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April 19, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद देश और खासकर राजस्थान की राजनीति में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। शनिवार रात दिए गए संबोधन में प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगाते हुए देश की महिलाओं से माफी मांगी थी, जिसके बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। इसी कड़ी में राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया और उन्हें खुली चुनौती दे डाली।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री को अपने दावे पर भरोसा है कि देश की महिलाएं विपक्ष को सबक सिखाएंगी, तो उन्हें तत्काल लोकसभा भंग कर नए चुनाव करवाने चाहिए। गहलोत ने कहा कि देश की नारी शक्ति खुद तय कर लेगी कि वह किसके साथ है। उन्होंने केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन कर ओबीसी महिलाओं के अधिकारों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने यह भी कहा कि 2026 में प्रस्तावित जातिगत जनगणना के बाद ही ओबीसी की वास्तविक संख्या सामने आएगी, इसलिए उसके बाद ही किसी प्रकार का आरक्षण या परिसीमन उचित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ऐसा विधेयक पेश किया जिसमें ओबीसी महिलाओं के लिए अलग कोटे का प्रावधान नहीं रखा गया, जो उनके साथ अन्याय है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री का संबोधन चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग अब भाजपा का “चुनाव विभाग” बनकर रह गया है, इसलिए किसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ‘नारी शक्ति वंदन’ को लेकर देश की महिलाओं से माफी मांगते हुए कहा कि यह विधेयक महिलाओं के अधिकार सुनिश्चित करने के लिए लाया गया था और इसका लाभ भविष्य में मिलना तय था। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिल रही है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राजस्थान में महिला वोट बैंक हमेशा निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले समय में और अधिक राजनीतिक गर्मी पैदा कर सकता है, जहां एक ओर भाजपा इसे विपक्ष की बाधा के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे ओबीसी और महिला अधिकारों से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की रणनीति पर काम कर रही है।
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