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September 20, 2026
वार्ड 19 में मतदान के बाद हुई मारपीट से जुड़ा मामला, हिरासत में लिए लोगों को छुड़ाने की मांग पर कांग्रेस कार्यकर्ता पहुंचे थे कोतवाली, पुलिस ने सरकारी काम में बाधा समेत विभिन्न आरोपों में दर्ज किया प्रकरण
चित्तौड़गढ़। निम्बाहेड़ा नगर परिषद चुनाव के बाद शुरू हुआ राजनीतिक विवाद अब पुलिस कार्रवाई तक पहुंच गया है। कोतवाली थाने में 16 सितंबर को हुए घटनाक्रम को लेकर पुलिस ने राजस्थान के पूर्व सहकारिता मंत्री एवं कांग्रेस नेता उदयलाल आंजना समेत 13 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि थाने में पहुंचे लोगों ने सरकारी कार्य में बाधा डाली और पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह पूरा विवाद नगर परिषद चुनाव के मतदान के बाद वार्ड संख्या 19 में हुई कथित मारपीट की घटना से जुड़ा है। 11 सितंबर को मतदान के बाद एक व्यक्ति के साथ मारपीट का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में 16 सितंबर को कुछ लोगों को हिरासत में लिया और उन्हें कानूनी कार्रवाई के लिए कोतवाली थाने लाया। इसकी जानकारी मिलने के बाद पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ थाने पहुंचे।
हिरासत में लिए लोगों को छोड़ने की मांग पर बढ़ा विवाद
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार आंजना और उनके समर्थकों ने हिरासत में लिए गए लोगों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और उन्हें छोड़ने की मांग की। इसके बाद पुलिस अधिकारियों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच बहस तथा नोकझोंक की स्थिति बनी। यह घटनाक्रम करीब तीन घंटे तक चलता रहा। बाद में पुलिस उपाधीक्षक शिवप्रकाश टेलर ने मौके पर बातचीत कर कहा कि मामले में नियमानुसार जांच और कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। इसके बाद मामला शांत हुआ और आंजना अपने समर्थकों के साथ थाने से लौट गए। पुलिस की ओर से उस समय कहा गया था कि वार्ड 19 में हुई मारपीट से जुड़े लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर कांग्रेस पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए थे। अब थाने में हुए इसी घटनाक्रम को लेकर अलग से FIR दर्ज किए जाने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है।
उदयलाल आंजना समेत इन 13 लोगों को किया नामजद
पुलिस की ओर से दर्ज प्रकरण में पूर्व मंत्री उदयलाल आंजना के अलावा रवि सोनी, बंटी पारख, जावेद खान, गोपाल आंजना, बाबूलाल धाकड़, दिनेश धाकड़, रोमिल चौधरी, मोहम्मद कुरैशी, उस्मान उर्फ कालू, लियाकत खान, जाकिर हुसैन और साजिद अली को नामजद किया गया है। इस तरह मामले में कुल 13 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं। FIR में लगाए गए आरोप अभी पुलिस जांच के अधीन हैं। किसी भी नामजद व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी जांच और बाद की न्यायिक प्रक्रिया में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।लोक सेवक के काम में बाधा और धमकी जैसे आरोप पुलिस की ओर से दर्ज मामले में आरोपियों पर गैरकानूनी रूप से एकत्र होने, लोक सेवक को उसके सरकारी कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के लिए कथित रूप से आपराधिक बल का इस्तेमाल करने, धमकी देने और जानबूझकर अपमान करने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के आधार पर BNS की संबंधित धाराएं लगाई गई हैं। अब जांच अधिकारी थाने के घटनाक्रम के दौरान मौजूद पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के बयान, उपलब्ध वीडियो या CCTV फुटेज तथा अन्य साक्ष्यों को देख सकते हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों के समर्थन में क्या सामग्री सामने आती है।
वार्ड 19 की मारपीट से शुरू हुआ था पूरा घटनाक्रम
निम्बाहेड़ा में विवाद की शुरुआत 11 सितंबर को नगर परिषद चुनाव के मतदान के बाद हुई थी। वार्ड संख्या 19 में एक व्यक्ति के साथ मारपीट की शिकायत सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। 16 सितंबर को मामले से जुड़े कुछ लोगों को पूछताछ और आगे की कार्रवाई के लिए पुलिस ने हिरासत में लिया था। एक रिपोर्ट के अनुसार उन्हें शांतिभंग की कार्रवाई के सिलसिले में उपखंड कार्यालय ले जाया जा रहा था, लेकिन बाद में वापस थाने लाया गया। इसी कार्रवाई की जानकारी मिलने पर कांग्रेस नेता और समर्थक कोतवाली पहुंचे और पुलिस कार्रवाई पर विरोध दर्ज कराया। उस दिन बातचीत के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन अब पुलिस ने उसी घटनाक्रम को आधार बनाकर अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है।
निकाय चुनाव के बीच बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
नगर परिषद चुनाव के बाद निम्बाहेड़ा में राजनीतिक गतिविधियां पहले से तेज हैं। ऐसे समय में पूर्व मंत्री और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से स्थानीय राजनीति में मामला और गर्म हो गया है। हालांकि पुलिस कार्रवाई को चुनावी राजनीति से जोड़कर कोई निष्कर्ष निकालने से पहले जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों को देखना आवश्यक होगा। फिलहाल पुलिस का पक्ष यह है कि मामला 16 सितंबर को कोतवाली थाने में हुए घटनाक्रम और वहां कथित रूप से सरकारी काम में बाधा डालने से संबंधित है। कांग्रेस या नामजद लोगों की ओर से FIR के आरोपों पर विस्तृत औपचारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर प्रकरण की दूसरी तरफ की तस्वीर भी स्पष्ट होगी।
जांच के बाद तय होगी आगे की कार्रवाई
FIR दर्ज होने के बाद अब पुलिस मामले में साक्ष्य जुटाएगी और नामजद लोगों की कथित भूमिका की जांच करेगी। जरूरत पड़ने पर घटनास्थल से जुड़े CCTV फुटेज, मोबाइल वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।कानूनी रूप से FIR में किसी व्यक्ति का नाम दर्ज होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान ही होती है। इसलिए इस स्तर पर सभी आरोप पुलिस के कथन और दर्ज प्रकरण तक सीमित हैं
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