For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 144572777
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: सनातन धर्म रक्षा संघ ने अमरनाथ यात्रा के पहले जत्थे को भगवा शॉल और माला पहनाकर किया रवाना |  Ajmer Breaking News: शहरी सेवा शिविर में त्वरित समाधान से हर चेहरे पर खुशी, बढ़ता जनविश्वास बना सफलता की पहचान,शहरी सेवा शिविर-2026 : आमजन को त्वरित राहत, प्रशासन के प्रति बढ़ा विश्वास |  Ajmer Breaking News: गनाहेड़ा में आरसीसी निर्माण कार्य के दौरान हाई टेंशन लाइन की चपेट में आने से अजमेर के रहने वाले मजदूर युवक की मौत, |  Ajmer Breaking News: आदर्श नगर से लेकर विराट नगर तक नाले की बाउंड्री ऊंची करवाने को लेकर दक्षिण विधानसभा प्रत्याशी द्रोपदी कोली ने क्षेत्रवासियों के साथ जिला कलेक्टर को सोपा ज्ञापन, |  Ajmer Breaking News: जगन गुर्जर हत्याकांड पर गरमाया माहौल, परिजनों के धरने के बाद लिखित सहमति; वीडियोग्राफी में होगा पोस्टमॉर्टम, |  Ajmer Breaking News: अजमेर हाई सिक्योरिटी जेल में डकैत जगन गुर्जर की गला घोंटकर हत्या, साथी बंदी विष्णु ने कबूला जुर्म |  Ajmer Breaking News: जगन गुर्जर की जेल में हत्या पर बेनीवाल ने उठाए सवाल, सीबीआई जांच की मांग |  Ajmer Breaking News: प्रेम विवाह के बाद जान का खतरा, नवविवाहित दंपती ने एसपी से मांगी सुरक्षा |  Ajmer Breaking News: क्लॉक टावर थाना अंतर्गत आशागंज में एक गोदाम से डीएसटी और क्लॉक टावर थाना पुलिस ने पूमा कंपनी का नकली माल किया जप्त, |  Ajmer Breaking News: शादी का झांसा देकर युवती से दुष्कर्म, SC-ST एक्ट सहित दुष्कर्म की धाराओ में मुकदमा दर्ज, सीओ साउथ कर रहे हैं जांच | 

विशेष: माता अहोई अष्ठमी की कथा और पूजन विधि

Post Views 71

October 30, 2020

यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है

अहोई अष्टमी 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दीवाली से 8 दिन पहले अहोई अष्टमी मनाई जाती है। यह करवा चौथ त्यौहार के समान ही काफी अनुशासित व्रत के साथ मनाई जाती है, लेकिन यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है। माताएँ, माँ अहोई (माँ दुर्गा का रूप) की पूजा करतीं हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए उपवास करतीं हैं।

अहोई अष्टमी के अनुष्ठान


अहोई आठें के दिन, माँ अहोई की पूजा की जाती है और सुबह-सुबह पूजा की तैयारी के लिए सूर्योदय से पहले स्नान करते है। अहोई माता की लाल स्याही वाली एक तस्वीर जिसमें सभी सात बेटों और चंद्रमा / सूर्य को चित्रित किया गया हो, को घर की दीवार पर लगाते हैं, या गेरु से भी यह चित्र बना सकते हैं। मिट्टी से बने पानी के वर्तन को विग्रह के पास रखते हैं।
 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, माताएँ अहोई माता की चाँदी से बनी माला में प्रतिवर्ष 2 मनके (मोती) पिरोती हैं, इस प्रकार महिलाएँ अपनी संतान की आयु अहोई माता के अनुरूप परिभाषित करतीं है।
 
अहोई आठें का व्रत मुख्य रूप से घर में बच्चे के कल्याण तथा लंबी उम्र के लिए किया जाता है। एक माँ पूरे दिन निर्जला* व्रत करती है। शाम को माता अहोई को फल और मीठे व्यंजन भेंट कर उनकी पूजा-अर्चना करतीं हैं। जब आसमान में एक तारा दिखाई दे, तो करवे के शुद्ध पानी को उसपर अर्पित करतीं हैं।
 
आसमान में एक तारा दिखते ही, माताएँ अपने बच्चे के हाथ से पानी पीकर व्रत खत्म करतीं हैं। यह त्यौहार माँ और बच्चे के बीच के प्यार और स्नेह को परिभाषित करता है।
 
अहोई अष्टमी कथा

 प्राचीन काल में किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात लड़के थे। दीपावली से पहले साहूकार की स्त्री घर की लीपापोती हेतु मिट्टी लेने खदान में गई और कुदाल से मिट्टी खोदने लगी।
दैवयोग से उसी जगह एक सेह की मांद थी। सहसा उस स्त्री के हाथ से कुदाल बच्चे को लग गई जिससे सेह का बच्चा तत्काल मर गया। अपने हाथ से हुई हत्या को लेकर साहूकार की पत्नी को बहुत दुख हुआ परन्तु अब क्या हो सकता था! वह शोकाकुल पश्चाताप करती हुई अपने घर लौट आई।
कुछ दिनों बाद उसका बेटे का निधन हो गया। फिर अकस्मात् दूसरा, तीसरा और इस प्रकार वर्ष भर में उसके सभी बेटे मर गए। महिला अत्यंत व्यथित रहने लगी। एक दिन उसने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को विलाप करते हुए बताया कि उसने जानबूझ कर कभी कोई पाप नहीं किया। हाँ, एक बार खदान में मिट्टी खोदते हुए अंजाने में उसके हाथों एक सेह के बच्चे की हत्या अवश्य हुई है और तत्पश्चात उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई।
यह सुनकर पास-पड़ोस की वृद्ध औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा देते हुए कहा कि यह बात बताकर तुमने जो पश्चाताप किया है उससे तुम्हारा आधा पाप नष्ट हो गया है। तुम उसी अष्टमी को भगवती माता की शरण लेकर सेह और सेह के बच्चों का चित्र बनाकर उनकी अराधना करो और क्षमा-याचना करो। ईश्वर की कृपा से तुम्हारा पाप धुल जाएगा। 
साहूकार की पत्नी ने वृद्ध महिलाओं की बात मानकर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उपवास व पूजा-याचना की। वह हर वर्ष नियमित रूप से ऐसा करने लगी। तत्पश्चात् उसे सात पुत्र रत्नों की प्राप्ती हुई। तभी से अहोई व्रत की परम्परा प्रचलित हो गई।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved