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January 13, 2026
जीवन दायिनी अरावली पर्वत श्रृंखला के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी बर्दाश्त, विभिन्न स्कूली संस्थाओं महाविद्यालय व स्वयंसेवी संगठनों के द्वारा महामहिम राष्ट्रपति के नाम सोपा ज्ञापन, रैली निकालकर किया प्रदर्शन
ऐतिहासिक अजमेर को हर प्रकार से सुरक्षित रखने वाली अरावली पर्वत श्रृंखला को जहां सरकारें आर्थिक लाभ के लिए नेस्तनाबूद करने पर उतारू हैं तो वहीं अरावली को बचाने के लिए अजमेर के स्टूडेंट्स, फैकल्टी,ओर स्वयं सेवी संस्थाओं ने बीड़ा उठाया हुआ है।
मंगलवार सुबह अजमेर के 12 से ज्यादा स्कूल्स और कॉलेज के सैकड़ों स्टूडेंट्स के साथ विभिन्न स्वयं सेवी संगठनों द्वारा अरावली बचाओ अभियान के तहत रैली निकाली गई। आजाद पार्क से शुरू हुई रैली में शामिल स्टूडेंट्स और फैकल्टी हाथों में अरावली की रक्षा से संबंधित स्लोगन लिखी तख्तियां लेकर स्थानीय मार्गो से होते हुए जिला कलेक्ट्रेट पर पहुंचे। जहां सभी ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर अरावली बचाओ के नारे लगाए। प्रोटेस्ट के बाद सभी ने संयुक्त रूप से एक ज्ञापन जिला कलेक्टर के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम प्रेषित किया। ज्ञापन के जरिए अरावली पर्वतमाला के संरक्षण और सर्वोच्च न्यायालय द्वारा की गई अनुचित परिभाषा को निरस्त करने की मांग की गई।
इस मौके पर पार्षद नरेंद्र तुनवाल निक्की, फैकल्टी श्वेता ब्रह्मवार और स्टूडेंट् प्राची शर्मा ने बताया कि करीब 12 से ज्यादा स्कूल, कॉलेज और सभी पर्यावरण प्रेमियों के साथ आज यह रैली निकाली गई है। अरावली की गोद में पूरा राजस्थान सुरक्षित है। अगर इसके साथ कोई छेड़छाड़ हुई तो बहुत सारा विनाश हो सकता है। जब जब प्रकृति के साथ छेड़छाड़ हुई तब तब विपदाएं आई है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने से कई बीमारियां झेलनी पड़ी है। इसे लेकर आज राष्ट्रपति के नाम ज् जिला कलेक्टर लोकबंधु को ज्ञापन देकर बताया है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 20 नवंबर 2025 को दिए गए इस निर्णय की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। जिसमें अरावली को परिभाषित करते हुए उसकी ऊंचाई को 100 मीटर से ऊपर तथा 500 मीटर विस्तार के दायरे में बांधने की बात कही गई है। हालांकि वर्तमान में इस निर्णय पर फिलहाल रोक लगा दी गई है, लेकिन अरावली को सीमित करने का यह प्रयास अत्यंत चिंताजनक है। यदि इस परिभाषा को स्वीकार कर लिया जाता है, तो 90% अरावली क्षेत्र में खनन को प्रशासनिक स्वीकृति मिल जाएगी। अरावली की कुल 1281 पहाड़ियों में से मात्र 1048 ही इस परिभाषा के अनुसार पहाड़ी मानी जा सकती है। अरावली पर्वतमाला लाखों वर्षों से इस धरती पर विद्यमान है
और यह अजमेर राजस्थान ही नहीं भारत के कई राज्यों की सुरक्षा को समेटे हुए हैं। इस पर अवैध या लीज पर दिए जाने से हो रहे खनन की वजह से वन्य जीवों और इंसानों की जिंदगी के साथ बड़ा खतरनाक खिलवाड़ होगा जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। इसलिए किसी भी हालत में आवाम जीवनदायनी अरावली के साथ कोई छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।
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