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December 26, 2020
चीन अक्सर अपनी कुंठा सरकारी मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित करता रहा है। वह भारत और रूस के करीबी रिश्तों पर अपनी भड़ास निकालने की कोशिश करता रहा है।
इसी कड़ी में भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के रद्द होने की खबर सामने आते ही उसने जहर घोलने की कोशिशें शुरू कर दी हैं। उसने कहा है कि दोनों देशों के रिश्तों में दरार आना शुरू हो गई है।
ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में लिखा है कि वर्ष 2000 के बाद पहली बार भारत-रूस शिखर सम्मेलन टला है जो संकेत देता है कि दोनों देशों के रिश्तों में दरार आ गई है। हालांकि उसने यह जिक्र भी किया है कि भारत और रूस दोनों ने कहा है
कि यह सम्मेलन कोरोना वायरस संक्रमण के मद्देनजर टाला गया है लेकिन साथ ही लिखा कि इस बयान से रिश्तों में आई खटास छुपाई नहीं जा सकती है।
उसने लिखा, मॉस्को को लगता है, चूंकि नई दिल्ली वाशिंगटन से नजदीकी बढ़ा रहा है इसलिए दोनों के रिश्ते प्रभावित हो रहे हैं। इसी के साथ ग्लोबल टाइम्स ने दोहरी चाल खेलते हुए उन विश्लेषकों को भी छापा है जिन्होंने कहा कि भारत-रूस रिश्ते सिर्फ सहयोगी नहीं बल्कि दोनों देशों का गठबंधन उससे भी आगे का है। दोनों में हितों को लेकर भी टकराव नहीं है।
ग्लोबल टाइम्स का कहना है कि भारत को हथियारों के आयात में अब तक रूस का आधे से ज्यादा हिस्सा रहा है लेकिन अब अमेरिकी दबाव में भारत ने अमेरिका से भी हथियार लेना शुरू कर दिया है। इससे रूसी हिस्सा कम हुआ है।
अखबार ने 8 दिसंबर को रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने पश्चिमी देशों पर भारत को रूस से दूर करने का आरोप लगाया था।
चीन लगातार रूस के साथ अपने रिश्ते बेहतर करने में लगा है। वह चाहता है कि रूस और भारत के बीच चौड़ी खाई खोदी जाए ताकि वह अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने में रूस का समर्थन हासिल कर सके।
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