For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 121612526
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: मेरा भारत, मेरी जिम्मेदारी’ अभियान की स्वच्छता संदेश से शुरुआत, स्वच्छता श्रमदान कार्यक्रम साँपला, सरवाड़ ब्लॉक अजमेर में आयोजित |  Ajmer Breaking News: हार्टफुलनैस संस्था के वैश्विक मार्गदर्शक पूज्य दाजी का अजमेर आगमन |  Ajmer Breaking News: पुष्कर में तेज रफ्तार डंपर ने पुलिस जीप में मारी टक्कर, पुलिस जीप में सवार एएसआई और कांस्टेबल हुए घायल, चालक मौके से फरार, पुलिस ने डंपर किया जप्त, चालक की तलाश जारी |  Ajmer Breaking News: सिन्धी लेडीज क्लब द्वारा सिन्धु संगम ऐं सस्सी पुन्नु नाटक सम्पन्न |  Ajmer Breaking News: अजमेर: श्मशान स्थल से अस्थियों के गायब होने पर शोकाकुल परिवार हुआ नाराज |  Ajmer Breaking News: अजमेर शहर में हुई चोरी की वारदात का क्लॉक टॉवर थाना पुलिस ने खुलासा करते हुए बड़ी सफलता हासिल की है। |  Ajmer Breaking News: नगरा इलाके में चैत्र नवरात्र के दौरान माँ भवानी के जागरण में गायक जॉन अजमेरी ने माता के दरबार में गाई ख्वाजा की क़व्वाली  |  Ajmer Breaking News: राजगढ़ धाम पर छठ मेला 24 मार्च को,मेले को लेकर तैयारिया हुई पूर्ण |  Ajmer Breaking News: हार्टफुलनेस संस्थान के मार्गदर्शक दाजी का प्रथम बार अजमेर में आगमन हो रहा है, दाजी के आगमन की तैयारी की मीटिंग सम्पन्न |  Ajmer Breaking News: ग्रामीणों की सुनी समस्याएं, त्वरित समाधान के दिए निर्देश, विकसित ग्राम अभियान पर की गई चर्चा ,कृषक , युवा एवं महिलाओं से किया संवाद | 

क़लमकार: जयशंकर प्रसाद और मुंशी प्रेमचंद

Post Views 571

November 9, 2021

चित्र-- मृत्यु से दो दिन पहले का, प्रेमचंद जी की सेवा करती शिवरानी देवी। जमाना (ऊर्दू) अक्टूबर १९३६ कानपुर  मे प्रकाशित।

प्रेमचंद जी का शव पड़ा हुआ था। उस निर्जीव शरीर को गोद में चिपटाये भाभी शिवरानी आकाश का भी हृदय दहला देने वाला करुण क्रन्दन कर रही थीं। श्मशान जाने के लिये नगर के सैंकडों संभ्रान्त साहित्यिक उतावले हो रहे थे। कुछ अपने दु:ख का वेग नही सम्भाल पा रहे थे। कुछ को और भी बहुत से काम थे। उन्हें जल्दी थी इस काम से निबट जाने की और कुछ ने मुझे बतलाया था कि वह रास्ते से ही अलग हो जायेंगे, श्मशान तक न जा सकेंगे।दूसरी ओर भाभी शिवरानी शव को किसी को छूने नहीं दे रही थीं। सबने प्रसाद जी से कहा -- आप ही समझायें।वे आगे बढ़े। भाभी से बोले -- अब इन्हें जाने दीजिये।वे क्रोध पूर्वक चीख़ उठीं --आप कवि हो सकते हैं पर स्त्री का हृदय नहीं जान सकते। मैंने इनके लिये अपना वैधव्य खंडित किया था। इनसे इसलिये नहीं शादी की थी कि मुझे दुबारा विधवा बना कर चले जायें। आप हट जाइये। प्रसाद जी के कोमल हृदय को वेदना तथा नारी की पीड़ा ने जैसे दबोच लिया। उनका गला भर आया। नेत्रो मे आँसू छलछला उठे।मैं ही सामने खड़ा दिखाई पड़ा। मुझसे भर्रायी आवाज में बोले --  परिपूर्णा, तुम्हीं सम्भालो। भाभी चिल्लाती चीखती रहीं और मैंने अब यह प्रेमचंदजी नहीं हैं, मिट्टी है- कहकर मुर्दा उनकी गोद से छीन लिया।उस घटना के बाद मैंने प्रसाद जी को कभी हँसते नहीं देखा। उनके शरीर में क्षय घुस चुका था।जब चिता की लपट उन्हे समेटने लगी, सब लोग इधर उधर की बातें भी कर रहे थे। प्रेमचन्द जी के सम्बन्ध में कलप रहे थे। पर एक व्यक्ति मौन, मूक, एकटक चिता की ओर देखता रहा। प्रेमचंद जी का शव उठाने के समय ऐसी घटना हो गई थी उसके साथ कि उसका मन रो रहा था और शायद वह देख रहा था -- छ: महीने के बाद अपनी चिता भी... वह थे श्री जयशंकर प्रसाद।

(बीती य़ादें- परिपूर्णानन्द वर्मा) 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved