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February 4, 2025
पाकिस्तान के कराची स्थित गोलिमार श्मशान घाट में वर्षों से रखे 400 हिंदू मृतकों के अस्थि कलश आखिरकार सोमवार को वाघा-अटारी बॉर्डर के रास्ते भारत पहुंच गए। ये अस्थियां लगभग 8 साल से श्मशान घाट में रखी थीं, क्योंकि परिजन इन्हें गंगा में प्रवाहित करने का इंतजार कर रहे थे।
महाकुंभ योग में भारत आने की अनुमति मिली:पाकिस्तानी हिंदू परिवारों को भारत सरकार से विशेष वीजा मिला, जिसके बाद महाकुंभ योग में अस्थियों को भारत लाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
रविवार (2 फरवरी) को कराची के श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की गई। इसके बाद परिजनों ने अस्थियों को अंतिम विदाई दी, ताकि मोक्ष के लिए इन्हें गंगा में विसर्जित किया जा सके।
श्मशान घाट में हुई विशेष प्रार्थना, अस्थि विसर्जन के लिए जरूरी दस्तावेज अनिवार्य:बुधवार (29 जनवरी) को बड़ी संख्या में श्रद्धालु कराची के गोलिमार श्मशान घाट पहुंचे, जहां अस्थियों के लिए विशेष प्रार्थना की गई।
भारत में अस्थि विसर्जन के लिए मृतक का मृत्यु प्रमाणपत्र और श्मशान घाट की पर्ची अनिवार्य थी, इसलिए परिजन इन्हें प्राप्त करने के लिए श्मशान घाट पहुंचे। जो परिवार अपने प्रियजनों की अस्थियां हरिद्वार में प्रवाहित करना चाहते थे, उन्होंने इन दस्तावेजों को तैयार कराया।
वाघा-अटारी बॉर्डर से भारत में प्रवेश, गंगा में होंगे विसर्जित:सोमवार (3 फरवरी) को 400 अस्थि कलशों को अमृतसर के वाघा-अटारी बॉर्डर से भारत लाया गया।अब ये अस्थियां हरिद्वार और अन्य पवित्र नदियों में विसर्जित की जाएंगी।
हिंदू समुदाय की वर्षों पुरानी मांग हुई पूरी:पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू समुदाय के लिए यह भावनात्मक क्षण है, क्योंकि वर्षों से वे अपने प्रियजनों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने की प्रतीक्षा कर रहे थे।
यह पहल हिंदू समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक मान्यताओं को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।अब देखना यह होगा कि भविष्य में क्या भारत और पाकिस्तान के बीच ऐसे धार्मिक कार्यों के लिए और भी सहूलियतें दी जाएंगी या नहीं।
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