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राजस्थान न्यूज़: नामांकन की आखिरी तारीख से पहले अलवर में कांग्रेस की संगठनात्मक बैठक: पर्यवेक्षक वैभव गहलोत पहुंचे, जूली और भंवर जितेंद्र सिंह भी मौजूद

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October 12, 2026

धनतेरस के चलते पहले तीन चरणों की तारीखें एक दिन पहले खिसकाई जा चुकी हैं।

अलवर। पंचायती राज चुनावों के लिए जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के नामांकन की आखिरी तारीख 13 अक्टूबर है, और उससे ठीक पहले अलवर में कांग्रेस ने चुनावी तैयारियों को लेकर संगठनात्मक बैठक की। बैठक में पार्टी के जिला पर्यवेक्षक वैभव गहलोत शामिल हुए। कांग्रेस ने उन्हें इसी महीने अलवर जिले का पर्यवेक्षक नियुक्त किया है (पढ़ें— 41 जिलों में पर्यवेक्षक)।

बैठक में कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव भंवर जितेंद्र सिंह, राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, एआईसीसी सचिव और राजस्थान के सह-प्रभारी चिरंजीव राव, भरतपुर सांसद संजना जाटव और पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ के साथ जिले के पार्टी पदाधिकारी मौजूद रहे।

नामांकन की खिड़की अब बंद होने को है

राज्य निर्वाचन आयोग के घोषित कार्यक्रम के अनुसार जिला परिषद सदस्यों के लिए लोक सूचना 8 अक्टूबर को जारी हुई थी और नामांकन 13 अक्टूबर तक भरे जा सकते हैं। नाम वापसी 15 अक्टूबर तक है । पंच और सरपंच के नामांकन इससे अलग चलते हैं और मतदान से एक दिन पहले लिए जाते हैं। धनतेरस के चलते पहले तीन चरणों की तारीखें एक दिन पहले खिसकाई जा चुकी हैं।

नतीजे दो हिस्सों में आएंगे। सरपंच पद के परिणाम 24 अक्टूबर से आने लगेंगे, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की गिनती सभी जिलों में एक साथ 20 नवंबर को होगी। यानी जिस नामांकन की खिड़की 13 अक्टूबर को बंद हो रही है, उसके उम्मीदवारों को नतीजे के लिए उसके बाद भी 38 दिन इंतजार करना होगा।

तारीखें जो तय हैं

जिला परिषद सदस्यों के लिए लोक सूचना — 8 अक्टूबर
नामांकन की आखिरी तारीख — 13 अक्टूबर (मंगलवार)
नाम वापसी — 15 अक्टूबर (गुरुवार) तक
सरपंच के नतीजे — 24 अक्टूबर से
जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की गिनती — 20 नवंबर (शुक्रवार)

दावेदार ध्यान दें — हर पद की खिड़की अलग है

जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्य — नामांकन की खिड़की पहले ही खुल चुकी है और 13 अक्टूबर को बंद हो जाएगी। कुल 6 दिन की यह खिड़की 8 अक्टूबर की लोक सूचना से शुरू हुई थी।

पंच और सरपंच — इन पदों के नामांकन मतदान से एक दिन पहले लिए जाते हैं, पहले चरण में 23 अक्टूबर को। इसलिए इन दावेदारों के पास समय अपेक्षाकृत ज्यादा है।

नामांकन से पहले उम्र, मतदाता सूची में नाम और दूसरी पात्रता शर्तें जांच लें — इन्हीं पर सबसे ज्यादा नामांकन निरस्त होते हैं।

बैठक में शामिल नेताओं के पद और इस चुनाव में उनकी जिम्मेदारी इस तरह है—

नेतापद और जिम्मेदारी
वैभव गहलोतअलवर जिले के लिए कांग्रेस के पंचायत चुनाव पर्यवेक्षक; पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे
भंवर जितेंद्र सिंहकांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व केंद्रीय मंत्री
टीकाराम जूलीराजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और अलवर ग्रामीण से विधायक
चिरंजीव रावएआईसीसी सचिव और राजस्थान के सह-प्रभारी
संजना जाटवभरतपुर से सांसद
धर्मेंद्र राठौड़पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष; खैरथल-तिजारा जिले के पर्यवेक्षक

अलवर कांग्रेस के लिए यह बैठक क्यों मायने रखती है

अलवर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का गृह जिला है और वे यहीं अलवर ग्रामीण सीट से विधायक हैं। भंवर जितेंद्र सिंह भी लंबे समय से अलवर की राजनीति में सक्रिय हैं। इसी जिले में पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को पर्यवेक्षक लगाया है, और अलवर से अलग होकर बने खैरथल-तिजारा जिले की जिम्मेदारी बैठक में मौजूद धर्मेंद्र राठौड़ के पास है। इस लिहाज से एक ही बैठक में जिले और उससे निकले नए जिले, दोनों के पर्यवेक्षक मौजूद रहे।

चुनाव का दायरा निकाय से 15 गुना बड़ा

पंचायती राज संस्थाओं के इन चुनावों में करीब 1,55,000 पदों पर निर्वाचन होना है, जबकि इसी साल हुए नगरीय निकाय चुनावों में 10,245 पदों पर चुनाव हुए थे। यह 1,44,755 पद ज्यादा हैं, यानी दायरा करीब 15.1 गुना बड़ा । इसी पैमाने को देखते हुए कांग्रेस ने प्रदेश के सभी 41 जिलों में पर्यवेक्षक तैनात किए हैं। यह जिम्मेदारी 35 नेताओं को दी गई है, जिनमें से 6 के पास दो-दो जिले हैं। इनमें 5 सांसद और 7 विधायक, यानी 12 निर्वाचित जनप्रतिनिधि शामिल हैं।


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