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July 12, 2026
बूढ़ा पुष्कर में बारिश की कामना, ग्रामीणों ने दुग्धाभिषेक कर इंद्र देव से की प्रार्थना
प्रदेश के कई हिस्सों में मानसून की दस्तक के साथ अच्छी बारिश दर्ज की जा रही है, लेकिन पुष्कर क्षेत्र के कई गांव अब भी झमाझम बारिश का इंतजार कर रहे हैं। खेतों में बोवनी की उम्मीद लगाए बैठे किसानों और ग्रामीणों की नजरें आसमान पर टिकी हैं। इसी बीच पुष्कर के निकटवर्ती बूढ़ा पुष्कर में वर्षों पुरानी लोक परंपरा को निभाते हुए ग्रामीणों ने अच्छी वर्षा की कामना की।
गांव के लोग गाजे-बाजे, ढोल-नगाड़ों और भजन-कीर्तन के साथ शोभायात्रा के रूप में बूढ़ा पुष्कर सरोवर पहुंचे। यहां ग्रामीणों ने सरोवर की पूजा-अर्चना की, दुग्धाभिषेक किया और हवन-यज्ञ कर भगवान इंद्र से अच्छी बारिश की प्रार्थना की। ग्रामीणों का मानना है कि बूढ़ा पुष्कर राज की पूजा और इंद्र देव के आह्वान से क्षेत्र में मेह बरसता है और खेतों में हरियाली लौटती है। ग्रामीण महेंद्र सिंह रावत ने बताया कि यह परंपरा गांव बसने के समय से चली आ रही है। हर वर्ष ग्रामीण एकत्रित होकर बूढ़ा पुष्कर पहुंचते हैं। गांव से दूध लाया जाता है और सरोवर पर दुग्धाभिषेक किया जाता है। इसके बाद हवन-पूजन कर इंद्र देवता से अच्छी बारिश की कामना की जाती है। उन्होंने कहा कि बारिश केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि पशुधन और पूरे ग्रामीण जीवन के लिए जरूरी है। तीर्थगुरु विकास पाराशर ने बताया कि कानस गांव के लोग हर साल बूढ़ा पुष्कर राज की पूजा करते हैं। ग्रामीण गांव में उपलब्ध दूध लेकर आते हैं, दुग्धाभिषेक करते हैं और फिर हवन व भजन-कीर्तन के माध्यम से इंद्र देव का आह्वान करते हैं। जब तक अच्छी वर्षा नहीं होती, तब तक ग्रामीण आस्था के साथ प्रार्थना करते रहते हैं। बूढ़ा पुष्कर में हुआ यह आयोजन आस्था, लोक संस्कृति और प्रकृति के प्रति ग्रामीण जीवन के गहरे जुड़ाव का प्रतीक बना। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इंद्र देव उनकी पुकार सुनेंगे और जल्द ही पुष्कर क्षेत्र में अच्छी बारिश होगी
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