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September 20, 2026
श्रुति भारद्वाज 31 अगस्त को हुई थीं सेवानिवृत्त, सरकार ने अब तक किसी अधिकारी को नहीं सौंपा MD का प्रभार, 16 सितंबर के आदेश के बाद फेडरेशन की प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकार क्षेत्र को लेकर चर्चा
जयपुर। राजस्थान को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) में करीब 20 दिन से प्रबंध निदेशक का पद खाली रहने के बीच प्रशासनिक कामकाज और अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। तत्कालीन प्रबंध निदेशक एवं आईएएस अधिकारी श्रुति भारद्वाज 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गई थीं, लेकिन 20 सितंबर तक राज्य सरकार की ओर से किसी अधिकारी को नियमित रूप से RCDF के एमडी का प्रभार सौंपे जाने की जानकारी सामने नहीं आई है। उनकी सेवानिवृत्ति के कुछ दिन बाद भी पद खाली रहने की बात सार्वजनिक रिपोर्टों में दर्ज की गई थी। एमडी नहीं होने के बीच अब फेडरेशन के अंदर अलग-अलग शाखाओं से जुड़े प्रशासनिक आदेशों को लेकर भी विवाद की स्थिति बनी है। ताजा मामला कार्मिक एवं प्रशासन शाखा के प्रभार से जुड़ा है। 16 सितंबर को महाप्रबंधक मार्केटिंग संतोष शर्मा की ओर से एक आदेश जारी कर केसी मीना के स्थान पर वित्तीय सलाहकार को कार्मिक एवं प्रशासन शाखा का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी आदेश को लेकर यह सवाल उठाया जा रहा है कि एमडी का पद रिक्त होने की स्थिति में किस अधिकारी के पास ऐसा प्रशासनिक आदेश जारी करने की सक्षम शक्ति थी।
कार्मिक शाखा का चार्ज बदलने वाले आदेश पर सवाल
RCDF के प्रशासनिक ढांचे में कार्मिक एवं प्रशासन शाखा कर्मचारियों की पदस्थापना, कार्य-विभाजन, अतिरिक्त प्रभार और दूसरे आंतरिक प्रशासनिक मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में इस शाखा का प्रभार किसी अन्य अधिकारी को सौंपने वाला आदेश स्वयं फेडरेशन की प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। उपलब्ध आंतरिक जानकारी के मुताबिक 16 सितंबर को जारी आदेश में केसी मीना के स्थान पर वित्तीय सलाहकार को कार्मिक एवं प्रशासन का प्रभार सौंपा गया। आदेश महाप्रबंधक मार्केटिंग संतोष शर्मा की ओर से जारी होने के कारण यह चर्चा शुरू हुई है कि क्या उन्हें इस स्तर का आदेश जारी करने के लिए सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति या विधिवत प्रत्यायोजित अधिकार प्राप्त थे। इस संबंध में RCDF की ओर से सार्वजनिक रूप से कोई विस्तृत स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। इसलिए आदेश की वैधानिक या प्रशासनिक स्थिति पर अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जा सकता है, जब संबंधित स्वीकृति, प्राधिकरण अथवा फेडरेशन के लागू नियम सामने आएं।
वित्तीय सलाहकार को दिया गया कार्मिक एवं प्रशासन का प्रभार
राज्य सरकार के राजकाज रिकॉर्ड में RCDF में वित्त एवं लेखा से संबंधित वित्तीय सलाहकार का पद अलग प्रशासनिक जिम्मेदारी के रूप में दर्ज है। अगस्त 2026 के सरकारी रिकॉर्ड में RCDF की वित्त एवं लेखा शाखा के अंतर्गत वित्तीय सलाहकार पद का उल्लेख भी मौजूद है।ऐसे में वित्तीय सलाहकार को कार्मिक एवं प्रशासन जैसे अलग कार्यक्षेत्र का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से कार्य-विभाजन पर भी चर्चा हुई है। सवाल यह नहीं है कि किसी अधिकारी को अतिरिक्त प्रभार दिया जा सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि ऐसा आदेश किस सक्षम स्तर से और किस प्रक्रिया के तहत जारी होना चाहिए था। यदि यह आदेश किसी सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति पर जारी किया गया है तो उस स्वीकृति का रिकॉर्ड स्थिति स्पष्ट कर सकता है। दूसरी ओर, यदि ऐसी स्वीकृति नहीं थी तो प्रशासनिक अधिकार क्षेत्र से जुड़ा विवाद और गहरा सकता है।
श्रुति भारद्वाज के रिटायरमेंट के बाद खाली हुई कुर्सी
