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May 9, 2026
मदर्स डे पर गर्भाशय का संदेश..
मैं गर्भाशय - सृष्टि की रचना का आधार। मेरे ही कारण आप मदर्स डे मना रहे हैं। मैं भी स्त्री के शरीर का एक अभिन्न अंग हूं । मुझ से उत्पन्न हो कर मानवता पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रही हैं। मैं किसी जाति, समाज, धर्म में नहीं बांधा गया हूं। मैने तो प्रत्येक स्त्री को मां का स्थान दिया...पर मुझसे ऐसी क्या भूल हुई कि मां बनते ही उन्होंने मुझे अन्य अंगों की तुलना में इतनी जल्दी भुला दिया !
जैसे अन्य अंगों के घावों पर मलहम लगाते हो मुझे क्यों भूल जाते हो? मेरा विच्छेदन करने की सहमति इतनी आसानी से कैसे दे जाते हो?
मेरा पड़ोसी अंडाशय भी मेरे बिना सो जाता है। उससे बनने वाले हार्मोन जो तुम्हे यौवन प्रदान करते हैं, आखिर उनसे तुम्हारी कैसी दुश्मनी? हमारे बिना तुम्हारे मस्तिष्क, बाल, चमड़ी, हड्डी, मांस पेशियों का ध्यान कौन रखेगा?
तो आओ मुझसे इस उपलक्ष्य पर वादा करो कि मुझे त्याग करने से पहले अपने डॉक्टर से इन सवालों पर अवश्य परामर्श करोगी -
१) क्या बच्चेदानी मासिक धर्म बंद के लिए निकलवानी है?
२) क्या बच्चेदानी परिवार नियोजन के लिए निकलवानी है?
३) क्या कैंसर के डर से बच्चेदानी निकलवानी है?
४) क्या इलाज के खर्चे को बचाने के लिए इसको निकलवाना होगा?
५) क्या यही अंतिम विकल्प है?
आओ मेरे साथ इस मदर्स डे पर संकल्प लो कि हर बार मुझे ( गर्भाशय/ बच्चेदानी) निकलवाने से पहले इन पहलुओं पर अवश्य गौर करोगी!
“मां केवल एक रिश्ता नहीं,
ईश्वर की सबसे सुंदर संरचना है…
और गर्भाशय उस रचना का
पहला पवित्र मंदिर।”
मैं हूं गर्भाशय —
सृजन, संवेदना और जीवन का आधार।
डॉ शाब्दिका कुलश्रेष्ठ
आचार्य एंव स्त्री रोग विशेषज्ञ
गीतांजलि मेडिकल कॉलेज , उदयपुर
+91 94142 20990
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