Post Views 11
April 19, 2026
पुष्कर में अक्षय तृतीया के अबूझ सावे पर राजपूत समाज के जयमल कोट में रविवार को सामाजिक समरसता और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला। पुष्कर में आयोजित क्षत्रिय (राजपूत) सामूहिक विवाह सम्मेलन में 11 जोड़े एक ही मंडप में परिणय सूत्र में बंधे। शहनाइयों की गूंज, मंगल गीत और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूरा वातावरण उत्सवमय बना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत गायत्री शक्तिपीठ से निकली दूल्हों की बिंदोरी से हुई, जिसमें सभी 11 दूल्हे बैंड-बाजों के साथ एक साथ रवाना हुए। जयमल कोट पहुंचने पर समाजबंधुओं ने पुष्पवर्षा कर बारात का स्वागत किया। मुख्य द्वार पर सभी दूल्हों ने एक साथ तोरण की रस्म निभाई और शुभ मुहूर्त में पंडितों के सान्निध्य में वैदिक रीति-रिवाज से पाणिग्रहण संस्कार संपन्न हुआ। दोपहर बाद आशीर्वाद विदाई समारोह के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
समिति अध्यक्ष महेंद्र सिंह कडेल ने इसे केवल विवाह नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का अभियान बताया। उन्होंने कहा कि सामूहिक विवाह फिजूलखर्ची और दहेज जैसी कुरीतियों पर सीधा प्रहार है और इससे गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों को बड़ी राहत मिलती है। पिछले 19 वर्षों से बिना किसी भेदभाव के इस परंपरा को निभाते हुए समाज एकजुटता का संदेश दे रहा है।
मुख्य अतिथि भंवर सिंह पलाड़ा ने अपने संबोधन में कहा कि सामूहिक विवाह समय की जरूरत है, जो आर्थिक बोझ कम करने के साथ सामाजिक एकता को मजबूत करता है। उन्होंने मंच से आह्वान करते हुए कहा कि बहू को बेटी का दर्जा दिया जाए, क्योंकि जिस घर में बहू को सम्मान मिलता है, वही परिवार खुशहाल बनता है। उन्होंने बदलते सामाजिक समीकरणों पर चिंता जताते हुए समाज में संतुलन और एकजुटता बनाए रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान नवविवाहित जोड़ों को गृहस्थी के लिए आवश्यक सामान उपहार स्वरूप प्रदान किया गया, जिसमें बर्तन, पलंग, बिस्तर और अन्य जरूरी वस्तुएं शामिल थीं। साथ ही सभी वर-वधु और उनके परिजनों को बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का संकल्प भी दिलाया गया।
इस अवसर पर समाज के कई गणमान्य लोग, महिला मंडल और युवा कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और पूरे आयोजन को सफल बनाने में अपनी भागीदारी निभाई।
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved