For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 121942806
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: इंजीनियरिंग कॉलेज अजमेर के दो दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम तरंगिनी 2026 एवं वार्षिक पुरस्कार वितरण मारोह का सफल आयोजन |  Ajmer Breaking News: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन पर एक दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट वर्कशॉप आयोजित |  Ajmer Breaking News: प्रत्येक युवा आत्मनिर्भर संवेदनशील अनुशासन और राष्ट्र के प्रति सर्मपित हो- डॉ. प्रेमचन्द बैरवा |  Ajmer Breaking News: राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बोर्ड कार्यालय से जारी किए माध्यमिक, प्रवेशिका सहित कक्षा 8 वीं एवं 5 वीं के परीक्षा परिणाम |  Ajmer Breaking News: जिला कलक्टर ने शहरी फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति को लेकर ली समीक्षा बैठक,प्रगति बढ़ाने एवं समयबद्ध क्रियान्वयन के दिए निर्देश |  Ajmer Breaking News: दैनिक जीवन में उपयोग होने वाले रसायनों से उत्पन्न संभावित खतरों, आगजनी एवं अन्य आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के उद्देश्य से नागरिक सुरक्षा विभाग द्वारा प्रस्तावित मॉक ड्रिल की तैयारियों को लेकर बैठक |  Ajmer Breaking News: शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कार्यालय से दसवीं बोर्ड के साथ पांचवी और आठवीं का रिजल्ट किया घोषित, |  Ajmer Breaking News: महाकोष के नाम से एक दम मिलता जुलता नक़ली ब्रांड शुधकोश का भांडाफोड़ ! |  Ajmer Breaking News: गिरफ्तारी नहीं, पुलिस की बर्बरता पूर्वक कार्रवाई,,पूर्व आरटीडीसी अध्यक्ष धर्मेंद्र राठौड़ ने एनएसयूआई देहात अध्यक्ष अंकित घारू की गिरफ्तारी का किया विरोध |  Ajmer Breaking News: राजगढ़ धाम पर धूमधाम से भरा लख्खी छठ मेला,आस्था का अद्भुत नजारा, अखण्ड ज्योति के दर्शन हेतु भक्तों में मची होड़ | 

क़लमकार: जयशंकर प्रसाद और मुंशी प्रेमचंद

Post Views 571

November 9, 2021

चित्र-- मृत्यु से दो दिन पहले का, प्रेमचंद जी की सेवा करती शिवरानी देवी। जमाना (ऊर्दू) अक्टूबर १९३६ कानपुर  मे प्रकाशित।

प्रेमचंद जी का शव पड़ा हुआ था। उस निर्जीव शरीर को गोद में चिपटाये भाभी शिवरानी आकाश का भी हृदय दहला देने वाला करुण क्रन्दन कर रही थीं। श्मशान जाने के लिये नगर के सैंकडों संभ्रान्त साहित्यिक उतावले हो रहे थे। कुछ अपने दु:ख का वेग नही सम्भाल पा रहे थे। कुछ को और भी बहुत से काम थे। उन्हें जल्दी थी इस काम से निबट जाने की और कुछ ने मुझे बतलाया था कि वह रास्ते से ही अलग हो जायेंगे, श्मशान तक न जा सकेंगे।दूसरी ओर भाभी शिवरानी शव को किसी को छूने नहीं दे रही थीं। सबने प्रसाद जी से कहा -- आप ही समझायें।वे आगे बढ़े। भाभी से बोले -- अब इन्हें जाने दीजिये।वे क्रोध पूर्वक चीख़ उठीं --आप कवि हो सकते हैं पर स्त्री का हृदय नहीं जान सकते। मैंने इनके लिये अपना वैधव्य खंडित किया था। इनसे इसलिये नहीं शादी की थी कि मुझे दुबारा विधवा बना कर चले जायें। आप हट जाइये। प्रसाद जी के कोमल हृदय को वेदना तथा नारी की पीड़ा ने जैसे दबोच लिया। उनका गला भर आया। नेत्रो मे आँसू छलछला उठे।मैं ही सामने खड़ा दिखाई पड़ा। मुझसे भर्रायी आवाज में बोले --  परिपूर्णा, तुम्हीं सम्भालो। भाभी चिल्लाती चीखती रहीं और मैंने अब यह प्रेमचंदजी नहीं हैं, मिट्टी है- कहकर मुर्दा उनकी गोद से छीन लिया।उस घटना के बाद मैंने प्रसाद जी को कभी हँसते नहीं देखा। उनके शरीर में क्षय घुस चुका था।जब चिता की लपट उन्हे समेटने लगी, सब लोग इधर उधर की बातें भी कर रहे थे। प्रेमचन्द जी के सम्बन्ध में कलप रहे थे। पर एक व्यक्ति मौन, मूक, एकटक चिता की ओर देखता रहा। प्रेमचंद जी का शव उठाने के समय ऐसी घटना हो गई थी उसके साथ कि उसका मन रो रहा था और शायद वह देख रहा था -- छ: महीने के बाद अपनी चिता भी... वह थे श्री जयशंकर प्रसाद।

(बीती य़ादें- परिपूर्णानन्द वर्मा) 


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved