For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 127547853
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: राजस्व एवं उपनिवेशन विभाग के प्रमुख शासन सचिव टी. रविकांत ने बुधवार को अजमेर जिले के विभिन्न राजस्व कार्यालयों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया |  Ajmer Breaking News: दूसरे दिन भी यातायात विभाग की टीम ने मदार गेट, कवंडस पुरा,पड़ाव बाजार में हो रहे अतिक्रमणों पर की कार्रवाई,  |  Ajmer Breaking News: अजमेर के अलवर गेट थाना अंतर्गत नाका मदार इलाके में मंगलवार रात घर के बाहर खड़ी वेन में भीषण आग लगने से इलाके में हड़कंप मच गया |  Ajmer Breaking News: आदर्श नगर थाने के सामने हाईवे रोड पर खड़े टेंपो में टेंपो चालक की लाश मिलने से फैली सनसनी, |  Ajmer Breaking News: आनासागर झील फिर आने वाली है जलकुंभी की चपेट में , नालों से निकलती जलकुंभी, तेज गर्मी के साथ-साथ आना सागर झील में भी फैलने लगी , |  Ajmer Breaking News: जिला स्पेशल टीम अजमेर व वृत दरगाह टीम द्वारा सुरक्षित अजमेर,नशामुक्त अजमेर अभियान के तहत दो कार्रवाइयों को अंजाम दिया। |  Ajmer Breaking News: बॉलीवुड अभिनेत्री चांदनी यादव बुधवार को अजमेर पहुंचीं, जहां उन्होंने सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में हाजिरी लगाई। |  Ajmer Breaking News: जिला जल एवं स्वच्छता समिति की बैठक आयोजित, ग्रीष्म ऋतु के दौरान हो पर्याप्त पेयजल सप्लाई |  Ajmer Breaking News: जिला मुख्यालय स्थित कार्यालयों का जिला कलक्टर श्री लोक बन्धु द्वारा मंगलवार को सघन औचक निरीक्षण कर आवश्यक निर्देश प्रदान किए गए। |  Ajmer Breaking News: स्थानीय निधि अंकेक्षण विभाग की संभागीय प्रशासनिक समिति की बैठक मंगलवार को संभागीय आयुक्त श्री शक्ति सिंह राठौड़ की अध्यक्षता में संभागीय आयुक्त कार्यालय में आयोजित | 

क़लमकार: जयशंकर प्रसाद और मुंशी प्रेमचंद

Post Views 571

November 9, 2021

चित्र-- मृत्यु से दो दिन पहले का, प्रेमचंद जी की सेवा करती शिवरानी देवी। जमाना (ऊर्दू) अक्टूबर १९३६ कानपुर  मे प्रकाशित।

प्रेमचंद जी का शव पड़ा हुआ था। उस निर्जीव शरीर को गोद में चिपटाये भाभी शिवरानी आकाश का भी हृदय दहला देने वाला करुण क्रन्दन कर रही थीं। श्मशान जाने के लिये नगर के सैंकडों संभ्रान्त साहित्यिक उतावले हो रहे थे। कुछ अपने दु:ख का वेग नही सम्भाल पा रहे थे। कुछ को और भी बहुत से काम थे। उन्हें जल्दी थी इस काम से निबट जाने की और कुछ ने मुझे बतलाया था कि वह रास्ते से ही अलग हो जायेंगे, श्मशान तक न जा सकेंगे।दूसरी ओर भाभी शिवरानी शव को किसी को छूने नहीं दे रही थीं। सबने प्रसाद जी से कहा -- आप ही समझायें।वे आगे बढ़े। भाभी से बोले -- अब इन्हें जाने दीजिये।वे क्रोध पूर्वक चीख़ उठीं --आप कवि हो सकते हैं पर स्त्री का हृदय नहीं जान सकते। मैंने इनके लिये अपना वैधव्य खंडित किया था। इनसे इसलिये नहीं शादी की थी कि मुझे दुबारा विधवा बना कर चले जायें। आप हट जाइये। प्रसाद जी के कोमल हृदय को वेदना तथा नारी की पीड़ा ने जैसे दबोच लिया। उनका गला भर आया। नेत्रो मे आँसू छलछला उठे।मैं ही सामने खड़ा दिखाई पड़ा। मुझसे भर्रायी आवाज में बोले --  परिपूर्णा, तुम्हीं सम्भालो। भाभी चिल्लाती चीखती रहीं और मैंने अब यह प्रेमचंदजी नहीं हैं, मिट्टी है- कहकर मुर्दा उनकी गोद से छीन लिया।उस घटना के बाद मैंने प्रसाद जी को कभी हँसते नहीं देखा। उनके शरीर में क्षय घुस चुका था।जब चिता की लपट उन्हे समेटने लगी, सब लोग इधर उधर की बातें भी कर रहे थे। प्रेमचन्द जी के सम्बन्ध में कलप रहे थे। पर एक व्यक्ति मौन, मूक, एकटक चिता की ओर देखता रहा। प्रेमचंद जी का शव उठाने के समय ऐसी घटना हो गई थी उसके साथ कि उसका मन रो रहा था और शायद वह देख रहा था -- छ: महीने के बाद अपनी चिता भी... वह थे श्री जयशंकर प्रसाद।

(बीती य़ादें- परिपूर्णानन्द वर्मा) 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved