For News (24x7) : 9829070307
RNI NO : RAJBIL/2013/50688
Visitors - 118113554
Horizon Hind facebook Horizon Hind Twitter Horizon Hind Youtube Horizon Hind Instagram Horizon Hind Linkedin
Breaking News
Ajmer Breaking News: अजमेर देहात जिला महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष श्रीमती गीता चौधरी की अध्यक्षता में जिला महिला कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक आयोजित की गई। |  Ajmer Breaking News: मनरेगा बचाओ संग्राम: मंडल स्तर पर कांग्रेस का जोरदार विरोध प्रदर्शन |  Ajmer Breaking News: अजमेर दरगाह बाजार मधुशाह गली में विद्युत विभाग की अंडरग्राउंड लाइन में स्पार्किंग के साथ अचानक आग लग गई। |  Ajmer Breaking News: अजमेर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर जीआरपी और आफ की संयुक्त चेकिंग के दौरान 186 ग्राम अफीम और 12.376 किलोग्राम डोडा-चूरा के साथ एक युवक गिरफ्तार, |  Ajmer Breaking News: रविवार को आम आदमी पार्टी अजमेर की माइनॉरिटी विंग द्वारा प्रदेश व जिले के पदाधिकारियों के साथ मीडिया के साथ संवाद |  Ajmer Breaking News: अजमेर शहर सहित आसपास के क्षेत्र में दिन का तापमान बढ़ने के साथ वन्य जीवों ने अपना स्थान छोड़ना शुरू कर दिया है। इसी के चलते आज अजमेर के अलग-अलग क्षेत्र से दो सांपों का रेस्क्यू किया गया। |  Ajmer Breaking News: एक पहल सेवा की ओर संस्था द्वारा विश्व विख्यात परम पूजनीय जया किशोरी जी का शाल औऱ मोतियों की माला पहनाकर एवं खाटू श्याम बाबा की तस्वीर भेंट कर स्वागत और अभिनंदन किया गया |  Ajmer Breaking News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर.एस.एस.) संगठन की स्थापना के सौ वर्ष सम्पन्न होने उपलक्ष्य में सम्पूर्ण भारत वर्ष में अठारह हजार से अधिक बस्तियों में सर्वे हिन्दू सम्मेलनो का आयोजन किया जा रहा है। |  Ajmer Breaking News: केंद्रीय बजट 2026 27 पर संभाग स्तरीय प्रेस वार्ता, केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी बघेल ने बजट पर रखी अपनी बात |  Ajmer Breaking News: अजमेर वार्ड 41 में सीवरेज कार्य की कछुआ चल बनी जनता की परेशानी, पाइपलाइन फूटने से लोग गंदा पानी पीने को मजबूर | 

विशेष: माता अहोई अष्ठमी की कथा और पूजन विधि

Post Views 71

October 30, 2020

यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है

अहोई अष्टमी 

हिंदू कैलेंडर के अनुसार कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष के दौरान दीवाली से 8 दिन पहले अहोई अष्टमी मनाई जाती है। यह करवा चौथ त्यौहार के समान ही काफी अनुशासित व्रत के साथ मनाई जाती है, लेकिन यह त्यौहार विशेष रूप माँ द्वारा बेटों के लिए मनाया जाता है। माताएँ, माँ अहोई (माँ दुर्गा का रूप) की पूजा करतीं हैं और अपने बच्चों की लंबी उम्र और समृद्धि के लिए उपवास करतीं हैं।

अहोई अष्टमी के अनुष्ठान


अहोई आठें के दिन, माँ अहोई की पूजा की जाती है और सुबह-सुबह पूजा की तैयारी के लिए सूर्योदय से पहले स्नान करते है। अहोई माता की लाल स्याही वाली एक तस्वीर जिसमें सभी सात बेटों और चंद्रमा / सूर्य को चित्रित किया गया हो, को घर की दीवार पर लगाते हैं, या गेरु से भी यह चित्र बना सकते हैं। मिट्टी से बने पानी के वर्तन को विग्रह के पास रखते हैं।
 
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, माताएँ अहोई माता की चाँदी से बनी माला में प्रतिवर्ष 2 मनके (मोती) पिरोती हैं, इस प्रकार महिलाएँ अपनी संतान की आयु अहोई माता के अनुरूप परिभाषित करतीं है।
 
अहोई आठें का व्रत मुख्य रूप से घर में बच्चे के कल्याण तथा लंबी उम्र के लिए किया जाता है। एक माँ पूरे दिन निर्जला* व्रत करती है। शाम को माता अहोई को फल और मीठे व्यंजन भेंट कर उनकी पूजा-अर्चना करतीं हैं। जब आसमान में एक तारा दिखाई दे, तो करवे के शुद्ध पानी को उसपर अर्पित करतीं हैं।
 
आसमान में एक तारा दिखते ही, माताएँ अपने बच्चे के हाथ से पानी पीकर व्रत खत्म करतीं हैं। यह त्यौहार माँ और बच्चे के बीच के प्यार और स्नेह को परिभाषित करता है।
 
अहोई अष्टमी कथा

 प्राचीन काल में किसी नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात लड़के थे। दीपावली से पहले साहूकार की स्त्री घर की लीपापोती हेतु मिट्टी लेने खदान में गई और कुदाल से मिट्टी खोदने लगी।
दैवयोग से उसी जगह एक सेह की मांद थी। सहसा उस स्त्री के हाथ से कुदाल बच्चे को लग गई जिससे सेह का बच्चा तत्काल मर गया। अपने हाथ से हुई हत्या को लेकर साहूकार की पत्नी को बहुत दुख हुआ परन्तु अब क्या हो सकता था! वह शोकाकुल पश्चाताप करती हुई अपने घर लौट आई।
कुछ दिनों बाद उसका बेटे का निधन हो गया। फिर अकस्मात् दूसरा, तीसरा और इस प्रकार वर्ष भर में उसके सभी बेटे मर गए। महिला अत्यंत व्यथित रहने लगी। एक दिन उसने अपने आस-पड़ोस की महिलाओं को विलाप करते हुए बताया कि उसने जानबूझ कर कभी कोई पाप नहीं किया। हाँ, एक बार खदान में मिट्टी खोदते हुए अंजाने में उसके हाथों एक सेह के बच्चे की हत्या अवश्य हुई है और तत्पश्चात उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई।
यह सुनकर पास-पड़ोस की वृद्ध औरतों ने साहूकार की पत्नी को दिलासा देते हुए कहा कि यह बात बताकर तुमने जो पश्चाताप किया है उससे तुम्हारा आधा पाप नष्ट हो गया है। तुम उसी अष्टमी को भगवती माता की शरण लेकर सेह और सेह के बच्चों का चित्र बनाकर उनकी अराधना करो और क्षमा-याचना करो। ईश्वर की कृपा से तुम्हारा पाप धुल जाएगा। 
साहूकार की पत्नी ने वृद्ध महिलाओं की बात मानकर कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को उपवास व पूजा-याचना की। वह हर वर्ष नियमित रूप से ऐसा करने लगी। तत्पश्चात् उसे सात पुत्र रत्नों की प्राप्ती हुई। तभी से अहोई व्रत की परम्परा प्रचलित हो गई।


© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved