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June 24, 2026
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में वार्ड बॉय लेडी सफाई कर्मचारी सहायक कर्मचारी उतरे हड़ताल पर,
ठेकेदार फर्म पर समय पर वेतन नहीं देने का लगाया आरोप, वेतन मिलने पर ही करेंगे काम
अजमेर संभाग के सबसे बड़े जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में एक बार फिर व्यवस्थाएं प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। अस्पताल में कार्यरत वार्ड बॉय, वार्ड लेडी और सफाई कर्मचारी बुधवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर उतर आए। इमरजेंसी के बाहर बड़ी संख्या में एकत्रित कर्मचारियों ने ठेका एजेंसियों और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। साथ ही पीएफ और अन्य श्रमिक सुविधाओं में भी अनियमितताएं बरती जा रही हैं।कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द भुगतान नहीं हुआ तो अस्पताल में संपूर्ण कार्य बहिष्कार किया जाएगा, जिससे मरीजों की परेशानियां बढ़ सकती हैं।
अस्पताल में सफाई व्यवस्था का जिम्मा जीडी अजमेर गुजरात एजेंसी के पास है, जबकि वार्ड बॉय, वार्ड लेडी और सुरक्षा गार्ड पन्नाधाय एजेंसी के माध्यम से कार्यरत हैं। कर्मचारियों का कहना है कि दोनों एजेंसियों के तहत कार्यरत कार्मिक लंबे समय से वेतन का इंतजार कर रहे हैं। सुरक्षा गार्डों ने भी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है और पीएफ जमा होने को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। ड्यूटी की मजबूरी के कारण वे खुलकर प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सके, लेकिन आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।
वार्ड बॉय लोकेश ओर चंद्र प्रकाश ने बताया कि उनकी तीन महीने की सैलरी बकाया है। उन्होंने कहा कि वेतन मात्र 6 हजार रुपए है और वह भी समय पर नहीं मिलता। स्कूल खुलने वाले हैं, बच्चों की फीस, किताबें और ड्रेस खरीदने की चिंता सताने लगी है। कई महीनों से अधिकारियों के चक्कर लगाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिल रहे हैं। वार्ड लेडी शबनम ने कहा कि वेतन नहीं मिलने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है। किराया, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्चों के लिए उधार लेना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएफ और अन्य श्रमिक लाभों को लेकर भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है।
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि यदि बकाया वेतन का जल्द भुगतान नहीं हुआ और पीएफ सहित अन्य समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर अस्पताल की सेवाएं पूरी तरह ठप करने का निर्णय भी लिया जा सकता है। ऐसे में हड़ताल लंबी खिंचने पर संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
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