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September 29, 2026
प्रत्येक विधान सभा व लोक सभा क्षेत्र का लोकल एम्प्लायमेंट एण्ड स्कील मैप तैयार किया जाना आवश्यक -श्री देवनानी
श्री देवनानी बोले सामूहिक संकल्प, युवाओं की सोच में बदलाव और सशक्त रोजगार ढांचे से ही होगा विकसित भारत का लक्ष्य साकार
स्पीकर श्री देवनानी ने नई दिल्ली के इण्डिया हैबिटेट सेंटर में सांसदों, विधायकों, उद्योग और शिक्षा जगत के विशेषज्ञों से रोजगार सृजन, नये निवेश और उद्योगों के विस्तार पर किया मंथन
राष्ट्र प्रथम नारा ही नहीं बल्कि यही हमारी जीवन दृष्टि -श्री देवनानी
अजमेर , 29 सितम्बर। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने कहा है कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक विधान सभा और लोकसभा क्षेत्र का लोकल एम्प्लायमेंट एण्ड स्कील मैप तैयार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश के हर क्षेत्र की पर्यटन, कृषि प्रसंस्करण, इंजिनियरिंग, रिनिवल एनर्जी और डिजिटल व्यवस्थाएं अलग-अलग तरह की होती है। स्थानीय उद्योगों को बढावा देकर, युवाओं की सोच में बदलाव लाकर, पढाई व हाथ के काम में समन्वय का वातावरण निर्माण कर हम विकसित भारत के संकल्प को साकार कर सकते है।
स्पीकर श्री देवनानी मंगलवार को नई दिल्ली के इण्डिया हैबिटेट सेंटर के गुलमोहर हॉल में विकसित भारत@2047 के लिए भारत के रोजगार ढांचे की मजबूती विषयक कार्यशाला में सांसदों, विधायकों, उद्योग और शिक्षा जगत के विषय विशेषज्ञों को सम्बोधित कर रहे थे। समारोह में एनएफपीआरसी फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं राज्य सभा सांसद श्री तरुण चुघ ने स्पीकर श्री देवनानी का स्वागत किया।
सामूहिक संकल्प से रचेंगे इतिहास- श्री देवनानी ने कहा कि युवा शक्ति के पौरुष, मातृ शक्ति के सशक्तिकरण, श्रम, सामूहिक संकल्प, आत्मनिर्भरता और व्यवहारिक ज्ञान से ही हम नया इतिहास रचेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में रोजगार आज के रोजगार जैसा नहीं रहेगा। एआई, ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, सेमिकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी, बॉयोटेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा और डिजिटल सेवाएं हमारी अर्थव्यवस्था की प्रकृति को बदल देंगे। इसके लिए हम सभी को रिस्कीलिंग और लाइफलांग लर्निंग के लिए निरन्तर तैयार रहना होगा।
युवा कौशल के खोले जायेंगे नये द्वार- श्री देवनानी ने कहा कि नीति तभी प्रभावशाली होती है जब उसके पीछे ठोस अध्ययन, धरातल की वास्तविकता और उसके परिणामों का निरन्तर मूल्यांकन किया जाये। श्री देवनानी ने कहा कि देश की रोजगार वास्तुकला को अधिक सुदृढ़, समावेशी और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना समय की आवश्यकता है। भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है और युवाओं की क्षमता को कौशल, अवसर एवं उद्यमिता से जोड़कर रोजगार के नए द्वार खोले जा सकते हैं।
रोजगार राष्ट्र की उत्पाद शक्ति- श्री देवनानी ने कहा कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, तकनीकी प्रगति और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव के बीच रोजगार के पारंपरिक स्वरूप में तेजी से बदलाव हो रहा है। उन्होंने कहा कि रोजगार केवल नौकरी उपलब्ध करा देने का ही विषय नहीं है। यह व्यक्ति की क्षमता, कौशल सम्मान, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र की उत्पादक शक्ति से जुडा हुआ है।
भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र- श्री देवनानी ने कहा कि जब कोई युवा अपनी शिक्षा को कौशल में, कौशल को कार्य में और कार्य को मूल्य सृजन में परिवर्तित करता है तो वह व्यक्तिगत जीवन के साथ राष्ट्र की अर्थव्यवस्था को भी आगे बढाता है। ऐसे में शिक्षा और कौशल विकास को उद्योगों की वर्तमान एवं भावी आवश्यकताओं से जोड़ना आवश्यक है। युवाओं को केवल रोजगार पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में भी प्रभावी प्रयास किए जाने चाहिए। भारत विश्व का सबसे युवा राष्ट्र है। आबादी का 65 प्रतिशत हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु के युवाओं का है। श्री देवनानी का मानना था कि विकसित भारत @2047 के लक्ष्य को साकार करने के लिए युवा शक्ति और रोजगार ढांचे को सशक्त करना होगा।
स्टार्टअप को प्रोत्साहन देना आवश्यक- स्पीकर श्री देवनानी ने कहा कि रोजगार की मजबूत व्यवस्था के लिए कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप, स्टार्टअप, स्वरोजगार और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को प्रोत्साहन देना महत्वपूर्ण है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल आधारित रोजगार के अवसर विकसित करने के साथ-साथ डिजिटल अर्थव्यवस्था से युवाओं को जोड़ना भी आवश्यक है।
समन्वय जरूरी- स्पीकर श्री देवनानी ने कहा कि महिलाओं की श्रमबल में अधिक भागीदारी के लिए सुरक्षित एवं अनुकूल कार्य वातावरण, कौशल प्रशिक्षण, उद्यमिता के अवसर और कार्यस्थल से जुडी आवश्यक सुविधाओं को भी बढ़ावा देना चाहिए। रोजगार की नीतियों का उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग और देश के प्रत्येक क्षेत्र तक अवसरों की समान पहुंच सुनिश्चित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि विकसित भारत @2047 केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि ऐसा भारत बनाने का संकल्प है जिसमें प्रत्येक युवा को अपनी प्रतिभा और क्षमता के अनुरूप आगे बढ़ने का अवसर मिले। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकारों, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थानों तथा कौशल विकास से जुड़े संगठनों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
राजस्थान में रोजगार क्षमता के लिए स्थानीय को दिया जा रहा है बढ़ावा- श्री देवनानी ने कहा कि राजस्थान में भी युवाओं के कौशल, उद्यमिता और रोजगार क्षमता को बढ़ाने के लिए स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप प्रयासों को निरंतर गति दी जा रही है। रोजगार के नए अवसरों का सृजन, कौशल में सुधार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर प्रदेश के युवा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
प्रभावी हो रोजगार व्यवस्था- श्री देवनानी ने आह्वान किया कि विकसित भारत @2047 के संकल्प को जनभागीदारी से साकार करने के लिए रोजगार को विकास की केंद्रीय धुरी बनाते हुए ऐसी रोजगार व्यवस्था विकसित की जाए, जो युवाओं की आकांक्षाओं, उद्योगों की जरूरतों और देश की भविष्य की आर्थिक आवश्यकताओं के बीच प्रभावी सेतु बन सके।
राष्ट्र प्रथम हमारी जीवन दृष्टि- श्री देवनानी ने कहा कि राष्ट्र प्रथम एक नारा ही नहीं है बल्कि यही हमारी जीवन दृष्टि है। उन्होंने कहा कि यह दर्शन हमें हमारे विकसित भारत के संकल्प को साकार करने का महत्वपूर्ण आधार रहेगा। इस कार्यशाला में देश के विभिन्न भागों से आये सांसद, विधायक और विभिन्न क्षेत्रों के विषय विशेषज्ञ मौजूद थे।
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