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May 7, 2026
नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और चुनाव आयुक्तों (EC) की नियुक्ति प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाया है। बुधवार को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने कहा कि याचिका में संसद को नया कानून बनाने का निर्देश देने की मांग की गई है, लेकिन क्या अदालत ऐसा निर्देश दे सकती है, जबकि कानून बनाना संसद का विशेषाधिकार है। कोर्ट ने इस पर भी सवाल उठाया कि क्या इस प्रकार की याचिका सुनवाई योग्य है।
दरअसल वर्ष 2023 में सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा था कि CEC और EC की नियुक्ति के लिए एक तीन सदस्यीय समिति बनाई जाए, जिसमें प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) शामिल हों। इस निर्णय का उद्देश्य नियुक्ति प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना था।
इसके बाद केंद्र सरकार ने एक नया कानून बनाकर इस समिति की संरचना में बदलाव किया। नए प्रावधान के तहत CJI की जगह प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक कैबिनेट मंत्री को शामिल कर दिया गया। इस बदलाव को कांग्रेस नेता जया ठाकुर और ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (ADR) सहित कई याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि चयन समिति से मुख्य न्यायाधीश को हटाना नियुक्ति प्रक्रिया की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। वहीं, सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल नियुक्ति प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह विधायिका और न्यायपालिका के अधिकारों के दायरे से भी जुड़ा एक गंभीर संवैधानिक प्रश्न है।
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