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May 13, 2022
मधुकर कहिन
सामूहिक बेइज्जती @अजमेर रेलवे स्टेशन
रेलवे प्लेटफॉर्म पर देर रात तक राहुल गांधी से मिलने की मिन्नतें करते रहें अजमेर के कांग्रेसी और ट्रेन में सोते रहे राहुल गांधी
नरेश राघानी
अजमेर शहर के कांग्रेसियों की इज्जत कांग्रेस हाईकमान की नजरों में दो कौड़ी की है । आप कहेंगे मधुकर जी ऐसे कैसे कह सकते हो आप ?? तो भैया !!! बात खारी जरूर है लेकिन बहुत खरी है। उदयपुर जाते वक्त राहुल गांधी ने शायद रेलगाड़ी से जाने का फैसला इसलिए किया था ताकि हर स्टेशन पर कांग्रेस जनों से मिलते हुए जमीनी स्तर के लोगों से दो पल के लिए सही उनके बीच से गुजर के मुखातिब होते जाएं। फैसला तो उन्होंने बहुत आसमान फाड़ लिया था। इसी वजह से राजस्थान भर में दिल्ली से उदयपुर की तरफ जाने वाली उनकी ट्रेन , प्रदेशभर के छोटे-मोटे कांग्रेसियों को ( जो दिल्ली के हाई फाई माहौल में जाकर हाइकमान से मिल नहीं पाते ) एक उम्मीद भरी गाड़ी लगने लगी। सो लगभग हर रेलवे स्टेशनों पर लोग आकर राहुल गांधी से मिलने लगे।
सीकर जिले में तो राहुल गांधी रात को 11:30 बजे ट्रेन से उतरे और वहां के लोगों से दो पल के लिए सही अपना चेहरा दिखा कर अभिवादन स्वीकार किया। परंतु जैसे-जैसे उम्मीद एक्सप्रेस अजमेर की तरफ बढ़ने लगी भगवान जाने राहुल गांधी को क्या हुआ ??? और उन्होंने शायद अपने निजी स्टाफ से यह कह दिया कि – अजमेर में मैं किसी से नहीं मिलूंगा। कह देना कि मैं सो रहा हूं ...
अजमेर भर के कांग्रेसी मालाएं और साफे ले लेकर देर रात जब रेलवे स्टेशन पर जमा होने लगे, तो वहां माहौल बन गया। एक रेलवे कर्मचारी ने अपना नाम न बताने की शर्त पर यह बताया कि – शहर भर के उम्मीद जीवी कांग्रेसी प्लेटफार्म पर रेल की पटरियों के पास खड़े रहे। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष विजय जैन, नौरत गुर्जर, महासचिव शिवकुमार बंसल, बिपिन बेसिल, नरेश सत्यवना,श्रवण कुमार टोनी,अंकुर त्यागी सहित सैकड़ों लोग प्लेटफार्म पर बैठ गए। जैसे ही ट्रेन आई एक पल के लिए तो जैसे भगदड़ मच गई। राहुल गांधी के सुरक्षाकर्मियों ने सभी कांग्रेसियों को वही रोक लिया, और राहुल गांधी से नहीं मिलने दिया।
कांग्रेसियों को यह कहा गया कि – राहुल जी सो रहे हैं ।
काफी मशक्कत के बावजूद राहुल के सुरक्षाकर्मियों ने जब अजमेर के कांग्रेसियों को राहुल गांधी से नहीं मिलवाया तो , कुंठित होकर ,भोले कम और भाले टाइप ज्यादा कांग्रेसियों ने राहुल गांधी जिंदाबाद के नारे लगाने शुरू कर दिए ।
आज सुबह शहर भर के कांग्रेसियों के बीच इस सामूहिक बेइज्जती की सारा दिन चर्चा होती रही। चर्चा का विषय यह भी था की – रात को राहुल गांधी ने मिले न सही । लेकिन गाड़ी के भीतर बैठ कर खिड़की से शकल ही दिखा देते ... तो कांग्रेसियों को मोक्ष प्राप्ति का अहसास हो जाता। लेकिन उन्होंने इतना भी नहीं किया ??? ऐसा क्यूं ???
एक आसमान फाड़ पराजीवी कांग्रेस नेता ने तो भयंकर विश्लेषण पेश करते हुए यह कह दिया कि –सचिन पायलट के राजनैतिक क्षेत्र में राहुल गांधी की हिम्मत नहीं हो रही है कि वह अपनी शक्ल दिखा पाए। क्योंकि सचिन पायलट से किया हुआ वादा वह निभा नहीं पाए हैं।
कुछ भी .... था ये तो
एक अन्य तथाकथित बुद्धिजीवी ने कहा कि – नीम का थाना में अशोक गहलोत और पायलट गुट के छोटे मोटे गुटके स्वागत के दौरान आपस में भिड़ गए थे। और बड़ी विकट स्थिति पैदा हो गई थी। जब नीमकाथाना में इस तरह से गहलोत वर्सेस पायलट मैच खुल के सामने आ चुका था। तो शायद राहुल गांधी ने यह सोच लिया कि –अजमेर तो सचिन पायलट का गढ़ रहा है। यहां पर भी कबड्डी का मैच प्लेटफार्म पर ही न खुल जाए
परंतु ,मेरा यह मानना है कि – एक राष्ट्र नेता ऐसे जिले में क्यों रुकेगा और नेताओं को तवज्जो देगा , जिस जिले पूरे प्रदेश में कांग्रेस की सरकार आने के बाद भी , कांग्रेस की मात्र 2 सीटें आई है। वह भी देहात में । जिस जिले में मेयर भाजपा का है ,पार्षद संख्या भाजपा के पास ज्यादा है ,जिला प्रमुख भाजपा का है ,सांसद भाजपा का है, और जिस जिले में अभी तक यह तय नहीं है कि आखिर अध्यक्ष कौन है ??
ऐसे निकम्मे और नकारा जिले के कांग्रेसियों से मिलकर राहुल गांधी करेंगे भी क्या ??? शायद तभी उन्होंने यही बेहतर समझा की – ऐसे लोगों से मिलने से बेहतर है आंखें मूंदकर अजमेर आने से पहले ही थोड़ा सो लिया जाए। राहुल गांधी ऐसे निकम्मे लोगों के लिए अपनी नींद खराब क्यों करेंगे जो 20 साल से कांग्रेस को अजमेर शहर में जितवा कर नहीं ला पाए हैं ??
खैर !!! जितने मूंह हैं उतनी बातें हैं साहब !!!
काम की बात तो यह है कि – भूखे प्यासे ट्रेन की पटरी के पास, देर रात तक, मालाएं और साफे लेकर राहुल से मिलने की उम्मीद लगाए बैठे कांग्रेसियों को राहुल गांधी ने उनकी हैसियत दिखा दी है। इसके राजनैतिक संदेश को जितनी जल्दी हो सके अजमेर के कांग्रेसी समझ जाएं तो बेहतर है। और पायलट बनाम गहलोत की कबड्डी का लाभ उठा कर अपनी जगह बनाने की बजाए अजमेर में कांग्रेस की जगह बनाने में ध्यान दें तो भविष्य में ऐसे ऐतिहासिक बेइज्जती से बच जायेंगें।
समझ सको तो समझो वरना होते रहो ऐसे ही उम्र भर बेइज्जत।
जय श्री कृष्ण
नरेश राघानी
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