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October 21, 2026
जयपुर। पूर्व सांसद रामचरण बोहरा ने कहा कि दुनिया के कई देशों में राजनीतिक अस्थिरता, हिंसक विरोध प्रदर्शनों और सत्ता परिवर्तन से बने हालात भारत के विपक्ष के लिए सबक हैं। उन्होंने कहा कि फ्रांस, बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रमों के बीच भारत की स्थिरता, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत नेतृत्व का महत्व और साफ होता है, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व ने देश में ‘रिजीम चेंज’ की कोशिशों को कामयाब नहीं होने दिया।बांग्लादेश में अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को इस्तीफा देकर देश छोड़ना पड़ा था, और नेपाल में सितंबर 2025 में युवाओं के आंदोलन के बाद प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस्तीफा दिया था।
कांग्रेस और विपक्ष पर आरोप
बोहरा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और विपक्ष के कुछ दूसरे दलों ने सत्ता की लालसा में देश में ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की, जिससे लोगों में भ्रम, असंतोष और अराजकता बढ़े। उन्होंने कहा कि विपक्ष की राजनीति का मकसद जनहित के मुद्दों का समाधान नहीं, बल्कि किसी भी तरह केंद्र सरकार को कमजोर करना रह गया है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन विरोध के नाम पर देश में भय, हिंसा और अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। उनके मुताबिक राष्ट्र की एकता, अखंडता और सामाजिक सौहार्द से खिलवाड़ करने वाली राजनीति को जनता समर्थन नहीं देगी।
‘भारत कमजोर राष्ट्र नहीं’
बोहरा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और उनकी नीतियों ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक व्यवस्था में लोगों का भरोसा मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि भारत कोई कमजोर राष्ट्र नहीं है और आज वैश्विक मंच पर आत्मविश्वास के साथ खड़ा है। उन्होंने विपक्ष से नकारात्मक राजनीति छोड़कर विकास और जनकल्याण के मुद्दों पर भूमिका निभाने को कहा।बोहरा ने कहा कि देश की शांति, लोकतंत्र और राष्ट्रीय एकता से कोई समझौता नहीं किया जा सकता, और अराजकता के जरिए राजनीतिक फायदा उठाने की सोच रखने वालों को जनता लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देगी। बोहरा ने 19 अक्टूबर को भी फ्रांस, बांग्लादेश और नेपाल के हालात को भारत के विपक्ष के लिए सबक बताया था।
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