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October 17, 2026
फलोदी। लोहावट के पूनिया की ढाणी में 1,050 फीट गहरे बोरवेल में गिरे 9 साल के भोमाराम की मौत हो गई। उसे शनिवार तड़के करीब 3.35 बजे बोरवेल से बाहर निकाला गया और एम्बुलेंस से लोहावट अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। भोमाराम 15 अक्टूबर को दोपहर करीब 12.30 बजे बोरवेल में गिरा था — यानी उसे बाहर निकालने में 39 घंटे से ज्यादा लगे।
एक नजर में
कहां — पूनिया की ढाणी, लोहावट, फलोदी जिला
कब गिरा — 15 अक्टूबर, दोपहर करीब 12.30 बजे
कब निकाला — 17 अक्टूबर, तड़के करीब 3.35 बजे
बोरवेल की गहराई — करीब 1,050 फीट; बच्चा 640 फीट पर अटका
सबसे बड़ी अड़चन — बच्चे से करीब 30 फीट ऊपर फंसा पत्थर
39 घंटे चला रेस्क्यू
| कब | क्या हुआ |
|---|---|
| 15 अक्टूबर, दोपहर 12.30 | पूनिया की ढाणी में 1,050 फीट गहरे बोरवेल में गिरा |
| 16 अक्टूबर | बोरवेल में डाले गए कैमरे में हलचल दिखनी बंद हुई; कैमरा भी करीब 30 फीट पर अटका, बोरवेल में पानी भरने लगा |
| 16 अक्टूबर, रात करीब 10.30 | घटना के करीब 34 घंटे बाद रुकावट बना पत्थर बाहर निकाला गया |
| 17 अक्टूबर, तड़के 3.35 | बच्चे को बाहर निकाला गया, लोहावट अस्पताल में मृत घोषित |
पत्थर निकलने के बाद बच्चे तक पहुंचने में करीब 5 घंटे और लगे।
पत्थर बना सबसे बड़ी रुकावट
रेस्क्यू में सबसे बड़ी अड़चन बोरवेल के भीतर फंसा पत्थर बना। यह बच्चे से करीब 30 फीट ऊपर, यानी करीब 610 फीट की गहराई पर अटका था, जिसके कारण पाइप और दूसरे उपकरण नीचे तक नहीं पहुंच पा रहे थे। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर थीं, लेकिन इसी रुकावट के चलते बच्चे तक नहीं पहुंचा जा सका। इसके बाद देसी जुगाड़ के जानकार माधाराम सुथार और उनकी टीम ने लोहे के सरियों का जाल बनाकर पहले पत्थर को बाहर निकाला, और फिर देर रात बच्चे को निकालने का काम शुरू किया गया।
इतनी गहराई का रेस्क्यू कितना मुश्किल
बोरवेल हादसों में आमतौर पर बच्चे कुछ दर्जन फीट की गहराई पर अटकते हैं, जहां समानांतर गड्ढा खोदकर या रस्सी-हुक से निकालने की कोशिश होती है। यहां बच्चा करीब 640 फीट की गहराई पर था और उसके नीचे भी करीब 410 फीट बोरवेल था। तुलना के लिए, सितंबर में अलवर में पतंग लूटते समय बोरवेल में गिरा 10 साल का बच्चा करीब 40 फीट की गहराई पर अटका था और उसे निकालने में भी लंबी मशक्कत करनी पड़ी थी। बोरवेल किसका था और इस मामले में कोई कार्रवाई हुई है या नहीं, इसे लेकर प्रशासन की ओर से अब तक कोई जानकारी सामने नहीं आई है।
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