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March 16, 2021
साँसों की हवा दे के मुझे मार दीजिए,
जीने की दुआ दे के मुझे मार दीजिए।
उम्मीद अब वफ़ा की मुझे आपसे नहीं,
मेरी ही वफ़ा दे के मुझे मार दीजिए।
कर ही लिया है फ़ैसला जब आपने हज़ूर,
कोई भी सज़ा दे के मुझे मार दीजिए।
क़ुरआन अब न दीजिए रस्तों के हाथ में,
मेरा ही पता दे के मुझे मार दीजिए।
अमृत चखा था मैंने कभी भूल जाइए,
ज़हरीला नश्शा दे के मुझे मार दीजिए।
जितना भी कर सका मैं यक़ी कर लिया है अब,
कोई भी दगा दे के मुझे मार दीजिए।
लगता है बेअसर हैं सभी तरह के इलाज,
मिट्टी की दवा दे के मुझे मार दीजिए।
सुरेन्द्र चतुर्वेदी
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