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May 31, 2026
अधिक मास पूर्णिमा पर पुष्कर में उमड़ा आस्था का सैलाब, व्यवस्थाओं की खुली पोल
तीर्थराज पुष्कर में आज अधिक मास की पूर्णिमा स्नान को लेकर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। करीब एक लाख से अधिक श्रद्धालु पुष्कर सरोवर के घाटों पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। स्नान, दान-पुण्य, पूजा-अर्चना और मंदिरों में दर्शन का दौर दिनभर जारी है। पूर्णिमा के पावन अवसर पर ब्रह्मा मंदिर सहित प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
अधिक मास यानी पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा होने के कारण इस स्नान का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। तीर्थ पुरोहित सतीश चंद्र तिवाड़ी ने बताया कि पुरुषोत्तम मास तीन वर्ष में एक बार आता है। इस माह में स्नान, दान, पूजा-पाठ, भजन और पितरों के निमित्त तर्पण करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। उन्होंने बताया कि श्रद्धालु अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र और जरूरतमंदों को दान कर पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। पुष्कर के 52 घाटों पर स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है।हालांकि श्रद्धालुओं की भारी आवक के बीच प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी साफ नजर आई। घाटों पर जगह-जगह गंदगी के ढेर, आवारा पशुओं की मौजूदगी और सुरक्षा कर्मियों की कमी ने श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ा दी। स्थानीय लोगों का कहना है कि विशेष स्नान पर्वों पर घाटों पर सुरक्षा और सफाई की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार कई घाटों पर अव्यवस्था का आलम देखने को मिला। वहीं पुष्कर सरोवर में जल आपूर्ति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मंत्री सुरेश रावत की जनसुनवाई में तीर्थ पुरोहित संघ द्वारा ज्ञापन देने के बाद बीसलपुर और ट्यूबवेल का पानी सरोवर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन पूर्णिमा के दिन सरोवर तक पानी पहुंचाने वाले पाइप बंद नजर आए। इससे श्रद्धालुओं और तीर्थ पुरोहितों में नाराजगी दिखी। मोतीसर से पुष्कर आने वाले मार्ग पर जलभराव के कारण यात्रियों को लंबा रास्ता तय करना पड़ा। कस्बे के अंदरूनी और बाहरी मार्गों पर भी भारी जाम लगा रहा। ट्रैफिक पुलिस की गैर मौजूदगी में टेंपो और ठेलों के कारण मुख्य मार्गों पर यातायात बाधित रहा। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने पूर्व तैयारी नहीं की, जिसके चलते श्रद्धालुओं को परेशानी उठानी पड़ी।
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