For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 157352958
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर में बीजेपी के पूर्व पदाधिकारी महेंद्र भाटी का विरोध, सामान्य वर्ग के सम्मान को लेकर जिला मुख्यालय के बाहर सिर मुंडवाकर किया विरोध प्रदर्शन  |  Ajmer Breaking News: पहचान से अधिकार तक: RMKM ने घुमन्तू एवं विमुक्त समुदाय के साथ मनाया विमुक्ति दिवस |  Ajmer Breaking News: अजमेर नगर निगम चुनाव: नामांकन के आखिरी दिन उमड़ी भीड़, भाजपा-कांग्रेस ने अब तक नहीं खोले पत्ते, टिकट कटने पर कई निर्दलीय मैदान में |  Ajmer Breaking News: अजमेर निकाय चुनाव नामांकन को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, कई मार्गों पर रहेगा डायवर्जन |  Ajmer Breaking News: मसानिया भैरव धाम राजगढ़ पर नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान,पढ़ेंगे लिखेंगे कब, नशे का त्याग करेंगे तब - चम्पालाल महाराज |  Ajmer Breaking News: रिश्तेदार ने ही उड़ाए 50 हजार रुपये, OTP हासिल कर दूसरे खाते में किये ट्रांसफर; आरोपी गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: सिविल लाइन क्षेत्र में बढ़ती चोरियों से दुकानदारों में रोष, थाना पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, |  Ajmer Breaking News: श्री श्याम सेवक कल्याण संघ की विशाल भजन संध्या,बेंगलुरु से लायें फूलों से सजा बाबा श्याम का दरबार |  Ajmer Breaking News: जिला स्पेशल टीम अजमेर व पुलिस थाना अलवर गेट की सयुक्त बडी कार्यवाही वाटर सप्लायर्स की आड में चल रहे जुआ-सट्टे का पर्दाफाश। |  Ajmer Breaking News: अजमेर शरीफ दरगाह में हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैही और हज़रत सैय्यद अलाउद्दीन साबिर पिया कलियरी रहमतुल्लाह अलैही के उर्स की तक़रीब अदा की गई। | 

अंदाजे बयां: बड़ी मुश्किल से जो दरिया हुआ था, बदन में उसके सहरा चीख़ता था

Post Views 301

April 5, 2021

मैं अपनी जेब से ही गिर गया था, मुझे रूमाल मेरा ढूँढता था।

बड़ी मुश्किल से जो दरिया हुआ था,
बदन में उसके सहरा चीख़ता था।
मैं अपनी जेब से ही गिर गया था,
मुझे रूमाल मेरा ढूँढता था।
पराई आग शायद जल रही थी,
उसी पर हाथ मैंने रख दिया था।
मेरी पहचान उससे डर रही थी,
अजब से डर जो मुझमें छिप गया था।
ढहा जाता था मेरे टूटने पर,
मेरा घर मुझको कितना चाहता था।
खुली छत पर भी था बेचैन कितना,
न जाने कौन मुझको सोचता था।
कहाँ जाकर हुआ था गुम न जानें,
मुझे मेरे ही साया खोजता था।
     सुरेन्द्र चतुर्वेदी


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved