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September 21, 2026
अजमेर में 32 पार्षदों वाली भाजपा की अनामिका शर्मा को मिले 43 वोट, पाली में 21 पार्षदों के बावजूद नमिता बुबकिया 33 वोट लेकर जीतीं, कांग्रेस की सुमित्रा जैन 3 मतों पर सिमटीं
जयपुर। राजस्थान के नगरीय निकायों में सोमवार को हुए मेयर, सभापति और पालिकाध्यक्ष चुनावों में कई जगह वार्ड चुनाव के संख्या-बल से अलग नतीजे सामने आए। सबसे ज्यादा चर्चा अजमेर और पाली नगर निगम की रही, जहां भारतीय जनता पार्टी अपने दम पर बहुमत में नहीं होने के बावजूद मेयर पद हासिल करने में सफल रही। अजमेर में भाजपा की अनामिका शर्मा 43 वोट लेकर मेयर बनीं, जबकि पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया ने बहुमत के लिए जरूरी 33 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। सात नगर निगमों के उपलब्ध परिणामों में उदयपुर, अजमेर, अलवर, पाली, भीलवाड़ा और भरतपुर में भाजपा तथा बीकानेर में कांग्रेस का मेयर निर्वाचित हुआ है।
अजमेर में भाजपा के 32 पार्षद, अनामिका शर्मा को मिले 43 वोट
अजमेर नगर निगम का परिणाम वार्ड चुनाव के बाद बने समीकरण से अलग रहा। 80 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस के 37 पार्षद निर्वाचित हुए थे और वह सबसे बड़ी पार्टी थी। भाजपा के पास 32 पार्षद थे, जबकि 11 निर्दलीय चुनाव जीतकर आए थे। बोर्ड बनाने के लिए 41 पार्षदों का समर्थन आवश्यक था। चुनाव से पहले कांग्रेस बहुमत से चार और भाजपा नौ मत दूर थी। मेयर पद के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा को 43 और कांग्रेस की किरण गढ़वाल को 37 वोट मिले। इस तरह अनामिका शर्मा ने छह वोट के अंतर से जीत दर्ज की। भाजपा के पास अपने 32 निर्वाचित पार्षद थे, जबकि उसकी प्रत्याशी को कुल 43 वोट मिले यानी पार्टी के मूल संख्या-बल से 11 वोट अधिक हासिल हुए। मतदान गुप्त होने के कारण यह आधिकारिक रूप से तय नहीं किया जा सकता कि ये अतिरिक्त वोट किन पार्षदों ने दिए। हालांकि परिणाम से यह स्पष्ट है कि मेयर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में उसके 32 सदस्यीय दलीय संख्या-बल से अधिक समर्थन आया। चुनाव से पहले भी 11 निर्दलीय पार्षदों की भूमिका को निर्णायक माना जा रहा था।
पाली में और बड़ा फेरबदल, 21 पार्षदों वाली भाजपा को मिले 33 वोट
पाली नगर निगम का परिणाम और भी उल्लेखनीय रहा। यहां 65 वार्डों के चुनाव में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का स्थान हासिल किया था। भाजपा के सिर्फ 21 पार्षद थे, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद निर्वाचित हुए थे। बहुमत का आंकड़ा 33 था। मेयर चुनाव में भाजपा की नमिता बुबकिया ने सीधे 33 वोट हासिल कर बहुमत का आंकड़ा छू लिया और महापौर निर्वाचित हो गईं। निर्दलीय प्रत्याशी राजबाला हिंगड़ को 29 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी सुमित्रा जैन को केवल 3 वोट मिले। सभी 65 पार्षदों ने मतदान किया। इस परिणाम में भाजपा प्रत्याशी को पार्टी के 21 पार्षदों की तुलना में 12 वोट अधिक मिले। वहीं वार्ड चुनाव में कांग्रेस के 29 पार्षद जीतकर आए थे, लेकिन उसकी अधिकृत मेयर प्रत्याशी को केवल तीन मत मिले। पाली में मुकाबला त्रिकोणीय था, क्योंकि कांग्रेस के टिकट पर पार्षद बनीं राजबाला हिंगड़ मेयर पद के लिए निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में थीं।
अलवर में भी बहुमत से दूर थी भाजपा, सुमनलता को मिले 42 वोट
