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November 18, 2020
अमेरिका के विशेष राजदूत सैमुएल डी ब्राउनबैक ने अक्टूबर में भारत की अपनी यात्रा को याद करते हुए अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए एक कांफ्रेंस कॉल के दौरान कहा कि वह भारत के धर्मशाला में तिब्बती समुदाय से बात करने और उन्हें यह बताने गए थे कि ‘‘अमेरिका चीन के अगला दलाई लामा चुने जाने के खिलाफ है उन्होंने कहा कि , ‘‘उनके पास ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है। उनके पास ऐसा करने का कोई धार्मिक आधार नहीं है। बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायी सैकड़ों बरसों से अपना नेता सफलतापूर्वक चुनते आए हैं और उनके पास अब भी ऐसा करने का अधिकार है।’’
ब्राउनबैक ने कहा कि अमेरिका इस बात का समर्थन करता है कि धार्मिक समुदायों को अपना नेता चुनने का अधिकार है। इसमें अगले दलाई लामा भी शामिल हैं।’’
उन्होने आगे कहा कि, ‘‘हमारा मानना है कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का यह कहना सरासर गलत है कि उन्हें दलाई लामा चुनने का अधिकार है। आतंकवाद से निपटने का तरीका सभी को बंद करके रखना नहीं है। आतंकवाद से निपटने के लिए धार्मिक स्वतंत्रता देना आवश्यक है।’’
साथ ही ब्राउनबैक ने चीन से उइगर, बौद्ध धर्म के तिब्बती अनुयायियों, इसाइयों और फालुन गोंग समेत विभिन्न आस्थाओं पर हमला करना बंद की अपील की है।
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