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अजमेर न्यूज़: आस्था, उत्सव और उल्लास का संगम: मकर संक्रांति पर पुष्कर सरोवर में उमड़ा जनसैलाब, पुण्य की डुबकी से रंगीन आसमान तक: मकर संक्रांति पर पुष्कर में श्रद्धा और पतंगों का पर्व

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January 14, 2026

मकर संक्रांति पर तीर्थों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पूर्वजों के पिंडदान व तर्पण से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

आस्था, उत्सव और उल्लास का संगम: मकर संक्रांति पर पुष्कर सरोवर में उमड़ा जनसैलाब, पुण्य की डुबकी से रंगीन आसमान तक: मकर संक्रांति पर पुष्कर में श्रद्धा और पतंगों का पर्व

मकर संक्रांति के पावन पर्व पर मंगलवार को तीर्थराज पुष्कर में श्रद्धा, आस्था और उत्सव का अद्भुत संगम देखने को मिला। मकर संक्रांति के पुण्यकाल में हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्कर सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई और दान-पुण्य कर पुण्य लाभ अर्जित किया। सुबह से ही सरोवर के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन किया, वहीं बाजारों व मोहल्लों में जगह-जगह पौष बड़ा का प्रसाद वितरित किया गया।

 ज्योतिषाचार्य पं. कमल नयन दाधीच ने बताया कि मकर संक्रांति का यह पुण्यकाल अत्यंत फलदायी माना जाता है। इस दौरान तीर्थ स्नान, दान-पुण्य, भजन-कीर्तन और धर्म-कर्म करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। पंडित दिलीप शास्त्री ने बताया कि जब सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है, तब मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर तिल, गुड़, तेल का दान करने तथा गायों को चारा खिलाने का विशेष महत्व है। वहीं पंडित हरिगोपाल चूंडावत ने बताया कि मकर संक्रांति पर तीर्थों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पूर्वजों के पिंडदान व तर्पण से उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है।

पर्व के अवसर पर शाम को बद्री घाट पर महाआरती का आयोजन किया गया। माघ मास के कृष्ण पक्ष की षटतिला एकादशी के उपलक्ष्य में आयोजित इस महाआरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। प्रवक्ता इन्द्रसिंह पंवार ने बताया कि श्री ब्रह्म शक्ति महाआरती संघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में तीर्थ पुरोहित पं. शशांक पाराशर ने महाआरती संपन्न कराई। इससे पूर्व सरोवर का दुग्धाभिषेक किया गया और भजन गायक पं. रामपाल काला ने भक्तिमय भजनों की प्रस्तुति दी।

मकर संक्रांति पर पुष्कर में पतंगबाजी का भी खास उत्साह देखने को मिला। सुबह से शाम तक आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भरा रहा और “वो काटा-वो मारा” की आवाजें गूंजती रहीं। स्थानीय लोगों के साथ-साथ विदेशी सैलानियों ने भी पतंगबाजी का जमकर आनंद लिया। शाम होते-होते आतिशबाजी ने उत्सव को और रंगीन बना दिया। पतंगबाजी के दौरान दाल के पकौड़े, गुड़ के गुलगुले और तिलपट्टी का स्वाद भी लोगों ने लिया।

वहीं धारदार मांझे से घायल हुए पक्षियों और पशुओं का एनिमल केयर सोसायटी के रेस्क्यू सेंटर पर उपचार किया गया। सोसायटी के हेमंत रायता ने लोगों से अपील की कि यदि कोई जख्मी पक्षी दिखाई दे तो उसे तुरंत रेस्क्यू सेंटर तक पहुंचाएं। उधर, वराह मंदिर स्थित धर्मराज जी के मंदिर में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर तिल और राई का दान किया। पुजारी आशीष पाराशर ने बताया कि मकर संक्रांति पर धर्मराज जी की पूजा से पापों से मुक्ति मिलती है।


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