For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 137073940
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: राहुल गांधी 1 जून को पुष्कर पहुंचेंगे, कांग्रेस के राष्ट्रीय चिंतन शिविर के समापन सत्र को करेंगे संबोधित |  Ajmer Breaking News: संगठन की मजबूती के लिए जमीनी नेतृत्व की भूमिका अहम: अशोक गहलोत |  Ajmer Breaking News: विलक्षण प्रतिभा सम्मान समारोह का हुआ भव्य आयोजन,520 विलक्षण प्रतिभाओं का हुआ सम्मान |  Ajmer Breaking News: वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान,मीडिया कर्मियों ने देखे जल संरक्षण के कार्य |  Ajmer Breaking News: वीर सावरकर जयंती पर युवाओं ने लिया राष्ट्र निर्माण का संकल्प,माय भारत अजमेर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रभक्ति, युवा जागरण एवं राष्ट्रीय चेतना पर हुआ संवाद |  Ajmer Breaking News: देवनानी ने मेघवाल को विधानसभा का प्रतीक चिन्ह भेंट किया,देवनानी की श्री मेघवाल से विभिन्न विषयों पर चर्चा |  Ajmer Breaking News: अवैध प्रोपीलीन गैस रिफिलिंग पर बड़ी कार्रवाई,गैस टैंकर, पिकअप वाहन और 42 व्यावसायिक सिलेंडर जब्त,ईसी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज, जांच जारी |  Ajmer Breaking News: अधिक मास पूर्णिमा पर पुष्कर में उमड़ा आस्था का सैलाब, व्यवस्थाओं की खुली पोल |  Ajmer Breaking News: रामगंज थाना अंतर्गत नाबालिक से दुष्कर्म करने वाले आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: क्लॉक टॉवर थाना अंतर्गत मदार गेट बाजार में दो दुकानों से हजारों की नकदी चोरी, सीसीटीवी में कैद हुए चोर | 

क़लमकार: जयशंकर प्रसाद और मुंशी प्रेमचंद

Post Views 571

November 9, 2021

चित्र-- मृत्यु से दो दिन पहले का, प्रेमचंद जी की सेवा करती शिवरानी देवी। जमाना (ऊर्दू) अक्टूबर १९३६ कानपुर  मे प्रकाशित।

प्रेमचंद जी का शव पड़ा हुआ था। उस निर्जीव शरीर को गोद में चिपटाये भाभी शिवरानी आकाश का भी हृदय दहला देने वाला करुण क्रन्दन कर रही थीं। श्मशान जाने के लिये नगर के सैंकडों संभ्रान्त साहित्यिक उतावले हो रहे थे। कुछ अपने दु:ख का वेग नही सम्भाल पा रहे थे। कुछ को और भी बहुत से काम थे। उन्हें जल्दी थी इस काम से निबट जाने की और कुछ ने मुझे बतलाया था कि वह रास्ते से ही अलग हो जायेंगे, श्मशान तक न जा सकेंगे।दूसरी ओर भाभी शिवरानी शव को किसी को छूने नहीं दे रही थीं। सबने प्रसाद जी से कहा -- आप ही समझायें।वे आगे बढ़े। भाभी से बोले -- अब इन्हें जाने दीजिये।वे क्रोध पूर्वक चीख़ उठीं --आप कवि हो सकते हैं पर स्त्री का हृदय नहीं जान सकते। मैंने इनके लिये अपना वैधव्य खंडित किया था। इनसे इसलिये नहीं शादी की थी कि मुझे दुबारा विधवा बना कर चले जायें। आप हट जाइये। प्रसाद जी के कोमल हृदय को वेदना तथा नारी की पीड़ा ने जैसे दबोच लिया। उनका गला भर आया। नेत्रो मे आँसू छलछला उठे।मैं ही सामने खड़ा दिखाई पड़ा। मुझसे भर्रायी आवाज में बोले --  परिपूर्णा, तुम्हीं सम्भालो। भाभी चिल्लाती चीखती रहीं और मैंने अब यह प्रेमचंदजी नहीं हैं, मिट्टी है- कहकर मुर्दा उनकी गोद से छीन लिया।उस घटना के बाद मैंने प्रसाद जी को कभी हँसते नहीं देखा। उनके शरीर में क्षय घुस चुका था।जब चिता की लपट उन्हे समेटने लगी, सब लोग इधर उधर की बातें भी कर रहे थे। प्रेमचन्द जी के सम्बन्ध में कलप रहे थे। पर एक व्यक्ति मौन, मूक, एकटक चिता की ओर देखता रहा। प्रेमचंद जी का शव उठाने के समय ऐसी घटना हो गई थी उसके साथ कि उसका मन रो रहा था और शायद वह देख रहा था -- छ: महीने के बाद अपनी चिता भी... वह थे श्री जयशंकर प्रसाद।

(बीती य़ादें- परिपूर्णानन्द वर्मा) 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved