For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 164726812
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: जेएलएन मेडिकल कॉलेज अजमेर में चेस्ट मास्टरी CME एवं स्टेट लेवल पीजी क्विज 2026 का आयोजन |  Ajmer Breaking News: हर वार्ड का बनेगा सफाई प्लान, कचरा संग्रहण व्यवस्था होगी मजबूत,विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने ली नगर निगम की बैठक |  Ajmer Breaking News:  राजस्थान शिक्षक संघ (राधाकृष्णन) ने राज्य कर्मचारियों के लंबित भुगतान को लेकर मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा |  Ajmer Breaking News: अजमेर जिला कंज्यूमर कोर्ट के बाहर बड़ी संख्या में खाने के पैकेट और खाद्य सामग्री बिखरी मिलने से हड़कंप मच गया। |  Ajmer Breaking News: गेगल थाना अंतर्गत गगवाना पुलिया पर ब्लाईण्ड मर्डर की सनसनीखेज वारदात का खुलासा, |  Ajmer Breaking News: दयानंद महाविद्यालय में छात्र समस्याओं को लेकर एबीवीपी का हल्लाबोल, |  Ajmer Breaking News: जयपुर में वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का जोरदार प्रदर्शन, वोट चोरी के आरोपों पर कांग्रेस का हल्लाबोल, चुनाव आयोग कार्यालय तक निकाला पैदल मार्च |  Ajmer Breaking News: तीर्थगुरु पुष्कर को स्वच्छ, सुंदर एवं व्यवस्थित बनाने के संकल्प के साथ आज पवित्र पुष्कर सरोवर के नगर पालिका घाट से विशेष स्वच्छता अभियान का शुभारंभ |  Ajmer Breaking News: थाना हरिभाऊ उपाध्याय नगर ने थाना क्षेत्र व अजमेर शहर से स्कूटी एवं मोटरसाईकिल चोरी करने वाले दो नाबालिक बालको के कब्जे से 06 दुपहियां वाहन बरामद कर निरूद्ध किया ।  |  Ajmer Breaking News: गुड़ामालानी में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सुनी मन की बात | 

अंदाजे बयां: बड़ी मुश्किल से जो दरिया हुआ था, बदन में उसके सहरा चीख़ता था

Post Views 371

April 5, 2021

मैं अपनी जेब से ही गिर गया था, मुझे रूमाल मेरा ढूँढता था।

बड़ी मुश्किल से जो दरिया हुआ था,
बदन में उसके सहरा चीख़ता था।
मैं अपनी जेब से ही गिर गया था,
मुझे रूमाल मेरा ढूँढता था।
पराई आग शायद जल रही थी,
उसी पर हाथ मैंने रख दिया था।
मेरी पहचान उससे डर रही थी,
अजब से डर जो मुझमें छिप गया था।
ढहा जाता था मेरे टूटने पर,
मेरा घर मुझको कितना चाहता था।
खुली छत पर भी था बेचैन कितना,
न जाने कौन मुझको सोचता था।
कहाँ जाकर हुआ था गुम न जानें,
मुझे मेरे ही साया खोजता था।
     सुरेन्द्र चतुर्वेदी


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved