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January 13, 2026
कृषि विभाग ने जारी की कीटों के रोकथाम के लिए एडवाइजरी, सरसों की फसल में माहू एवं चेपा (एफिड)से बचाव के लिए करें उपाय
अजमेर, 13 जनवरी। मौसम की अनुकूलता के साथ क्षेत्र में कीट रोगों का प्रकोप बढ़ने की संभावना के मध्य नजर कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक श्री संजय तनेजा ने अधिकारियों को फसलों पर निगरानी रखने और उप जिला अजमेर और केकड़ी को ग्राउंड लेवल पर फील्ड सर्वेक्षण कराने के निर्देश दिए।
कृषि अधिकारी श्री पुष्पेंद्र सिंह ने किसानों को माहू (चेपा) से बचाव के उपाय करने के लिए कहा। इसके रोकथाम और नियंत्रण के सुझाव दिए। वर्तमान मौसम परिस्थिति में सरसों की फसल में माहू (एफिड) कीट होने की संभावना अधिक बढ़ जाती है। इसका यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाए तो इस रोग की रोकथाम का कार्य काफी दुष्कर एवं खर्चीला या असंभव हो जाता है। इससे फसल के उत्पाद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है तथा किसानों को कृषि उत्पाद का बाजार भाव भी कम मिलता है।
कीट की पहचान- यह कीट छोटे से माध्यम गोल आकार का होता है और पीले हरे या जैतून रंग का होता है और इसमें कर्निकल्स (माँ स्त्रावित करने वाली नालियाँ) की एक जोड़ी होती है। शरीर हल्के सफेद पाउडर से ढ़का होता है। इसकी लम्बाई लगभग 1.4 से 2.4 मिलीमीटर होती है।
कीट के लक्षण- अधिक प्रकोप के कारण पतियों का मुड़ना, पीला पड़ना एवं सुखना जैसे लक्षण दिखाई देते है। ये चीनी युक्त चिपचिपा तरल (हनीड्यू) पदार्थ स्त्रावित करता है जो कालिख सांचे के विकास के लिए जिम्मेदार होता है जो पोधे में प्रकाश संश्लेषण दर को कम करता है।
किसान सरसों की फसल में माहू एवं चेपा अथवा एफिड की रोकथाम के लिए उपाय अपना कर संभावित नुकसान से फसल को बचा सकते है। क्रिसोपरला का 50000 प्रति हेक्टर के हिसाब से 10 दिवस के अन्तराल पर दो बार भुरकाव करावे। मित्र फफूंद वर्टिसीलीयम लेकानी 5 मिलीलीटर का प्रति लीटर पानी के साथ मिलकर छिडकाव करावे। कीट का प्रकोप होने पर नीम आधारित कीटनाशक एजाडीरेक्टिन 0.03 ईसी का 2 लीटर प्रति हैक्टर छिडकाव करावे। कीट का प्रकोप आर्थिक क्षति स्तर से अधिक होने पर विभागीय सिफारिश अनुसार किट नाशी रसायनो का सुबह या शाम के समय कॉन्टेक्ट एवं सिस्टमिक श्रेणी के रासायनिक कीटनाशी का प्रयोग कृषि विभाग की पैकेज ऑफप्रैक्टिस के अनुसार कृषि पर्यवेक्षक एवं सहायक कृषि अधिकारियों द्वारा तकनीकी सिफारिशानुसार करे।
अधिक जानकारी के लिए किसान स्थानीय कृषि पर्येवेक्षक या सहायक कृषि अधिकारी या नजदीकी कृषि कार्यालय से संपर्क कर परामर्श उपरांत प्रभावी उपाय अपनाकर कीट-व्याधियों की रोकथाम सम्बंधित कार्य करावे।
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