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May 20, 2026
राजस्थान में अगले महीने राज्यसभा की तीन सीटें खाली होने जा रही हैं। मौजूदा विधानसभा संख्या बल के अनुसार तीन में से दो सीटों पर भारतीय जनता पार्टी और एक सीट पर कांग्रेस की जीत लगभग तय मानी जा रही है। ऐसे में भाजपा केवल दो उम्मीदवार मैदान में उतारने की तैयारी कर रही है और इसे लेकर पार्टी के भीतर मंथन तेज हो गया है।
इस संबंध में 16 मई को प्रदेश कोर कमेटी की बैठक आयोजित हुई, जिसमें संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई। बैठक के बाद कोर कमेटी ने प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को अंतिम पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजने के लिए अधिकृत कर दिया।
राजनीतिक और जातीय समीकरणों को देखते हुए भाजपा इस बार एक सीट पर मूल ओबीसी वर्ग से किसी नेता को राज्यसभा भेज सकती है। वहीं दूसरी सीट पर केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू को दोबारा मौका दिए जाने की चर्चा भी बनी हुई है। हालांकि अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व ही करेगा।
प्रदेश कोर कमेटी की बैठक में जिन नेताओं के नामों पर प्रमुखता से चर्चा हुई, उनमें पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया, पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और भाजपा की राष्ट्रीय सचिव अलका गुर्जर शामिल हैं।
सतीश पूनिया और राजेंद्र राठौड़ विधानसभा चुनाव हारने के बाद से लगातार राज्यसभा के संभावित दावेदार माने जा रहे हैं। दोनों नेताओं को लोकसभा चुनाव में टिकट नहीं मिला था। बाद में हुए विधानसभा उपचुनावों में भी उनके नाम चर्चा में रहे, लेकिन उन्हें मौका नहीं मिला।
फिलहाल सतीश पूनिया को भाजपा ने हरियाणा का प्रदेश प्रभारी बनाकर संगठनात्मक जिम्मेदारी दी हुई है। वहीं राजेंद्र राठौड़ के पास वर्तमान में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं है। ऐसे में पार्टी उनके नाम पर गंभीरता से विचार कर सकती है।
अलका गुर्जर का नाम भी मजबूत दावेदारों में माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह भी चर्चा है कि वर्तमान में भाजपा की ओर से राज्यसभा में कोई महिला सांसद नहीं है। ऐसे में पार्टी महिला प्रतिनिधित्व और जातीय संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए अलका गुर्जर को मौका दे सकती है।
भाजपा के भीतर इस बार आदिवासी क्षेत्र से किसी सामान्य वर्ग के नेता को राज्यसभा भेजने पर भी चर्चा चल रही है। उदयपुर क्षेत्र में पंचायत से लेकर संसद तक अधिकांश सीटें आरक्षित वर्ग के पास होने के कारण लंबे समय से सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं हो पाया है।
पार्टी इससे पहले वर्ष 2016 में डूंगरपुर के पूर्व राजपरिवार से जुड़े हर्षवर्धन सिंह को राज्यसभा भेज चुकी है। इसी तर्ज पर इस बार उदयपुर से प्रमोद सामर के नाम पर भी चर्चा हो रही है। प्रमोद सामर भाजपा संगठन में प्रदेश मंत्री और युवा मोर्चा में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। वर्तमान में वे सहकारिता प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक हैं।हालांकि राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि उनके नाम पर अंतिम सहमति के लिए वरिष्ठ नेता गुलाबचंद कटारिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी।
मूल ओबीसी वर्ग से भाजपा प्रभुलाल सैनी के नाम पर भी विचार कर सकती है। प्रभुलाल सैनी संगठन और सरकार दोनों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। वे वसुंधरा राजे सरकार में मंत्री रहे हैं और संगठन में प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं।
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