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March 22, 2021
जब अंदर का डर बोलेगा,
क़ातिल से ख़ंजर बोलेगा।
तन्हा जब हो जाऊँगा मैं,
मुझसे मेरा घर बोलेगा।
क्या क्या है शीशे के दिल में,
देखना तुम पत्थर बोलेगा।
ख़ून का रिश्ता टकराने दो,
दीवारों से सर बोलेगा।
जब भी मुझमें झांकोगे तुम,
नूरानी मंज़र बोलेगा।
याद करेगा कोई किसी को,
अल्लाह हो अक़बर बोलेगा।
मेरी ग़ज़लें जान चुकी हैं,
क्या क्या तू सुनकर बोलेगा।
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
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