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अजमेर न्यूज़: विश्व के एकमात्र ब्रह्मा मंदिर में आठ साल से खाली महंत की गद्दी, परंपरा बनाम व्यवस्था का सवाल

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January 11, 2026

संत समाज का मानना है कि किसी भी बड़े तीर्थ में महंत की अनुपस्थिति को शुभ नहीं माना जाता। महंत ही मंदिर की आध्यात्मिक धुरी, परंपराओं के संरक्षक और भक्तों की आस्था के प्रतीक होते हैं।

विश्व के एकमात्र ब्रह्मा मंदिर में आठ साल से खाली महंत की गद्दी, परंपरा बनाम व्यवस्था का सवाल

जगतपिता ब्रह्मा के विश्वविख्यात मंदिर पुष्कर में बीते आठ वर्षों से महंत की गद्दी रिक्त पड़ी है। लगभग 1360 वर्षों के लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है, जब मंदिर का संचालन बिना महंत के किया जा रहा है। फिलहाल मंदिर की समस्त धार्मिक और प्रशासनिक व्यवस्थाएं जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित अस्थाई सरकारी प्रबंधन समिति के जिम्मे हैं, लेकिन इस स्थिति को लेकर संत समाज और श्रद्धालुओं में असंतोष गहराता जा रहा है।

दरअसल ब्रह्मा मंदिर के 32वें महंत सोमपुरी महाराज का 11 जनवरी 2017 को दूदू क्षेत्र के पास एक सड़क दुर्घटना में आकस्मिक निधन हो गया था। इस हादसे में उनके साथ महिला हैडकॉन्स्टेबल विजयलक्ष्मी और वाहन चालक की भी मृत्यु हो गई थी। सोमपुरी महाराज के निधन के बाद महंत पद के उत्तराधिकारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी, क्योंकि उन्होंने अपने जीवनकाल में किसी शिष्य या उत्तराधिकारी की घोषणा नहीं की थी। इसके बाद से महंत की गद्दी को लेकर विवाद शुरू हो गया।

महंत पद के लिए महानिर्वाणी अखाड़े से जुड़े संतों, पुजारी परिवारों और संत समाज के कई लोगों ने दावेदारी पेश की। मामला धीरे-धीरे सहायक देवस्थान न्यायालय तक पहुंच गया। वर्तमान में न्यायालय में आठ से अधिक दावेदारों से जुड़े प्रकरण लंबित हैं। कानूनी प्रक्रिया के चलते वर्षों बीत जाने के बावजूद महंत की नियुक्ति पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।

महंत के अभाव में राज्य सरकार ने मंदिर की व्यवस्था संभालने के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय अस्थाई प्रबंधन समिति गठित की। समिति के माध्यम से पूजा-पाठ, दैनिक व्यवस्थाएं और दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे का संचालन किया जा रहा है। हालांकि संत समाज का कहना है कि सरकारी व्यवस्था प्रशासनिक रूप से भले ही सुचारु हो, लेकिन उसमें वह आध्यात्मिक संवेदना और परंपरागत गुरु-शिष्य प्रणाली नहीं है, जो सदियों से महंत परंपरा के साथ जुड़ी रही है।

इस पूरे मामले पर कपालेश्वर महादेव मंदिर के महंत एवं अखिल भारतीय संत समिति के राष्ट्रीय मंत्री महंत सेवानंद गिरी ने कहा कि जगतपिता ब्रह्मा का यह मंदिर संपूर्ण सनातन समाज की आस्था का केंद्र है। उन्होंने दिवंगत महंत सोमपुरी महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि साढ़े चौदह सौ वर्षों से इस गद्दी पर संत-महंत विराजमान होते आए हैं। इतने लंबे समय तक गद्दी का खाली रहना सनातन परंपरा के लिए उचित नहीं है। उन्होंने महानिर्वाणी अखाड़े, राज्य सरकार और जिला प्रशासन से आपसी संवाद के जरिए शीघ्र समाधान निकालने और योग्य संत को महंत पद पर आसीन करने की मांग की।

वहीं महंत पद के दावेदारों में शामिल संत प्रज्ञान पुरी महाराज ने मंदिर प्रबंधन पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सोमपुरी महाराज के निधन के बाद स्थाई प्रबंधन समिति बनाई गई थी, लेकिन व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व महंतों द्वारा बनाए गए ट्रस्ट नियमों के अनुसार नि:शुल्क चिकित्सा जैसी जनकल्याणकारी सेवाएं शुरू नहीं हो सकीं। संत प्रज्ञान पुरी महाराज का कहना है कि मंदिर परिसर और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को देखकर स्थिति स्वयं स्पष्ट हो जाती है। न्यायालय और सरकार को मिलकर जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि मंदिर की परंपराएं और व्यवस्थाएं सही दिशा में लौट सकें।

स्थानीय तीर्थ पुरोहित पंडित हरगोपाल पाराशर और गोविंद गुरु ने भी महंत की गद्दी खाली रहने पर चिंता जताई। उनका कहना है कि ब्रह्मा मंदिर में महंतों की परंपरा सदियों पुरानी है और सोमपुरी महाराज के निधन के बाद आठ वर्षों तक गद्दी का रिक्त रहना विश्व प्रसिद्ध तीर्थ के लिए उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों की तरह यहां भी संतों के लिए भंडारा, निवास और समुचित व्यवस्थाएं होनी चाहिए, जो महंत के बिना संभव नहीं हैं।

संत समाज का मानना है कि किसी भी बड़े तीर्थ में महंत की अनुपस्थिति को शुभ नहीं माना जाता। महंत ही मंदिर की आध्यात्मिक धुरी, परंपराओं के संरक्षक और भक्तों की आस्था के प्रतीक होते हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं से जुड़े जगतपिता ब्रह्मा मंदिर को लेकर अब संत समाज और भक्तों की साझा मांग है कि न्यायालय में लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण हो और परंपरा के अनुरूप नए महंत की नियुक्ति कर मंदिर की धार्मिक गरिमा और आध्यात्मिक पहचान को फिर से सुदृढ़ किया जाए।


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