के नीचे से ज़मीन छीन ली जाएगी । आज भी ज़िले के दिग्गज कांग्रेसी नेता चाहते हैं कि पलाड़ा कांग्रेस में ना आए ताकि उनकी रोज़ी-रोटी चलती रहे। शायद पलाड़ा खुद भी नहीं चाहते कि वे कांग्रेस में जाएं। यदि जाना होता तो जिला प्रमुख पद पर अपनी पत्नी को क़ाबिज़ करवाने के तुरंत बाद वे भाजपा को आईना दिखाने के लिए कांग्रेस पार्टी का दामन थाम लेते, मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया।





जहां तक मैं उन्हें समझता हूं, उनकी रगों में भगवा और हिंदूवादी लहू दौड़ता है ! संस्कारों से ही वे भाजपाई हैं!फ़ितरत से ही वे सच्चे हिंदू हैं ! यही वजह है कि आज भी वे मन से भाजपा से अलग नहीं हो पाए हैं ।






अभी कुछ दिनों पहले भाजपा के शहर अध्यक्ष प्रिय शील हाडा अपनी पत्नी मेयर ब्रजलता के साथ उनका सहयोग मांगने उनके निवास पर गए। पूर्व शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी भी उनसे मिलने पहुंचे ।अब पलाड़ा स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा जी से मिलने जयपुर पहुंचे ।यह सब बातें कुछ ना कुछ कह रही हैं।






पार्टी के अंदर खाने में पलाड़ा को फिर से पार्टी में लिए जाने की सुगबुगाहट चल रही है। भाजपा का एक खेमा जिसने पलाड़ा को संगठित होकर टिकट नहीं दिया भले ही आज भी उन्हें अपना नहीं मान रहा हो लेकिन लेटर बम पर जिन विधायकों ने हस्ताक्षर किए वे सारे विधायक पलाड़ा के साथ हैं । वसुंधरा जी भी चाहती हैं कि पलाड़ा जैसे मजबूत और सच्चे योद्धा को भाजपा अपनी सेना के साथ ही रखे ।





अब देखना यह है कि कब भाजपा पुनः पलाड़ा को अपने से जोड़कर ,अपनी पहले की गई गलती को सुधारती है । देखें कब फिर से भाजपा को सद्बुद्धि मिलती है


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