For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 115943174
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: भागीरथ चौधरी के प्रयासों से किशनगढ़ में शुरू हुआ पोरबंदर–मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस का प्रायोगिक ठहराव |  Ajmer Breaking News: सर्किट हाउस से कांग्रेस अजमेर जिला प्रभारी चेतन डूडी ने किया मनरेगा बचाओ संग्राम अभियान का शुभारंभ, |  Ajmer Breaking News: अजमेर के रामगंज थाना अंतर्गत भगवान गंज में लुटेरी दुल्हन की करतूत का मामला सामने आया है। शादी के चंद दिनों बाद ही नई नवेली दुल्हन ससुराल से सोने चांदी के जेवरात लेकर अचानक फरार हो गई। |  Ajmer Breaking News: सुभाष नगर समपार फाटक को बंद कर बाउंड्री वाल खड़ी कर दिए जाने से क्षेत्र वासियों में आक्रोश, रेल और जिला प्रशासन से पैदल निकलने वाले क्षेत्र वासियों को रास्ता देने की मांग, नारेबाजी करते हुए क्या प्रदर्शन  |  Ajmer Breaking News: अलवर गेट थाना पुलिस की तत्परता ओर राहगीर की ईमानदारी, दरगाह जियारत को आए जायरीन का खोया बैग सुरक्षित लौटाया,बैग में जरूरी सामान सहित थे 72 हज़ार रुपए  |  Ajmer Breaking News: 14 जनवरी को होने वाले भव्य सुन्दरकाण्ड पाठ का भूमि पूजन एवं झण्डारोहण सम्पन्न:- श्रीमती भदेल |  Ajmer Breaking News: अखिल भारतीय जांगिड़ ब्राह्मण महासभा महिला प्रकोष्ठ नई दिल्ली की नवगठित कार्यकारिणी का शपथ ग्रहण समारोह 11 जनवरी 2026 को |  Ajmer Breaking News: सर्किट हाउस अजमेर में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने की जनसुनवाई, आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के दिए निर्देश |  Ajmer Breaking News: अजमेर में पारम्परिक जल संरक्षण की दिशा में नई पहल, मालूसर बावड़ी, वार्ड संख्या 18 से पायलट परियोजना - जल स्त्रोतों का सरंक्षण एवं पुनर्जीवन कार्य की शुरुआत |  Ajmer Breaking News:  राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ,वर्ष 2026 की परीक्षाओं के सफल, पारदर्शी एवं सूचितापूर्ण आयोजन के लिए बैठक आयोजित  | 

विशेष: माता अहोई अष्ठमी की कथा और पूजन विधि

Post Views 11

October 30, 2020

यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है

अहोई अष्टमी 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दीवाली से 8 दिन पहले अहोई अष्टमी मनाई जाती है। यह करवा चौथ त्यौहार के समान ही काफी अनुशासित व्रत के साथ मनाई जाती है, लेकिन यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है। माताएँ, माँ अहोई (माँ दुर्गा का रूप) की पूजा करतीं हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए उपवास करतीं हैं।

अहोई अष्टमी के अनुष्ठान


अहोई आठें के दिन, माँ अहोई की पूजा की जाती है और सुबह-सुबह पूजा की तैयारी के लिए सूर्योदय से पहले स्नान करते है। अहोई माता की लाल स्याही वाली एक तस्वीर जिसमें सभी सात बेटों और चंद्रमा / सूर्य को चित्रित किया गया हो, को घर की दीवार पर लगाते हैं, या गेरु से भी यह चित्र बना सकते हैं। मिट्टी से बने पानी के वर्तन को विग्रह के पास रखते हैं।
 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, माताएँ अहोई माता की चाँदी से बनी माला में प्रतिवर्ष 2 मनके (मोती) पिरोती हैं, इस प्रकार महिलाएँ अपनी संतान की आयु अहोई माता के अनुरूप परिभाषित करतीं है।
 
अहोई आठें का व्रत मुख्य रूप से घर में बच्चे के कल्याण तथा लंबी उम्र के लिए किया जाता है। एक माँ पूरे दिन निर्जला* व्रत करती है। शाम को माता अहोई को फल और मीठे व्यंजन भेंट कर उनकी पूजा-अर्चना करतीं हैं। जब आसमान में एक तारा दिखाई दे, तो करवे के शुद्ध पानी को उसपर अर्पित करतीं हैं।
 
आसमान में एक तारा दिखते ही, माताएँ अपने बच्चे के हाथ से पानी पीकर व्रत खत्म करतीं हैं। यह त्यौहार माँ और बच्चे के बीच के प्यार और स्नेह को परिभाषित करता है।
 
अहोई अष्टमी कथा

 प्राचीन काल में किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात लड़के थे। दीपावली से पहले साहूकार की स्त्री घर की लीपापोती हेतु मिट्टी लेने खदान में गई और कुदाल से मिट्टी खोदने लगी।
दैवयोग से उसी जगह एक सेह की मांद थी। सहसा उस स्त्री के हाथ से कुदाल बच्चे को लग गई जिससे सेह का बच्चा तत्काल मर गया। अपने हाथ से हुई हत्या को लेकर साहूकार की पत्नी को बहुत दुख हुआ परन्तु अब क्या हो सकता था! वह शोकाकुल पश्चाताप करती हुई अपने घर लौट आई।
कुछ दिनों बाद उसका बेटे का निधन हो गया। फिर अकस्मात् दूसरा, तीसरा और इस प्रकार वर्ष भर में उसके सभी बेटे मर गए। महिला अत्यंत व्यथित रहने लगी। एक दिन उसने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को विलाप करते हुए बताया कि उसने जानबूझ कर कभी कोई पाप नहीं किया। हाँ, एक बार खदान में मिट्टी खोदते हुए अंजाने में उसके हाथों एक सेह के बच्चे की हत्या अवश्य हुई है और तत्पश्चात उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई।
यह सुनकर पास-पड़ोस की वृद्ध औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा देते हुए कहा कि यह बात बताकर तुमने जो पश्चाताप किया है उससे तुम्हारा आधा पाप नष्ट हो गया है। तुम उसी अष्टमी को भगवती माता की शरण लेकर सेह और सेह के बच्चों का चित्र बनाकर उनकी अराधना करो और क्षमा-याचना करो। ईश्वर की कृपा से तुम्हारा पाप धुल जाएगा। 
साहूकार की पत्नी ने वृद्ध महिलाओं की बात मानकर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उपवास व पूजा-याचना की। वह हर वर्ष नियमित रूप से ऐसा करने लगी। तत्पश्चात् उसे सात पुत्र रत्नों की प्राप्ती हुई। तभी से अहोई व्रत की परम्परा प्रचलित हो गई।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved