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April 19, 2026
अक्षय तृतीया पर आस्था का सैलाब: 500 साल पुरानी परंपराओं से गूंजा पुष्कर,बद्रीनाथ से जुड़ा पुष्कर: अक्षय तृतीया पर दिखी अद्भुत श्रद्धा
पुष्कर में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर सदियों पुरानी परंपराओं ने एक बार फिर जीवंत रूप ले लिया। छोटी बस्ती और बड़ी बस्ती स्थित प्राचीन मंदिरों में करीब 500 वर्षों से चली आ रही परंपराओं के तहत विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। मान्यता के अनुसार बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के साथ ही यहां भी पूजा शुरू होती है, जिससे पुष्कर और बद्रीनाथ के बीच आध्यात्मिक संबंध और गहरा हो जाता है। सुबह पंचामृत अभिषेक, मंगला आरती और दिनभर तीन प्रहर की विशेष आरतियों में अलग-अलग प्रसाद वितरण किया गया। भोर से ही मंदिरों में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दोपहर में ककड़ी और चने की दाल, जबकि शाम को मीठे चावल और दूध की नुकती का प्रसाद बांटा गया। धार्मिक मान्यता है कि पुष्कर और बद्रीनाथ अष्ट भू वैकुंठ में शामिल हैं, इसलिए अक्षय तृतीया का महत्व यहां और बढ़ जाता है। इसी दिन से चारधाम यात्रा की शुरुआत मानी जाती है, जिससे इस पर्व की धार्मिक गरिमा और भी बढ़ जाती है।
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