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June 26, 2026
800 साल पुरानी ‘हाईदौस’ परंपरा से गूंजा अंदरकोट, बारिश के बीच नंगी तलवारों से साकार हुआ कर्बला का मंजर
अजमेर। दरगाह क्षेत्र स्थित अंदरकोट में मोहर्रम की 10वीं तारीख पर शुक्रवार करीब 800 वर्ष पुरानी ‘हाईदौस’ परंपरा पूरे धार्मिक उल्लास, जोश और अनुशासन के साथ निभाई गई। इशा की नमाज के बाद ढाई दिन के झोंपड़े के सामने आयोजित ‘छोटा हाईदौस’ में आशिकान-ए-हुसैन ने नंगी तलवारें लहराकर कर्बला की जंग का प्रतीकात्मक मंचन किया। ढोल, ताशे और झांझ की गूंज के बीच बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने आयोजन में शिरकत की।
दी सोसायटी पंचायत अंदरकोटियान को प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई गई 100 तलवारों और एक तोप के माध्यम से परंपरागत हाईदौस खेला गया। इस दौरान तोप से प्रतीकात्मक गोले भी दागे गए। इसके बाद डोला शरीफ की सवारी निकाली गई। सवारी के दौरान अचानक तेज बारिश शुरू होने से कार्यक्रम कुछ देर के लिए रोकना पड़ा, लेकिन बारिश थमने के बाद रस्में पुनः शुरू की गईं। इसके बाद अकीदतमंद पूरे अदब, अकीदत और अनुशासन के साथ डोला शरीफ की सवारी में शामिल हुए।
आयोजन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। अजमेर सिटी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु जांगिड़, अतिरिक्त जिला कलेक्टर नरेंद्र मीणा, दरगाह वृत्ताधिकारी लक्ष्मणराम, पांच थाना प्रभारियों सहित भारी पुलिस जाब्ता पूरे समय तैनात रहा। कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने पर दी सोसायटी पंचायत अंदरकोटियान ने प्रशासन, पुलिस विभाग एवं सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। यह ऐतिहासिक परंपरा अजमेर की सांस्कृतिक एवं धार्मिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक मानी जाती है।
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