Post Views 01
October 13, 2026
परिवहन विभाग के आरटीओ और डीटीओ दफ्तरों में कर्मचारियों की सीट हर साल और निरीक्षकों की हर छह महीने में बदली जाती है, ताकि उन्हें अलग-अलग सीटों का अनुभव मिले और एक ही जगह लंबे समय तक बने रहने से बनने वाली मोनोपॉली टूटे। जयपुर नगर निगम में इसके उलट 340 कर्मचारी पांच साल से एक ही शाखा में जमे हैं — यानी परिवहन विभाग की व्यवस्था से 5 गुना और निरीक्षकों के मुकाबले 10 गुना ज्यादा समय। निगम में 2,000 से ज्यादा फाइलें लंबित हैं।परिवहन विभाग (आरटीओ/डीटीओ) — कर्मचारियों की सीट हर साल, निरीक्षकों की हर छह महीने में बदली जाती है। कारण यह बताया जाता है कि एक ही सीट पर लंबे समय तक रहने से मोनोपॉली बनती है।
जयपुर नगर निगम — 340 कर्मचारी 5 साल से एक ही शाखा में।
किस शाखा में कितने कर्मचारी
निगम की जिन शाखाओं के आंकड़े सामने आए हैं, उनमें सबसे ज्यादा 34 कर्मचारी अतिक्रमण शाखा में हैं। यह वही शाखा है जिस पर फाइलें अटकने की शिकायतें सबसे सीधे असर डालती हैं। इनमें से ज्यादातर कर्मचारी जोन में तैनात हैं।
| शाखा | कर्मचारी |
|---|---|
| अतिक्रमण | 34 |
| फायर | 23 |
| पट्टे | 23 |
| गैराज | 23 |
| स्लॉटर हाउस | 17 |
| भवन निर्माण स्वीकृति | 15 |
| आयोजना | 13 |
| उद्यान | 12 |
| लाइसेंस | 12 |
| राजस्व | 10 |
| स्टोर | 10 |
| पशु | 7 |
| सूची में दर्ज शाखाओं का जोड़ | 199 |
| बताई गई कुल संख्या | 340 |
| जिन शाखाओं के आंकड़े नहीं दिए गए | 141 |
यहां एक बात साफ कर देना जरूरी है। ऊपर दी गई 12 शाखाओं के आंकड़ों को जोड़ें तो यह 199 बैठता है, जबकि कुल संख्या 340 बताई गई है। यानी 141 कर्मचारी उन शाखाओं और दफ्तरों में हैं जिनके अलग-अलग आंकड़े नहीं दिए गए — यह कुल संख्या का करीब 41 प्रतिशत है। पंजीयन शाखा का नाम सूची में है, लेकिन उसके कर्मचारियों की संख्या नहीं दी गई। इसी तरह आयुक्त, अतिरिक्त आयुक्त और उपायुक्त कार्यालयों में भी यही स्थिति बताई गई है, पर वहां के आंकड़े नहीं हैं। ये 141 कर्मचारी कहां हैं, इसका ब्योरा उपलब्ध नहीं है।
फाइलें अटकने की शिकायतें
निगम में शिकायतें हैं कि कर्मचारी फाइलों पर अनावश्यक टिप्पणियां करते हैं और उन्हें आगे बढ़ाने के बजाय अटका देते हैं। ये शिकायतें हैं, कोई जांच का निष्कर्ष नहीं। इनका असर आम लोगों पर पड़ता है — खासकर पट्टे, भवन निर्माण स्वीकृति, राजस्व और लाइसेंस से जुड़ी फाइलों में, जिनके लिए लोगों को निगम के दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते हैं।
छह महीने में एसीबी की 5 कार्रवाइयां
पिछले 6 महीनों में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने 5 कार्रवाइयां की हैं और 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। मई में वेतन बनाने के मामले में एक स्वास्थ्य निरीक्षक और एक निजी व्यक्ति, जून में दुकान का लाइसेंस जारी करने के मामले में एक पशुधन निरीक्षक, और जुलाई में मकान का पट्टा जारी करने के मामले में हवामहल-आमेर जोन के एक जमादार को पकड़ा गया। जुलाई में ही कोटा एसीबी ने एक विवाह पंजीयक और एक अन्य कर्मचारी को गिरफ्तार किया। जून और अक्टूबर में एक कनिष्ठ अभियंता तथा संविदाकर्मियों से जुड़े मामलों में भी कार्रवाई हुई।इन कार्रवाइयों को लेकर दो बातें ध्यान में रखने लायक हैं। पहली, ये गिरफ्तारियां रिश्वत के आरोपों में हुई हैं और मामले जांच या अदालत के स्तर पर हैं — किसी को दोषी नहीं ठहराया गया है। दूसरी, इनमें से एक कार्रवाई कोटा एसीबी की है और विवाह पंजीयक से जुड़ी है, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि पांचों कार्रवाइयां जयपुर नगर निगम के कर्मचारियों के खिलाफ थीं।निगम आयुक्त ओम प्रकाश कसेरा ने कहा, “मेरे जॉइन करने के बाद मैंने अधिकतर की सीट बदली है। इसके बावजूद कोई कर्मचारी लंबे समय से एक ही सीट पर है और रह गया है, तो उसे भी बदल दिया जाएगा।”
© Copyright Horizonhind 2026. All rights reserved