अलवर नगर निगम में भाजपा की सुमनलता अग्रवाल ने कांग्रेस की कमलेश शर्मा को हराकर मेयर पद हासिल किया। सुमनलता को 42 वोट मिले जबकि कमलेश शर्मा को 23 मत मिले। दोनों के बीच 19 वोट का अंतर रहा।अलवर के 65 वार्डों में भाजपा ने 28 और कांग्रेस ने 23 सीटें जीती थीं। भाजपा बहुमत के 33 के आंकड़े से पांच सीट पीछे थी। इसके बावजूद मेयर चुनाव में उसकी प्रत्याशी को 42 वोट मिले। चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था।
उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी बने मेयर
उदयपुर नगर निगम में भाजपा के पारस सिंघवी ने कांग्रेस की डॉ. पूनम कंवर को हराकर मेयर पद हासिल किया। यहां भाजपा वार्ड चुनाव में ही स्पष्ट बहुमत हासिल कर चुकी थी। 80 सदस्यीय निगम में भाजपा के 53 पार्षद थे, जबकि कांग्रेस के 23 पार्षद निर्वाचित हुए थे। इसलिए अजमेर, पाली और अलवर की तरह उदयपुर में भाजपा को बोर्ड बनाने के लिए अतिरिक्त समर्थन की आवश्यकता नहीं थी। पारस सिंघवी की जीत का अंतर 30 वोट रहा। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें भाजपा के दलीय संख्या-बल के अतिरिक्त दो निर्दलीय पार्षदों का भी समर्थन मिला।
बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला बने मेयर
बीकानेर नगर निगम में कांग्रेस ने अपना बोर्ड बनाया। पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला ने भाजपा के सुरेंद्र सिंह को हराकर मेयर पद हासिल किया। वार्ड चुनाव में कांग्रेस को 80 में से 42 सीटें मिली थीं और वह 41 के बहुमत के आंकड़े से पहले ही एक सीट आगे थी। भाजपा के 27 पार्षद निर्वाचित हुए थे।सात नगर निगमों की परिणाम सूची में अनिल कल्ला की जीत का अंतर 30 दर्ज किया गया है।
अटरू में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के भाई कृष्ण मुरारी हारे
बारां जिले की अटरू नगर पालिका में कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने भाजपा प्रत्याशी कृष्ण मुरारी दिलावर को तीन वोट से हराकर अध्यक्ष पद हासिल किया। कृष्ण मुरारी दिलावर राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के छोटे भाई हैं और वार्ड नंबर 5 से भाजपा के पार्षद निर्वाचित हुए थे। अटरू के 25 वार्डों में कांग्रेस ने 14 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया था। भाजपा को 10 और निर्दलीय को एक सीट मिली थी। यहां बहुमत का आंकड़ा 13 था। कांग्रेस की निशा और भाजपा के कृष्ण मुरारी दिलावर अध्यक्ष पद के लिए आमने-सामने थे। अटरू का चुनाव इसलिए भी चर्चा में रहा क्योंकि वार्ड चुनाव में कृष्ण मुरारी दिलावर की जीत के बाद उन्हें नगर पालिका अध्यक्ष पद का प्रमुख भाजपा दावेदार माना जा रहा था। लेकिन अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस की निशा नैनीवाल ने जीत दर्ज कर कांग्रेस का बोर्ड बरकरार रखा।
सात नगर निगमों में भाजपा के 6, कांग्रेस का 1 मेयर
अजमेर का परिणाम आने के बाद सातों नगर निगमों की तस्वीर साफ हो गई है। उदयपुर में पारस सिंघवी, अजमेर में अनामिका शर्मा, अलवर में सुमनलता अग्रवाल और पाली में नमिता बुबकिया भाजपा से चुनाव जीतकर मेयर बनी हैं। भीलवाड़ा में जसवंत कंवर और भरतपुर में अनुराधा सिंह पहले ही भाजपा से निर्विरोध महापौर चुनी जा चुकी थीं। बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर पद हासिल किया।
इन नतीजों में अजमेर और पाली का संख्या-गणित सबसे अलग रहा। अजमेर में वार्ड चुनाव में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन 32 पार्षदों वाली भाजपा ने मेयर पद हासिल किया। पाली में भी कांग्रेस 29 पार्षदों के साथ सबसे बड़ा दल थी, जबकि 21 पार्षदों वाली भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर निर्वाचित हुईं।
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