आईएएस अधिकारी श्रुति भारद्वाज RCDF की प्रबंध निदेशक थीं और 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हो गईं। उनकी सेवानिवृत्ति से पहले ही नए पूर्णकालिक एमडी की आवश्यकता को लेकर चर्चा शुरू हो गई थी। उस समय RCDF सरस ब्रांड के विस्तार और डेयरी नेटवर्क से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों पर काम कर रहा था।5 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी बताया गया था कि उनकी सेवानिवृत्ति के चार दिन बाद तक किसी अधिकारी को RCDF के एमडी का चार्ज नहीं दिया गया था। उस समय श्रुति भारद्वाज को ही सेवानिवृत्ति के बाद दोबारा जिम्मेदारी दिए जाने के प्रस्ताव की चर्चा थी, लेकिन आदेश तकनीकी कारणों से लंबित बताया गया था।इसके बाद 13 सितंबर की एक अन्य रिपोर्ट में भी उनकी संभावित पुनर्नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में बताए जाने के बावजूद औपचारिक आदेश लंबित होने की बात सामने आई। रिपोर्ट में सेवानिवृत्त अधिकारी को वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां दिए जाने से जुड़े तकनीकी पहलुओं को देरी की वजह बताया गया था।
एमडी नहीं होने से नीतिगत फैसलों पर असर का दावा
RCDF से जुड़े कर्मचारी और डेयरी क्षेत्र के संगठनों ने भी एमडी का पद लंबे समय तक रिक्त रहने पर चिंता जताई है। डेयरी अधिकारी-कर्मचारी वेलफेयर एसोसिएशन और अजमेर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ की ओर से राज्य सचिवालय को भेजे गए पत्र का उल्लेख करते हुए प्रकाशित रिपोर्ट में दावा किया गया कि नियमित एमडी नहीं होने से रूटीन और नीतिगत कामकाज प्रभावित हो रहा है। RCDF केवल एक प्रशासनिक संस्था नहीं बल्कि राजस्थान के सहकारी डेयरी नेटवर्क की शीर्ष संस्था है। इसका काम दूध उत्पादन, खरीद, प्रसंस्करण और सरस ब्रांड के तहत दुग्ध उत्पादों के विपणन से जुड़ा है। इसलिए एमडी के स्तर पर लिए जाने वाले निर्णय सीधे जिला दुग्ध संघों और डेयरी संचालन से जुड़े हो सकते हैं।
निगम चुनाव की आचार संहिता के बीच आदेश पर भी चर्चा
16 सितंबर का आदेश उस समय जारी किया गया जब प्रदेश में नगर निकाय चुनाव की प्रक्रिया और संबंधित आचार संहिता प्रभावी थी। इसी कारण आदेश की टाइमिंग भी चर्चा में है। हालांकि केवल आचार संहिता लागू होने भर से हर विभागीय या नियमित प्रशासनिक आदेश स्वतः प्रतिबंधित नहीं हो जाता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आदेश की प्रकृति क्या थी, क्या वह नियमित प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा था और क्या उसके लिए निर्वाचन संबंधी किसी अनुमति की आवश्यकता थी।इसलिए इस पहलू पर भी अंतिम निष्कर्ष आदेश की प्रकृति और सक्षम अधिकारियों की स्वीकृति देखने के बाद ही निकाला जा सकता है।
सवाल—जब MD नहीं तो अंतिम प्रशासनिक अधिकार किसके पास?
पूरे घटनाक्रम ने RCDF में नेतृत्व के खालीपन की समस्या को फिर सामने ला दिया है। सामान्य परिस्थितियों में किसी संस्था के प्रमुख के स्तर पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और वित्तीय निर्णयों के लिए जिम्मेदारी स्पष्ट रहती है। लेकिन लंबे समय तक एमडी का पद खाली रहने पर अलग-अलग वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा काम संभालने की स्थिति बन सकती है।इसी वजह से अब तीन सवाल प्रमुख हैं—16 सितंबर के आदेश को जारी करने की स्वीकृति किस स्तर से मिली, महाप्रबंधक मार्केटिंग को कार्मिक एवं प्रशासन शाखा से जुड़ा आदेश जारी करने की शक्ति किस आदेश या प्रत्यायोजन से मिली और सरकार नियमित अथवा कार्यवाहक एमडी की नियुक्ति कब करेगी। इन सवालों पर RCDF या राज्य सरकार का औपचारिक स्पष्टीकरण सामने आने से स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
सरस जैसे बड़े नेटवर्क के लिए पूर्णकालिक नेतृत्व महत्वपूर्ण
RCDF राजस्थान के सहकारी डेयरी ढांचे की शीर्ष संस्था है और सरस ब्रांड के संचालन व विस्तार से जुड़ी है। पूर्व एमडी श्रुति भारद्वाज के कार्यकाल के दौरान सरस ब्रांड के विस्तार और डेयरी नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दिया गया था। उनके रिटायरमेंट के समय भी पूर्णकालिक और प्रभावी एमडी की जरूरत को लेकर सार्वजनिक रूप से चर्चा हुई थी।करीब 20 दिन बाद भी एमडी का पद खाली रहने और इसी बीच महत्वपूर्ण शाखाओं के प्रभार में बदलाव जैसे आदेश सामने आने से अब फेडरेशन की प्रशासनिक निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं। सरकार की ओर से नया एमडी या कार्यवाहक प्रभार तय होने के बाद ही इस असमंजस के खत्म होने की उम्मीद है।
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