For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 117630124
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर के गंज थाना अंतर्गत में राधा विहार कॉलोनी में सोमवार देर रात चोरों ने एक बंद पड़े घर में ताले तोड़कर लगभग डेढ़ लाख की नकदी सहित सोने चांदी के जेवरात चोरी |  Ajmer Breaking News: शातिर ठगों ने जिला कलेक्टर को भी नहीं बक्शा, कलेक्टर की डीपी लगाकर बनाया फेक अकाउंट, अधिकारियों से विदेशी नंबर के जरिए मैसेज भेज कर मांगा पैसा, |  Ajmer Breaking News: अजमेर में अमृता हाट की धूम 16 से, आएंगे देशी उत्पाद, होंगे आकर्षक आयोजन, 16 से 22 फरवरी तक वैशाली नगर अरबन हाट में होगा आयोजन |  Ajmer Breaking News: अजमेर संभागीय स्तरीय अमृता हाट के पोस्टर का उप मुख्यमंत्री ने किया विमोचन |  Ajmer Breaking News: जिला कलक्टर की अध्यक्षता में विभागीय समन्वय  बैठक आयोजित,संपर्क पोर्टल, मुख्यमंत्री जनसुनवाई एवं फ्लैगशिप योजनाओं की प्रगति की हुई समीक्षा |  Ajmer Breaking News: विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने सड़क विकास कार्यों का किया शुभारंभ, शहर का विकास अब धरातल पर दिखाई दे रहा है- श्री देवनानी |  Ajmer Breaking News: अवैध खनन अभियान को लेकर जिला कलक्टर की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित |  Ajmer Breaking News: रेल बजट 2026-27, राजस्थान को रिकार्ड 10228 करोड़ रूपये के बजट का आवंटन |  Ajmer Breaking News: उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने दी केन्द्रीय बजट के सम्बन्ध में जानकारी विकसित भारत-2047 के लिए दिशा देने वाला है बजट-उपमुख्यमंत्री,आम नागरिकों की उम्मीदें होंगी पूरी |  Ajmer Breaking News: वेतन आयोग, कैडर रिस्ट्रक्चरिंग, पेंशन और आउटसोर्सिंग पर हो शीघ्र कार्यवाही | 

अंदाजे बयां: बड़ी मुश्किल से जो दरिया हुआ था, बदन में उसके सहरा चीख़ता था

Post Views 91

April 5, 2021

मैं अपनी जेब से ही गिर गया था, मुझे रूमाल मेरा ढूँढता था।

बड़ी मुश्किल से जो दरिया हुआ था,
बदन में उसके सहरा चीख़ता था।
मैं अपनी जेब से ही गिर गया था,
मुझे रूमाल मेरा ढूँढता था।
पराई आग शायद जल रही थी,
उसी पर हाथ मैंने रख दिया था।
मेरी पहचान उससे डर रही थी,
अजब से डर जो मुझमें छिप गया था।
ढहा जाता था मेरे टूटने पर,
मेरा घर मुझको कितना चाहता था।
खुली छत पर भी था बेचैन कितना,
न जाने कौन मुझको सोचता था।
कहाँ जाकर हुआ था गुम न जानें,
मुझे मेरे ही साया खोजता था।
     सुरेन्द्र चतुर्वेदी


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved