For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 122962309
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: पर्यटक स्थल के रूप में विकसित होगा तारागढ़ किला एवं वरूण सागर |  Ajmer Breaking News: त्रिपुरा के राज्यपाल इन्द्रसेना रेड्डी नल्लु मंगलवार को पुष्कर के प्रवास पर रहे। इस दौरान उन्होंने सपत्नीक जगत पिता ब्रह्मा जी के मंदिर पर दर्शन कर विधि विधान के साथ पूजा की। |  Ajmer Breaking News: त्रिपुरा के राज्यपाल श्री इन्द्रसेना रेड्डी नल्लु ने किया साई मंदिर के सोम द्वार का शुभारम्भ |  Ajmer Breaking News: जिले के राजकीय आयुर्वेद औषधालय लवेरा में पंचकर्म चिकित्सा सुविधा के लिए नव निर्मित भवन का लोकार्पण मंगलवार को विधिवत पूजा-अर्चना एवं वैदिक मंत्रोच्चार के साथ किया गया। |  Ajmer Breaking News: महावीर जयंती के उपलक्ष्य में पशुपालन विभाग द्वारा शहर के विभिन्न स्थानों पर पशु चिकित्सा शिविरों का आयोजन कर पशुओं को उपचार एवं टीकाकरण सेवाएं प्रदान की गईं। |  Ajmer Breaking News: अजमेर मंडल पर ऑपरेशन मेरी सहेली के तहत 88,291 महिला यात्रियों की समस्याओं का हुआ त्वरित समाधान |  Ajmer Breaking News: टीआरडी/इलेक्ट्रीकल बनी डीआरएम क्रिकेट कप 2025-26 की विजेता, डीआरएम राजू भूतड़ा ने किया फ्लड लाइट व क्रिकेट प्रैक्टिस नेट का उद्घाटन |  Ajmer Breaking News: जिले में घरेलु गैस सिलेण्डरों के अवैध उपयोग पर कार्यवाही करते हुए सोमवार को 10 घरेलु गैस सिलेण्डर जब्त किए गए।  |  Ajmer Breaking News: खरीफ-2026 उर्वरक आपूर्ति, वितरण एवं निगरानी को लेकर जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित |  Ajmer Breaking News: जिला कलक्टर लोक बंधु की अध्यक्षता में सोमवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय विभागीय समन्वय बैठक आयोजित की गई | 

विशेष: धनतेरस की कथा, महत्व एवम पूजन विधि

Post Views 41

October 30, 2020

इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धन्वंतरि की पूजा का है बड़ा महत्त्व

धनतेरस 


सुख-समृद्धि, यश और वैभव का पर्व माना जाता है। इस दिन धन के देवता कुबेर और आयुर्वेद के देव धन्वंतरि की पूजा का बड़ा महत्त्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि को मनाए जाने वाले इस महापर्व के बारे में स्कन्द पुराण में लिखा है कि इसी दिन देवताओं के वैद्य धन्वंतरि अमृत कलश सहित सागर मंथन से प्रकट हुए थे, जिस कारण इस दिन धनतेरस के साथ-साथ धन्वंतरि जयंती भी मनाई जाती है।


धनतेरस के दिन खरीददारी 


मुख्य रूप से नए बर्तन या सोना-चांदी खरीदने की परंपरा है।  चूंकि जन्म के समय धन्वंतरि जी के हाथों में अमृत का कलश था, इसलिए इस दिन बर्तन खरीदना अति शुभ होता है। विशेषकर पीतल के बर्तन खरीदना बेहद शुभ माना जाता है।


धनतेरस कथा


एक बार यमराज ने अपने दूतों से प्रश्न किया- क्या प्राणियों के प्राण हरते समय तुम्हें किसी पर दया भी आती है? यमदूत संकोच में पड़कर बोले- नहीं महाराज! हम तो आपकी आज्ञा का पालन करते हैं। हमें दया-भाव से क्या प्रयोजन?


यमराज ने सोचा कि शायद ये संकोचवश ऐसा कह रहे हैं। अतः उन्हें निर्भय करते हुए वे बोले- संकोच मत करो। यदि कभी कहीं तुम्हारा मन पसीजा हो तो निडर होकर कहो। तब यमदूतों ने डरते-डरते बताया- सचमुच! एक ऐसी ही घटना घटी थी महाराज, जब हमारा हृदय काँप उठा था।


ऐसी क्या घटना घटी थी? -उत्सुकतावश यमराज ने पूछा। दूतों ने कहा- महाराज! हंस नाम का राजा एक दिन शिकार के लिए गया। वह जंगल में अपने साथियों से बिछड़कर भटक गया और दूसरे राज्य की सीमा में चला गया। फिर वहाँ के राजा हेमा ने राजा हंस का बड़ा सत्कार किया।


उसी दिन राजा हेमा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म दिया था। ज्योतिषियों ने नक्षत्र गणना करके बताया कि यह बालक विवाह के चार दिन बाद मर जाएगा। राजा के आदेश से उस बालक को यमुना के तट पर एक गुहा में ब्रह्मचारी के रूप में रखा गया। उस तक स्त्रियों की छाया भी न पहुँचने दी गई।


किन्तु विधि का विधान तो अडिग होता है। समय बीतता रहा। संयोग से एक दिन राजा हंस की युवा बेटी यमुना के तट पर निकल गई और उसने उस ब्रह्मचारी बालक से गंधर्व विवाह कर लिया।  चौथा दिन आया और राजकुँवर मृत्यु को प्राप्त हुआ। उस नवपरिणीता का करुण विलाप सुनकर हमारा हृदय काँप गया। ऐसी सुंदर जोड़ी हमने कभी नहीं देखी थी।  वे कामदेव तथा रति से भी कम नहीं थे। उस युवक को कालग्रस्त करते समय हमारे भी अश्रु नहीं थम पाए थे।


मराज ने द्रवित होकर कहा- क्या किया जाए? विधि के विधान की मर्यादा हेतु हमें ऐसा अप्रिय कार्य करना पड़ा। महाराज! -एकाएक एक दूत ने पूछा- क्या अकालमृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है?  यमराज नेअकाल मृत्यु से बचने का उपाय बताते हुए कहा- धनतेरस के पूजन एवं दीपदान को विधिपूर्वक करने से अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है। जिस घर में यह पूजन होता है, वहाँ अकाल मृत्यु का भयभी नहीं फटकता।


इसी घटना से धनतेरस के दिन धन्वंतरि पूजन सहित दीपदान की प्रथा का प्रचलन शुरू हुआ।   इस दिन को यमदीप दान भी कहा जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज के कोप से सुरक्षा मिलती है और पूरा परिवार स्वस्थ रहता है। इस दिन घरों को साफ-सफाई, लीप-पोत कर स्वच्छ और पवित्र बनाया जाता है और फिर शाम के समय रंगोली बना दीपक जलाकर धन और वैभव की देवी मां लक्ष्मी का आवाहन किया जाता है।



© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved