For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 157078922
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर निकाय चुनाव नामांकन को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी, कई मार्गों पर रहेगा डायवर्जन |  Ajmer Breaking News: मसानिया भैरव धाम राजगढ़ पर नशा मुक्त युवा विकसित भारत संकल्प अभियान,पढ़ेंगे लिखेंगे कब, नशे का त्याग करेंगे तब - चम्पालाल महाराज |  Ajmer Breaking News: रिश्तेदार ने ही उड़ाए 50 हजार रुपये, OTP हासिल कर दूसरे खाते में किये ट्रांसफर; आरोपी गिरफ्तार |  Ajmer Breaking News: सिविल लाइन क्षेत्र में बढ़ती चोरियों से दुकानदारों में रोष, थाना पहुंचकर सौंपा ज्ञापन, |  Ajmer Breaking News: श्री श्याम सेवक कल्याण संघ की विशाल भजन संध्या,बेंगलुरु से लायें फूलों से सजा बाबा श्याम का दरबार |  Ajmer Breaking News: जिला स्पेशल टीम अजमेर व पुलिस थाना अलवर गेट की सयुक्त बडी कार्यवाही वाटर सप्लायर्स की आड में चल रहे जुआ-सट्टे का पर्दाफाश। |  Ajmer Breaking News: अजमेर शरीफ दरगाह में हज़रत ख्वाजा कुतबुद्दीन बख्तियार काकी रहमतुल्लाह अलैही और हज़रत सैय्यद अलाउद्दीन साबिर पिया कलियरी रहमतुल्लाह अलैही के उर्स की तक़रीब अदा की गई। |  Ajmer Breaking News: अजमेर नगर निगम चुनाव में इस बार निर्दलीय प्रत्याशियों ने भी अपनी पूरी ताकत झोंक दी है! |  Ajmer Breaking News: अजमेर में नगर निगम चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाले ज्ञान सारस्वत ने नगर निकाय चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी है। |  Ajmer Breaking News: अजमेर नगर निकाय चुनाव के काउंटडाउन के बीच उम्मीदवारों ने अपने नामांकन दाखिल किए जिला निर्वाचन कार्यालय पर आवेदन लेने और आवेदन फॉर्म भरकर जमा करने वालों की भीड़ लगी रही | 

विशेष: माता अहोई अष्ठमी की कथा और पूजन विधि

Post Views 91

October 30, 2020

यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है

अहोई अष्टमी 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दीवाली से 8 दिन पहले अहोई अष्टमी मनाई जाती है। यह करवा चौथ त्यौहार के समान ही काफी अनुशासित व्रत के साथ मनाई जाती है, लेकिन यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है। माताएँ, माँ अहोई (माँ दुर्गा का रूप) की पूजा करतीं हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए उपवास करतीं हैं।

अहोई अष्टमी के अनुष्ठान


अहोई आठें के दिन, माँ अहोई की पूजा की जाती है और सुबह-सुबह पूजा की तैयारी के लिए सूर्योदय से पहले स्नान करते है। अहोई माता की लाल स्याही वाली एक तस्वीर जिसमें सभी सात बेटों और चंद्रमा / सूर्य को चित्रित किया गया हो, को घर की दीवार पर लगाते हैं, या गेरु से भी यह चित्र बना सकते हैं। मिट्टी से बने पानी के वर्तन को विग्रह के पास रखते हैं।
 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, माताएँ अहोई माता की चाँदी से बनी माला में प्रतिवर्ष 2 मनके (मोती) पिरोती हैं, इस प्रकार महिलाएँ अपनी संतान की आयु अहोई माता के अनुरूप परिभाषित करतीं है।
 
अहोई आठें का व्रत मुख्य रूप से घर में बच्चे के कल्याण तथा लंबी उम्र के लिए किया जाता है। एक माँ पूरे दिन निर्जला* व्रत करती है। शाम को माता अहोई को फल और मीठे व्यंजन भेंट कर उनकी पूजा-अर्चना करतीं हैं। जब आसमान में एक तारा दिखाई दे, तो करवे के शुद्ध पानी को उसपर अर्पित करतीं हैं।
 
आसमान में एक तारा दिखते ही, माताएँ अपने बच्चे के हाथ से पानी पीकर व्रत खत्म करतीं हैं। यह त्यौहार माँ और बच्चे के बीच के प्यार और स्नेह को परिभाषित करता है।
 
अहोई अष्टमी कथा

 प्राचीन काल में किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात लड़के थे। दीपावली से पहले साहूकार की स्त्री घर की लीपापोती हेतु मिट्टी लेने खदान में गई और कुदाल से मिट्टी खोदने लगी।
दैवयोग से उसी जगह एक सेह की मांद थी। सहसा उस स्त्री के हाथ से कुदाल बच्चे को लग गई जिससे सेह का बच्चा तत्काल मर गया। अपने हाथ से हुई हत्या को लेकर साहूकार की पत्नी को बहुत दुख हुआ परन्तु अब क्या हो सकता था! वह शोकाकुल पश्चाताप करती हुई अपने घर लौट आई।
कुछ दिनों बाद उसका बेटे का निधन हो गया। फिर अकस्मात् दूसरा, तीसरा और इस प्रकार वर्ष भर में उसके सभी बेटे मर गए। महिला अत्यंत व्यथित रहने लगी। एक दिन उसने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को विलाप करते हुए बताया कि उसने जानबूझ कर कभी कोई पाप नहीं किया। हाँ, एक बार खदान में मिट्टी खोदते हुए अंजाने में उसके हाथों एक सेह के बच्चे की हत्या अवश्य हुई है और तत्पश्चात उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई।
यह सुनकर पास-पड़ोस की वृद्ध औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा देते हुए कहा कि यह बात बताकर तुमने जो पश्चाताप किया है उससे तुम्हारा आधा पाप नष्ट हो गया है। तुम उसी अष्टमी को भगवती माता की शरण लेकर सेह और सेह के बच्चों का चित्र बनाकर उनकी अराधना करो और क्षमा-याचना करो। ईश्वर की कृपा से तुम्हारा पाप धुल जाएगा। 
साहूकार की पत्नी ने वृद्ध महिलाओं की बात मानकर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उपवास व पूजा-याचना की। वह हर वर्ष नियमित रूप से ऐसा करने लगी। तत्पश्चात् उसे सात पुत्र रत्नों की प्राप्ती हुई। तभी से अहोई व्रत की परम्परा प्रचलित हो गई।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved