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January 15, 2026
पशु-चिकित्सकों की पशु-चिकित्सा के फोरेंसिक पहलुओं पर संभाग स्तरीय कार्यशाला,
अतिरिक्त निदेशक, पशु पालन विभाग द्वारा अजमेर संभाग के पशु-चिकित्सकों की भारत सरकार की एस्केड योजनान्तर्गत फोरेंसिक एस्पेक्ट्स ऑफ वेट्रोलीगल केसेज विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला रीट कार्यालय, माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर में आयोजित की गई।पशु चिकित्सा संबंधी कानूनी मामलों के फोरेंसिक पहलूओं पर आयोजित इस संभाग स्तरीय कार्यशाला में अजमेर संभाग के टोंक, भीलवाड़ा, नागौर, कुचामन डीडवाना, ब्यावर और अजमेर जिले के 50 पशु-चिकित्सक शामिल हुए।अतिरिक्त निदेशक (क्षेत्र) पशु पालन विभाग अजमेर डॉ आलोक कुमार खरे ने अवगत करवाया कि इस कार्यशाला में 1. विष विज्ञान संबंधी मामलों, यौन उत्पीड़न (पशुगमन) मामलों, डीएनए फोरेंसिक के लिए प्रजातियों की पहचान से संबंधित मामलों (वंश विवाद, असली और नकली पशु अंग), पशुओं से संबंधित अपराधों (वन्यजीव संरक्षण अधिनियम आदि) के लिए सही नमूने और सही नमूनों का संग्रह। 2. फोरेंसिक प्रयोगशालाओं में नमूने भेजने के लिए क्या करें और क्या न करें। 3. फोरेंसिक प्रयोगशाला में नमूनों की अस्वीकृति के सामान्य कारण। 4. डूबने और बिजली के झटके से मृत्यु के कारण आदि विषयों पर जानकारी दी गई। क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला अजमेर के अतिरिक्त निदेशक राजवीर, उपनिदेशक डॉ विजेन्द्र सिंह शेखावत, सहायक निदेशक डॉ राकेश रोशन शर्मा एवं श्रीमती सुमन बुडानिया द्वारा व्याख्यान एवं प्रयोगात्मक तकनीकी जानकारी दी गई।डॉ आलोक खरे ने बताया कि पशुपालन विभाग जयपुर निदेशालय से उपनिदेशक (प्रयोगशाला) डॉ संगीता भार्गव एवं पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डाॅ महेश पाण्डला, उपनिदेशक डाॅ मुदित नारायण माथुर और वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ रचना जैन ने भी इस कार्यशाला में भाग लिया।
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