For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 116974658
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: मेरा भारत, मेरा वोट के संदेश के साथ राष्ट्रीय मतदाता दिवस का भव्य आयोजन |  Ajmer Breaking News: VB-G RAM-G बिल का उद्देश्य है कि हर गांव तक अवसर पहुंचे और हर परिवार समृद्ध बने : भागीरथ चौधरी |  Ajmer Breaking News: राजकीय चिकित्सालयों का हुआ सघन औचक निरीक्षण, अजमेर में भी विभिन्न अधिकारियों द्वारा किया गया निरीक्षण |  Ajmer Breaking News: मेरा भारत, मेरा वोट” थीम पर 16वां राष्ट्रीय मतदाता दिवस आयोजित,विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिक हुए सम्मानित |  Ajmer Breaking News: वंदे मातरम् से गूंजा जवाहर रंगमंच, पूर्व संध्या पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित |  Ajmer Breaking News: गणतंत्र दिवस से पूर्व 25 जनवरी को ख्वाजा साहब की दरगाह के बाहर 786 तिरंगे झंडे वितरित |  Ajmer Breaking News: 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के मध्य नजर अजमेर रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा कड़ी जीआरपी, आरपीएफ सहित सीआईडी और खुफिया एजेंसियां लगातार चला रही है सर्च अभियान  |  Ajmer Breaking News: शाकद्वीपीय मग ब्राह्मण समाज जिला अजमेर के सांस्कृतिक कार्यक्रम में कई बच्चों ने नृत्य किया पूर्विका आस्था और कई महिला बच्चों ने नृत्य  किया |  Ajmer Breaking News: जल ग्रहण मिट्टी के पाल की मजबूती जांचने का दिया प्रशिक्षण ,क्वालिटी से कोई समझौता नहीं होगा - जादवानी  |  Ajmer Breaking News: बॉलीवुड़ फ़िल्म बॉर्डर के बाद अब मुल्क भर में फ़िल्म "बॉर्डर-2" की धूम मची हुई है,23 जनवरी को मुल्क के तमाम सिनेमा घरों में  फ़िल्म रिलीज़ हु | 

क़लमकार: जयशंकर प्रसाद और मुंशी प्रेमचंद

Post Views 571

November 9, 2021

चित्र-- मृत्यु से दो दिन पहले का, प्रेमचंद जी की सेवा करती शिवरानी देवी। जमाना (ऊर्दू) अक्टूबर १९३६ कानपुर  मे प्रकाशित।

प्रेमचंद जी का शव पड़ा हुआ था। उस निर्जीव शरीर को गोद में चिपटाये भाभी शिवरानी आकाश का भी हृदय दहला देने वाला करुण क्रन्दन कर रही थीं। श्मशान जाने के लिये नगर के सैंकडों संभ्रान्त साहित्यिक उतावले हो रहे थे। कुछ अपने दु:ख का वेग नही सम्भाल पा रहे थे। कुछ को और भी बहुत से काम थे। उन्हें जल्दी थी इस काम से निबट जाने की और कुछ ने मुझे बतलाया था कि वह रास्ते से ही अलग हो जायेंगे, श्मशान तक न जा सकेंगे।दूसरी ओर भाभी शिवरानी शव को किसी को छूने नहीं दे रही थीं। सबने प्रसाद जी से कहा -- आप ही समझायें।वे आगे बढ़े। भाभी से बोले -- अब इन्हें जाने दीजिये।वे क्रोध पूर्वक चीख़ उठीं --आप कवि हो सकते हैं पर स्त्री का हृदय नहीं जान सकते। मैंने इनके लिये अपना वैधव्य खंडित किया था। इनसे इसलिये नहीं शादी की थी कि मुझे दुबारा विधवा बना कर चले जायें। आप हट जाइये। प्रसाद जी के कोमल हृदय को वेदना तथा नारी की पीड़ा ने जैसे दबोच लिया। उनका गला भर आया। नेत्रो मे आँसू छलछला उठे।मैं ही सामने खड़ा दिखाई पड़ा। मुझसे भर्रायी आवाज में बोले --  परिपूर्णा, तुम्हीं सम्भालो। भाभी चिल्लाती चीखती रहीं और मैंने अब यह प्रेमचंदजी नहीं हैं, मिट्टी है- कहकर मुर्दा उनकी गोद से छीन लिया।उस घटना के बाद मैंने प्रसाद जी को कभी हँसते नहीं देखा। उनके शरीर में क्षय घुस चुका था।जब चिता की लपट उन्हे समेटने लगी, सब लोग इधर उधर की बातें भी कर रहे थे। प्रेमचन्द जी के सम्बन्ध में कलप रहे थे। पर एक व्यक्ति मौन, मूक, एकटक चिता की ओर देखता रहा। प्रेमचंद जी का शव उठाने के समय ऐसी घटना हो गई थी उसके साथ कि उसका मन रो रहा था और शायद वह देख रहा था -- छ: महीने के बाद अपनी चिता भी... वह थे श्री जयशंकर प्रसाद।

(बीती य़ादें- परिपूर्णानन्द वर्मा) 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved