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September 3, 2026
जयपुर। राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में टिकट वितरण, बगावत और सिंबल से जुड़े विवादों के बाद कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने संबंधित जिलों और निकाय प्रभारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है। सबसे गंभीर मामला भीलवाड़ा नगर निगम का माना जा रहा है, जहां कांग्रेस के 17 प्रत्याशियों के अधिकृत सिंबल समय पर जमा नहीं हो पाए। पीसीसी अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि भीलवाड़ा मामले में प्रभारी, जिलाध्यक्ष और कोऑर्डिनेटर से 48 घंटे के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा प्रदेश के जिन-जिन निकायों में बगावत, प्रत्याशी बदलने या नामांकन से जुड़े विवाद सामने आए हैं, वहां के प्रभारियों से भी जवाब मांगा गया है।
भीलवाड़ा में 70 में से सिर्फ 53 वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशी
भीलवाड़ा नगर निगम में कांग्रेस ने 70 वार्डों के लिए प्रत्याशियों की प्रक्रिया पूरी की थी, लेकिन 17 वार्डों के अधिकृत सिंबल समय पर निर्वाचन अधिकारी के पास जमा नहीं हो सके। इसके चलते कांग्रेस अब केवल 53 वार्डों में अधिकृत पार्टी प्रत्याशी के साथ चुनाव लड़ पा रही है। इस पूरे मामले में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि सिंबल जमा कराने की जिम्मेदारी किस स्तर पर थी और चूक कहां हुई।
टिकट वितरण से बगावत तक, कई मामलों की रिपोर्ट मांगी
निकाय चुनाव में टिकट वितरण के बाद कांग्रेस को कई शहरों और कस्बों में बगावत का सामना करना पड़ा है। पार्टी को ऐसे मामलों की भी जानकारी मिली है जहां प्रत्याशी ने चुनाव मैदान छोड़ दिया, नामांकन वापस ले लिया या नामांकन जांच में निरस्त हो गया। प्रदेश नेतृत्व ने टिकट वितरण, अंतिम समय में उम्मीदवार बदलने, अधिकृत सिंबल जमा नहीं होने और बागी प्रत्याशियों से जुड़े मामलों पर संबंधित निकाय प्रभारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है।
जयपुर, कोटा और सांचौर के मामलों पर भी नजर
जयपुर, कोटा और सांचौर सहित कुछ निकायों में अंतिम समय पर प्रत्याशियों के नाम बदलने को लेकर प्रदेश नेतृत्व तक शिकायतें पहुंची हैं। कुछ स्थानों से टिकट वितरण में कथित अनियमितताओं और लेनदेन संबंधी शिकायतें भी मिलने की बात कही जा रही है। पार्टी ने ऐसे आरोपों को फिलहाल शिकायत के तौर पर लेते हुए संबंधित प्रभारियों से तथ्य और दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट देने को कहा है। आरोपों की सत्यता रिपोर्ट और जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
2-3 दिन में PCC चीफ को देनी होगी लिखित रिपोर्ट
विवादित निकायों के प्रभारियों को अगले दो से तीन दिन के भीतर लिखित रिपोर्ट पीसीसी अध्यक्ष को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट में टिकट चयन की प्रक्रिया, संबंधित नेताओं की भूमिका, सिंबल प्रबंधन, बागी प्रत्याशियों की स्थिति और आखिरी समय पर हुए बदलावों का पूरा ब्यौरा मांगा गया है।
कोटा की कलह राहुल गांधी के कार्यालय तक पहुंची
कोटा में टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान भी चर्चा में रही है। स्थानीय विवाद की शिकायत पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी के कार्यालय तक पहुंचने की बात सामने आई है। अब प्रदेश नेतृत्व का फोकस नाम वापसी और चुनाव प्रचार से पहले अंदरूनी असंतोष को कम करने पर है, ताकि बागियों के कारण अधिकृत प्रत्याशियों के वोटों का नुकसान रोका जा सके।
डैमेज कंट्रोल में जुटी कांग्रेस
कांग्रेस प्रदेश नेतृत्व ने साफ संकेत दिए हैं कि निकाय चुनाव में जहां भी संगठनात्मक स्तर पर गंभीर चूक हुई है, उसकी जवाबदेही तय की जाएगी। फिलहाल पार्टी एक तरफ बागियों को मनाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ भीलवाड़ा जैसे मामलों में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चुनावी प्रक्रिया के अंतिम चरण में इतनी बड़ी प्रशासनिक और संगठनात्मक चूक कैसे हुई।
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