For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 122528963
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी नेbअजमेर एवं तीर्थराज पुष्कर में आयोजित धार्मिक आयोजनों में सहभागिता करते हुए आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त की तथा प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। |  Ajmer Breaking News: धर्म रक्षा स्मृति भवन से सेवा, संस्कार और स्वावलंबन को मिलेगा नया आयाम - श्री देवनानी |  Ajmer Breaking News: 28 मार्च 2026 को सायं 5:30 बजे सोफिया कॉलेज (स्वायत्तशासी), अजमेर में वार्षिक उत्सव व पारितोषिक वितरण समारोह सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ संपन्न हुआ |  Ajmer Breaking News: आपातकालीन परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने की तैयारियों को परखने हेतु शनिवार को गेल इंडिया लिमिटेड नसीराबाद स्टेशन पर केमिकल लीकेज मॉकड्रिल का सफल आयोजन किया गया। |  Ajmer Breaking News: 20 करोड़ की लागत से अजमेर में बनेगा बालिका सैनिक स्कूल जल्द जारी होगा वर्क आर्डर, विधानसभा अध्यक्ष ने शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक |  Ajmer Breaking News: विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विविध धार्मिक आयोजनों में की सहभागिता |  Ajmer Breaking News: माखुपुरा स्थित राजकीय महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में छात्राओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इन्नर व्हील क्लब अजमेर चेरेटीबल ट्रस्ट द्वारा एक वाटर कूलर भेंट किया गया। |  Ajmer Breaking News: एलपीजी प्रबंधन को लेकर सख्त निर्देश, कॉमर्शियल गैस आपूर्ति में 10 प्रतिशत वृद्धि |  Ajmer Breaking News: जिले में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने एवं कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए रसद विभाग द्वारा सघन अभियान चलाया जा रहा है। |  Ajmer Breaking News:  धर्म रक्षा स्मृति भवन का हुआ भव्य लोकार्पण, धर्म रक्षा स्मृति भवन से सेवा, संस्कार और स्वावलंबन को मिलेगा नया आयाम - श्री देवनानी | 

विशेष: माता अहोई अष्ठमी की कथा और पूजन विधि

Post Views 71

October 30, 2020

यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है

अहोई अष्टमी 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दीवाली से 8 दिन पहले अहोई अष्टमी मनाई जाती है। यह करवा चौथ त्यौहार के समान ही काफी अनुशासित व्रत के साथ मनाई जाती है, लेकिन यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है। माताएँ, माँ अहोई (माँ दुर्गा का रूप) की पूजा करतीं हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए उपवास करतीं हैं।

अहोई अष्टमी के अनुष्ठान


अहोई आठें के दिन, माँ अहोई की पूजा की जाती है और सुबह-सुबह पूजा की तैयारी के लिए सूर्योदय से पहले स्नान करते है। अहोई माता की लाल स्याही वाली एक तस्वीर जिसमें सभी सात बेटों और चंद्रमा / सूर्य को चित्रित किया गया हो, को घर की दीवार पर लगाते हैं, या गेरु से भी यह चित्र बना सकते हैं। मिट्टी से बने पानी के वर्तन को विग्रह के पास रखते हैं।
 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, माताएँ अहोई माता की चाँदी से बनी माला में प्रतिवर्ष 2 मनके (मोती) पिरोती हैं, इस प्रकार महिलाएँ अपनी संतान की आयु अहोई माता के अनुरूप परिभाषित करतीं है।
 
अहोई आठें का व्रत मुख्य रूप से घर में बच्चे के कल्याण तथा लंबी उम्र के लिए किया जाता है। एक माँ पूरे दिन निर्जला* व्रत करती है। शाम को माता अहोई को फल और मीठे व्यंजन भेंट कर उनकी पूजा-अर्चना करतीं हैं। जब आसमान में एक तारा दिखाई दे, तो करवे के शुद्ध पानी को उसपर अर्पित करतीं हैं।
 
आसमान में एक तारा दिखते ही, माताएँ अपने बच्चे के हाथ से पानी पीकर व्रत खत्म करतीं हैं। यह त्यौहार माँ और बच्चे के बीच के प्यार और स्नेह को परिभाषित करता है।
 
अहोई अष्टमी कथा

 प्राचीन काल में किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात लड़के थे। दीपावली से पहले साहूकार की स्त्री घर की लीपापोती हेतु मिट्टी लेने खदान में गई और कुदाल से मिट्टी खोदने लगी।
दैवयोग से उसी जगह एक सेह की मांद थी। सहसा उस स्त्री के हाथ से कुदाल बच्चे को लग गई जिससे सेह का बच्चा तत्काल मर गया। अपने हाथ से हुई हत्या को लेकर साहूकार की पत्नी को बहुत दुख हुआ परन्तु अब क्या हो सकता था! वह शोकाकुल पश्चाताप करती हुई अपने घर लौट आई।
कुछ दिनों बाद उसका बेटे का निधन हो गया। फिर अकस्मात् दूसरा, तीसरा और इस प्रकार वर्ष भर में उसके सभी बेटे मर गए। महिला अत्यंत व्यथित रहने लगी। एक दिन उसने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को विलाप करते हुए बताया कि उसने जानबूझ कर कभी कोई पाप नहीं किया। हाँ, एक बार खदान में मिट्टी खोदते हुए अंजाने में उसके हाथों एक सेह के बच्चे की हत्या अवश्य हुई है और तत्पश्चात उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई।
यह सुनकर पास-पड़ोस की वृद्ध औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा देते हुए कहा कि यह बात बताकर तुमने जो पश्चाताप किया है उससे तुम्हारा आधा पाप नष्ट हो गया है। तुम उसी अष्टमी को भगवती माता की शरण लेकर सेह और सेह के बच्चों का चित्र बनाकर उनकी अराधना करो और क्षमा-याचना करो। ईश्वर की कृपा से तुम्हारा पाप धुल जाएगा। 
साहूकार की पत्नी ने वृद्ध महिलाओं की बात मानकर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उपवास व पूजा-याचना की। वह हर वर्ष नियमित रूप से ऐसा करने लगी। तत्पश्चात् उसे सात पुत्र रत्नों की प्राप्ती हुई। तभी से अहोई व्रत की परम्परा प्रचलित हो गई।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved