For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 160414526
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अन्तर्राष्ट्रीय युवा महोत्सव में ऐश्वर्या यादव चयनित, ब्यावर की बेटी ने किया शहर को गौरान्वित |  Ajmer Breaking News: अजमेर नगर निगम के 80 वार्डों के लिए शुक्रवार को मतदान होना है। निकाय चुनाव 2026 में करीब 360 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। |  Ajmer Breaking News: संत बाबा होतूराम साहिब जी का 67वाँ वार्षिक महोत्सव 8 से 10 सितम्बर तक बड़े ही श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। |  Ajmer Breaking News: अजमेर में एडवोकेट के घर 25 लाख की बड़ी चोरी, क्लॉक टावर थाना पुलिस पर रिपोर्ट दबाने का आरोप |  Ajmer Breaking News: कलेक्ट्रेट पर सिर पर काला कपड़ा व ‘अंधा कानून’ लिखा चश्मा पहनकर कांग्रेस शहर अध्यक्ष डॉ. राजकुमार जयपाल का प्रदर्शन |  Ajmer Breaking News: वार्ड 8 में स्थानीय निवासियों ने सजाई चौपाल, बीजेपी प्रत्याशी पंकज सिंह राठौड़ बोले- जीत ऐतिहासिक होगी |  Ajmer Breaking News: वार्ड नंबर 8 से कांग्रेस प्रत्याशी संतोष कंवर शेखावत ने की वोट की अपील, 11 तारीख को 2 नंबर का बटन दबाने का किया आह्वान। |  Ajmer Breaking News: पुष्कर में नगर निकाय चुनाव में शत-प्रतिशत मतदान सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पुष्कर में स्वीप टीम द्वारा लगातार मतदाता जागरूकता के अभिनव कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। |  Ajmer Breaking News: पुष्कर में दिनदहाड़े दुकान में घुसकर डंडे-सरिए से हमला, मशीन खराब होने के विवाद में दुकानदार और भांजा घायल, पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की, हमलावरों की तलाश |  Ajmer Breaking News: उत्तरांचल से निकली नंदा देवी लोकजात यात्रा पहुंची पुष्कर, उत्तरांचल घाट पर पूजा-अर्चना के साथ तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों ने किया भव्य स्वागत, संस्कृति की झलक भी देखने को मिली | 

क़लमकार: जयशंकर प्रसाद और मुंशी प्रेमचंद

Post Views 691

November 9, 2021

चित्र-- मृत्यु से दो दिन पहले का, प्रेमचंद जी की सेवा करती शिवरानी देवी। जमाना (ऊर्दू) अक्टूबर १९३६ कानपुर  मे प्रकाशित।

प्रेमचंद जी का शव पड़ा हुआ था। उस निर्जीव शरीर को गोद में चिपटाये भाभी शिवरानी आकाश का भी हृदय दहला देने वाला करुण क्रन्दन कर रही थीं। श्मशान जाने के लिये नगर के सैंकडों संभ्रान्त साहित्यिक उतावले हो रहे थे। कुछ अपने दु:ख का वेग नही सम्भाल पा रहे थे। कुछ को और भी बहुत से काम थे। उन्हें जल्दी थी इस काम से निबट जाने की और कुछ ने मुझे बतलाया था कि वह रास्ते से ही अलग हो जायेंगे, श्मशान तक न जा सकेंगे।दूसरी ओर भाभी शिवरानी शव को किसी को छूने नहीं दे रही थीं। सबने प्रसाद जी से कहा -- आप ही समझायें।वे आगे बढ़े। भाभी से बोले -- अब इन्हें जाने दीजिये।वे क्रोध पूर्वक चीख़ उठीं --आप कवि हो सकते हैं पर स्त्री का हृदय नहीं जान सकते। मैंने इनके लिये अपना वैधव्य खंडित किया था। इनसे इसलिये नहीं शादी की थी कि मुझे दुबारा विधवा बना कर चले जायें। आप हट जाइये। प्रसाद जी के कोमल हृदय को वेदना तथा नारी की पीड़ा ने जैसे दबोच लिया। उनका गला भर आया। नेत्रो मे आँसू छलछला उठे।मैं ही सामने खड़ा दिखाई पड़ा। मुझसे भर्रायी आवाज में बोले --  परिपूर्णा, तुम्हीं सम्भालो। भाभी चिल्लाती चीखती रहीं और मैंने अब यह प्रेमचंदजी नहीं हैं, मिट्टी है- कहकर मुर्दा उनकी गोद से छीन लिया।उस घटना के बाद मैंने प्रसाद जी को कभी हँसते नहीं देखा। उनके शरीर में क्षय घुस चुका था।जब चिता की लपट उन्हे समेटने लगी, सब लोग इधर उधर की बातें भी कर रहे थे। प्रेमचन्द जी के सम्बन्ध में कलप रहे थे। पर एक व्यक्ति मौन, मूक, एकटक चिता की ओर देखता रहा। प्रेमचंद जी का शव उठाने के समय ऐसी घटना हो गई थी उसके साथ कि उसका मन रो रहा था और शायद वह देख रहा था -- छ: महीने के बाद अपनी चिता भी... वह थे श्री जयशंकर प्रसाद।

(बीती य़ादें- परिपूर्णानन्द वर्मा) 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved