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January 29, 2021
और अब चल रहा है मवेशियों की बाड़ेबंदी का सिलसिला
भाजपा के मुक़ाबले बाड़े बंदी में काँग्रेस पिछड़ी
किशनगढ़ में स्वयम्भू बाहुबली ने सांसद व पुलिस अधिकारी की इज़्ज़त को ललकारा: दोनों के कराए मुँह बन्द
केकडी, बिजयनगर में काँटे ही काँटे
अजमेर में खेली गई कीचड़ उछाल होली
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
शेर! भेड़ बकरियों को उठाकर जंगल ना ले जाए या अपना भोजन ना बना ले इसके लिए उन्हें बाड़ों में रखा जाता है। जिला प्रमुख के गत चुनाव में भाजपा ने ऐसा नहीं किया तो देवीशंकर भूतड़ा की बकरियों को पलाडा जैसा बब्बर शेर उनकी खुली आँखों के सामने से उठाकर ले गया। शेर ने बकरियों से अपना पेट तो नहीं भरा मगर भूतड़ा के सिर पर चढ़ा भूत जरूर उतार दिया।
इस बार भाजपा अतिरिक्त सावधान है ।उसने अपनी भेड़ बकरियों को पहले से ही बाड़े में बंद रखने का फैसला कर लिया है। दरअसल भाजपा जान गई है कि उनके उम्मीदवार सस्ती व घटी दरों पर इधर से उधर हो सकते हैं। यही वजह है कि राज्य में बाड़े- बंदी की (आज़ादी के आधे दशक बाद) परंपरा शुरू की गई है ।
चुनाव में उनका कौन सा उम्मीदवार हारेगा, जीतेगा ! फिलहाल कुछ पता नहीं मगर बाड़े बंदी की पिकनिक में सभी को विजयी मानकर मस्ती करवाई जाएगी ।
अजमेर में कांग्रेसी उम्मीदवारों को बाड़े में कौन बंद करें फिलहाल यह तय नहीं हो पा रहा ।पार्टी के दिग्गज नेताओं की इस व्यवस्था में कोई रुचि नज़र नहीं आ रही। निवर्तमान शहर अध्यक्ष विजय जैन ने कहा है कि कांग्रेस का बाड़े -बंदी में कोई विश्वास नहीं !! वे सरासर झूठ बोल रहे हैं ।गहलोत और सचिन पायलट इस व्यवस्था का आपसी लड़ाई में खासा प्रदर्शन कर चुके हैं। हां, यह बात ज़रूर है कि कांग्रेस में इतने बाड़े हैं कि कौन किस बाड़े में बंदी रखा जाए यही पता नहीं ,और ना ही यह संभव है ।
ये रलावता का बाड़ा, ये हेमंत भाटी का बाड़ा, यह डॉ जयपाल का बाड़ा, यह डॉ बाहेती का बाड़ा, ये विजय जैन का बाड़ा, ये रघु शर्मा का बाड़ा, ये गहलोत का बाडा, ये सचिन पायलट का बाड़ा ! इतने सारे पोपा बाई के बाड़े! इनमें कितने उम्मीदवारों को कौन रखें यह बताना ही संभव नहीं ,रखने की बात तो दूर की है।
किशनगढ़ में कांग्रेस उत्साह में है। इतनी उत्साह में कि जीत हार की चिंता किए बग़ैर बाहुबली बनी हुई है। नेताओं के दल्ले मचा रहे हैं हल्ले!!
कल एक कांग्रेसी उम्मीदवार ने तो हद ही कर दी ।सांसद भागीरथ चौधरी के साथ ही नहीं, पुलिस अधिकारी के साथ भी अभद्रता कर दी। किसी भी मामूली उम्मीदवार की ये हिम्मत नहीं हो सकती कि वह पुलिस अधिकारी के साथ भी अभद्रता कर दे! मगर प्रदीप अग्रवाल कोई मामूली उम्मीदवार नहीं हैं ! उनके ऊपर सत्ताधारी बड़े नेताओं का हाथ है! वे किसी के साथ कुछ भी कर सकते हैं ! चुनाव से पहले उन्होंने जो कुछ किशनगढ़ में किया पूरी जनता जानती है। यज्ञ नारायण अस्पताल जानता है। किशनगढ़ का रिमोट कंट्रोल उनके ही हाथ में माना जाता रहा है! पुलिस अधिकारी के साथ उन्होंने अभद्रता की और वह खामोश होकर बैठ गए। वह शायद समझदार हैं। जानते हैं कि ज़रा सा अटके तो अग्रवाल साहब उनकी नौकरी ले लेंगे। कोई और सिरफिरा अफ़सर होता तो पुलिस पर हाथ डालना क्या होता है समझा देता ।जो बंदा सांसद भागीरथ चौधरी को दिन में तारे दिखा सकता है उसका पुलिस क्या बिगाड़ सकती है ? प्रदीप अग्रवाल जी की जीत हार का फैसला जनता ने मशीनों में बटन दबा कर बंद कर दिया है।वे कितने बड़े बाहुबली है पता चल जाएगा ।
उधर किशनगढ़ विकास मंच के संयोजक और विधायक सुरेश टाक ने फिर हुंकार भरी है ।उनके दावे बहुत ऊँचे है।मैं उनपर नहीं जाता।हो सकता है कि 8 से 12 खिलाड़ी उनके भी जीत जाएं।उनके मंच ने भाजपा उम्मीदवारों की नाक में नकेल डाली है ।उनसे कांग्रेस पार्टी को फायदा मिलेगा। उनकी वजह से इस बार भाजपा का बोर्ड खतरे में पड़ सकता है।
केकडी में इस बार डॉ रघु शर्मा और उनके पुत्र सागर शर्मा ने चुनावों को कांटे की टक्कर पर ला खड़ा किया है। वे मैदान में मौजूद नहीं रहते तो भाजपा नेता अनिल मित्तल और राजेंद्र विनायका कांग्रेस को निर्वस्त्र कर देते ।शर्मा कांग्रेस को चौराहे पर बेलिबास नहीं होने देंगे ।मुकाबला बराबर का रहेगा ।यहां भी निर्दलीय बोर्ड बनाने में निर्णायक सिद्ध होंगे।
बिजयनगर में भाजपा कांग्रेस पर भारी पड़ रही है ।भाजपा के नेताओं की निगरानी और भूतड़ा को साइड लाइन करने का लाभ भाजपा को मिल रहा है ।गुलाब चंद कटारिया ने केकड़ी और बिजयनगर में उम्मीदवारों की उम्मीदों को मजबूत किया है।
अजमेर में इस बार भाजपा के कई दिग्गज चुनाव मैदान से बाहर हो जाएंगे ।चाहूँ तो साफ-साफ भी लिख सकता हूँ मगर यह उन लोगों का अपमान होगा जो अपने आप को बारूदी बम समझते हैं।
कांग्रेस के कई नए पुराने चेहरे इस बार चुनाव जीतकर लोगों को चौंका देंगे। सतीश बंसल ,रमेश सोनी, नीरज जैन जैसे मजबूत नेताओं की जीत में इस बार दरार नज़र आ रही है। शिवांगी शर्मा, जय श्री शर्मा ,योगेंद्र ओझा ,रवि शर्मा जैसे नेताओं को युद्ध में जीता हुआ तो नहीं कह सकता मगर जीत के करीब मान रहा हूं।
कांग्रेस के बागी शैलेंद्र अग्रवाल लोगों को चौंका सकते हैं ।...और हां अब एक नज़र अजमेर के चुनाव में लोगों पर कीचड़ उछालने के कारोबार पर भी ।
अजमेर में चुनावी दंगल में आरोप और प्रत्यारोप के साथ एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का सिलसिला भी खूब चला। जीत हार के खेल को इस तरह खेला गया कि नैतिकता तार-तार हो गई। बाजारू मीडिया ने भी ले देकर खूब खबरें बेचीं।
रमेश सोनी के विरुद्ध कभी दैनिक नवज्योति में प्रकाशित पुलिस मेहरबान ,तो लाखों हड़पने वाला भाजपा नेता पहलवान शीर्षक का जमकर इस्तेमाल हुआ। इसमें फर्जी कंपनी गोल्डन हेलो मल्टीट्रेड को लेकर निवेशको को लूटने का आरोप लगाया गया ।
वार्ड 80 से निर्दलीय प्रत्याशी प्रेमलता बुगालिया ने पूर्व पार्षद चन्द्रेश साँखला की पर्चा छपवाकर भद्द उड़ाई तो साँखला ने उनका ऑडियो वायरल कर उनका नशा उतार दिया, जिसमें उन्हें वे भय्या भय्या कह कर मदद की गुहार लगा रही थीं।
वार्ड 6 से भाजपा के बागी प्रत्याशी कुंदन सिंह वैष्णव ने भाऊबली देवनानी के विरुद्ध जो कहा वह यहां बताने योग्य नहीं ।वार्ड 26 से भाजपा प्रत्याशी जितेंद्र रंगवानी और रश्मि हिंगोरानी के बीच भी लंबे युद्ध चले। पहले रंगवानी ने सार्वजनिक तौर पर रश्मि हिंगोरानी और उनके पति पर जुआ खिलाने के आरोप लगाए तो उन्होंने भी जीतेंद्र रंगवानी पर जमकर पलटवार किया ।उन पर शराब और गुटके ब्लैक करने के पर्चे बांटे गए
वीरेंद्र वालिया और राजकुमार वजीरानी का वीडियो भी चर्चाओं में है।
एक स्थानीय यू ट्यूब चैनल पर भाजपा के बागी नेता अशोक राठी जिनकी पत्नी इंदू राठी बागी प्रत्याशी जिन्हें भाजपा से निकाल दिया गया है की काले कारनामों की खूब न्यूज़ चलाई गई। एक निर्दलीय प्रत्याशी की न्यूज़ चुनावी माहौल में प्रमुखता से चलाना भी चर्चित रहा।
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