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February 4, 2026
उदयपुर संसदीय क्षेत्र के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा संसद में गूंजा। उदयपुर से सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने संसद में नियम 377 के तहत इस गंभीर समस्या को जोरदार तरीके से उठाते हुए कहा कि लंबे समय से रिक्त पदों के कारण छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है।
सांसद रावत ने बताया कि हाल ही में उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र स्थित राजकीय बालिका महाविद्यालय, खेरवाड़ा का दौरा किया था, जहां आदिवासी छात्राओं ने उन्हें शिक्षकों की कमी की जानकारी दी। छात्राओं ने बताया कि पर्याप्त शिक्षक नहीं होने से न केवल पढ़ाई बाधित हो रही है, बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं और भविष्य की तैयारी पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है। डॉ. रावत ने कहा कि यह स्थिति केवल खेरवाड़ा तक सीमित नहीं है, बल्कि लगभग सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। देश के करोड़ों युवा, जिन्हें ‘अमृत पीढ़ी’ कहा जा रहा है, उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उनके कौशल विकास, शैक्षणिक समझ और व्यक्तित्व निर्माण में अनुभवी और स्थायी शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि शिक्षकों की कमी से न सिर्फ पढ़ाई प्रभावित हो रही है, बल्कि युवाओं के रोजगार के अवसर भी सीमित होते जा रहे हैं।
सांसद मन्नालाल रावत ने सरकार से मांग की कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के माध्यम से सभी राज्यों के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए। साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार से विशेष सहायता प्रदान करने का आग्रह किया, ताकि युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर मिल सकें।
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