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July 7, 2026
नई दिल्ली। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले को लेकर बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भंग कर नया ट्रस्ट बनाने की भी मांग उठाई है।
दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान अशोक गहलोत ने कहा कि चढ़ावा चोरी जैसा मामला अत्यंत गंभीर है और इससे श्रद्धालुओं की आस्था प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एसआईटी जांच कराई जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सुझाव देते हुए कहा कि वे नया ट्रस्ट बनाएं और स्वयं उसके अध्यक्ष बनें। उन्होंने कहा कि पहले जांच पूरी होनी चाहिए और इसके बाद नया ट्रस्ट गठित किया जाना चाहिए, जिसमें सभी वर्गों और विचारधाराओं के लोगों को शामिल किया जाए।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आरोप लगाया कि वर्तमान ट्रस्ट में मुख्य रूप से आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोगों को स्थान दिया गया, जबकि व्यापक प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि पीवी नरसिम्हा राव के समय की तरह सभी विचारधाराओं के लोगों को साथ लेकर ट्रस्ट बनाया जाता, तो आज ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राम मंदिर देश के करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है, इसलिए इससे जुड़े प्रबंधन में पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही या वित्तीय अनियमितता की आशंका को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जानी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राम मंदिर निर्माण में इस्तेमाल हुए पत्थरों को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के दौरान भरतपुर के बंशी पहाड़पुर क्षेत्र से अवैध खनन के जरिए पत्थर ले जाए गए। उन्होंने कहा कि उस समय भी अवैध खनन को लेकर सवाल उठे थे, लेकिन उन पर पर्याप्त गंभीरता से कार्रवाई नहीं की गई।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि राम मंदिर के नाम पर देशभर के लोगों ने श्रद्धा से दान दिया है। ऐसे में दान, चढ़ावे और ट्रस्ट के कामकाज से जुड़े हर पहलू की पारदर्शी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता का नहीं, बल्कि जनआस्था और विश्वास से जुड़ा हुआ है।
पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने मांग की कि मौजूदा ट्रस्ट को तत्काल भंग किया जाए, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराई जाए और जांच पूरी होने के बाद नया, व्यापक और सर्वसमावेशी ट्रस्ट बनाया जाए। उन्होंने कहा कि नए ट्रस्ट में सभी समाजों, विचारधाराओं और योग्य व्यक्तियों को स्थान दिया जाना चाहिए, ताकि मंदिर प्रबंधन पर लोगों का विश्वास बना रहे।
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