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July 17, 2026
अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कर्मियों का जिला कलेक्ट्रेट पर जोरदार प्रदर्शन,
वेतन बढ़ाने सहित 14 सूत्री मांगों का मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को सोपा ज्ञापन
शुक्रवार को अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ के बैनर तले आंगनबाड़ी कर्मियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय पर जोरदार प्रदर्शन करने के बाद एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।साथ ही संघ ने चेतावनी दी कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
क्या आज के दौर में कोई 10 हजार रुपए में अपना घर चला सकता है? क्या इतने पैसों में बच्चों की पढ़ाई, घर का खर्च और भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है?" यह सवाल किसी राजनीतिक मंच से नहीं, बल्कि शुक्रवार दोपहर अजमेर कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन कर रही आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की भीड़ से उठ रहा था। भीषण गर्मी के बीच संभाग के 6 जिलों से आईं एक हजार से अधिक महिला आंगनवाड़ी कार्यकर्ता आज़ाद पार्क से रैली के रूप में जिला कलेक्ट्रेट पहुंचीं। गुलाबी यूनिफॉर्म में सड़कों पर उतरी महिलाओं के हाथों में छतरियां थीं, लेकिन उनके चेहरों पर सरकार के खिलाफ नाराजगी साफ दिखाई दे रही थी। कलेक्ट्रेट के बाहर सड़क का एक हिस्सा प्रदर्शनकारियों से भर गया, जिससे कुछ देर के लिए यातायात भी प्रभावित हुआ। प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट के सामने से गुजर रही एक एंबुलेंस जाम में फंस गई। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने तत्काल प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली कराया और एंबुलेंस को सुरक्षित रवाना किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने भी सहयोग किया।
सराना की रुक्साना बानो मंसूरी ने कहा कि 30 साल तक सेवा देने के बाद भी उन्हें भविष्य की कोई सुरक्षा नजर नहीं आती। उनका कहना था कि मानदेय की जगह सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए, सरकारी कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए, पेंशन की व्यवस्था हो और रिटायरमेंट के बाद इतनी राशि मिले कि बुढ़ापा सम्मान से गुजर सके। भीलवाड़ा के बनेड़ा से आई पिंकी सेन ने कहा कि सरकार उनसे पोषण ट्रैकर ऐप के जरिए दिन-रात काम करवाती है, लेकिन मोबाइल डेटा तक का खर्च नहीं देती। उन्होंने कहा कि 10 हजार रुपए में परिवार चलाना संभव नहीं है। उनकी मांग है कि न्यूनतम मानदेय 28 हजार रुपए किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा और जरूरत पड़ी तो दिल्ली तक कूच किया जाएगा। अजमेर के भिनाय की लीला देवी बातचीत के दौरान भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग के काम के अलावा कई अन्य विभागों के काम भी उनसे करवाए जाते हैं। ऑनलाइन डेटा देने के बावजूद अधिकारियों की ओर से नोटिस देने की धमकी मिलती रहती है। उन्होंने सवाल उठाया कि दिन-रात मेहनत करने के बाद भी उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाता है।
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