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April 4, 2026
अजमेर पुलिस पर बिना वारंट छापेमारी का आरोप: बेटे-बहू को पीटकर हिरासत में लिया, नहाती बेटी को जबरन बाहर खींचा ।
अजमेर जिले में पुलिस पर एक बार फिर गंभीर आरोप लगे हैं। बिना किसी वारंट के घर में घुसकर मारपीट करने, नहाती लड़की के साथ दुर्व्यवहार करने और बेटे-बहू को अवैध हिरासत में रखने का मामला सामने आया है। स्वर्गीय मोहम्मदीन की पत्नी फ़िरोज़ा अंसारी ने आज पुलिस अधीक्षक, अजमेर को विस्तृत शिकायत पत्र सौंपा है। उन्होंने मांग की है कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तुरंत उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
शिकायतकर्ता फ़िरोज़ा अंसारी ने बताया कि घटना 3 अप्रैल 2026 को दोपहर करीब 3 बजे हुई। वे अपने बच्चों और बहू के साथ दिल्ली गेट, काफ़िया पैलेस, गली नंबर-2, अजमेर स्थित अपने किराए के मकान में थीं। अचानक दरवाजे पर जोरदार दस्तक हुई। दरवाजा खोलते ही 7-8 लोग घर में घुस आए। इनमें एक महिला थी, एक व्यक्ति पुलिस वर्दी में था जबकि बाकी सादे कपड़ों में थे।
घर में घुसते ही उन्होंने फ़िरोज़ा के बेटे इमरान का नाम पूछा। जैसे ही इमरान सामने आया, पुलिसवालों ने उसे धर दबोचा और पूछताछ शुरू कर दी। पूछताछ के दौरान वे इमरान को बेरहमी से पीटने लगे। परिवारवालों ने जब रोका तो पुलिस ने उनके साथ भी मारपीट की। फ़िरोज़ा अंसारी को तो धक्का देकर जमीन पर गिरा दिया गया।
शिकायत में आगे लिखा है कि पुलिसकर्मियों ने इमरान को एक कमरे में बंद कर उसकी बुरी तरह पिटाई की। साथ आई महिला ने जबरन बाथरूम का दरवाजा खोल दिया। उस समय फ़िरोज़ा की बेटी फिजा नहा रही थी। महिला ने नहाते हुए फिजा को जबरन बाहर खींच लिया और उसके साथ भी दुर्व्यवहार किया।
इमरान को पुलिस अपने साथ ले गई। पूछने पर वर्दीधारी पुलिसकर्मी ने अपना नाम लक्ष्मण बताया और कहा कि बाकी जयपुर से आए हैं। जब परिवार ने कारण पूछा तो पुलिस ने कहा, “स्टेशन आकर बात करो।” पुलिस ने पूरे परिवार के मोबाइल फोन भी छीन लिए।
इमरान की पत्नी और दूसरे बेटे मोहसिन जब इमरान की जानकारी लेने सिविल लाइंस थाने गए तो वहां पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। बाद में पता चला कि इमरान को सिविल लाइंस थाने ले जाया गया है।
फ़िरोज़ा अंसारी ने अपनी शिकायत में लिखा, “पुलिस किसी लापता व्यक्ति की तलाश में आई थी, लेकिन मेरे बेटों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। फिर भी बिना किसी सबूत या वारंट के घर में घुसकर मारपीट की गई, नहाती बेटी का अपमान किया गया और बेटे-बहू को अवैध हिरासत में रखा गया है।”
उन्होंने आगे कहा, “हम गरीब परिवार हैं। मेरे पति का इंतकाल हो चुका है। मैं अकेली अपने बच्चों के साथ रह रही हूं। पुलिस की इस कार्रवाई से पूरा परिवार सदमे में है।”
शिकायत पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि यह पूरी घटना बिना किसी वारंट या कानूनी प्रक्रिया के हुई है, जो संविधान के अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार) का सीधा उल्लंघन है।
फ़िरोज़ा अंसारी ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि तुरंत मामला दर्ज कर आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए, उनके बेटों को रिहा किया जाए और छीने गए मोबाइल फोन वापस कराए जाएं।
राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद सना खान अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष ने मीडिया में बताया कि यह मामला अजमेर पुलिस की छवि पर सवाल खड़ा कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में अजमेर में पुलिस पर अवैध हिरासत, मारपीट और बिना वारंट छापेमारी के कई मामले सामने आ चुके हैं। स्थानीय स्तर पर इस घटना ने काफी आक्रोश पैदा कर दिया है।
सिविल लाइंस थाने के प्रभारी अधिकारी से जब इस मामले में प्रतिक्रिया मांगी गई तो उन्होंने कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। उन्होंने केवल इतना कहा कि “मामला जांच के अधीन है।”
परिवार के सदस्यों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें लापता व्यक्ति से जोड़ने की कोशिश की, जबकि परिवार का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है।
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