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April 17, 2026
पगड़ी में लिपटी आस्था: पुष्कर के 52 घाटों पर सजा भक्ति का अद्भुत उत्सव
अमावस्या के पावन अवसर पर तीर्थराज पुष्कर में इस बार आस्था, परंपरा और संस्कृति का ऐसा संगम देखने को मिला, जिसने हर किसी को भाव-विभोर कर दिया। अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन की महिला इकाई द्वारा आयोजित “पगड़ी महोत्सव” ने 52 घाटों को भक्ति के रंग में रंग दिया।
करीब 1800 मीटर लंबी पगड़ी को पूरे पुष्कर सरोवर के 52 घाटों के चारों ओर अर्पित किया गया। यह दृश्य न केवल अद्भुत था, बल्कि श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक भी बन गया। घाटों पर लाल साड़ियों में सजी महिलाएं, हाथों में पूजा की थाल और वातावरण में गूंजते भजन—हर क्षण भक्ति में डूबा नजर आया।अंतरराष्ट्रीय वैश्य महासम्मेलन के जिला महामंत्री उमेश गर्ग ने बताया कि यह आयोजन वर्षों की परिकल्पना का परिणाम है। महिला इकाई द्वारा भगवान ब्रह्मा को पगड़ी अर्पित करने की परंपरा को इस बार भव्य स्वरूप दिया गया। अजमेर, जयपुर, मकराना और किशनगढ़ से आई 350 से अधिक महिलाओं ने इस आयोजन में भाग लेकर इसे ऐतिहासिक बना दिया। कार्यक्रम के आचार्य पंडित रविकांत शर्मा ने बताया कि श्रीमती वर्षा फतेहपुरिया के नेतृत्व में आयोजित इस महोत्सव में पगड़ी अर्पण केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रद्धा और सम्मान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि तीन वर्षों से संजोया गया यह सपना आज साकार हुआ। आयोजन के दौरान विशेष पूजन, अभिषेक, आरती, महाआरती और भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया, वहीं पहली बार लाइव संकीर्तन ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस भव्य आयोजन की खास बात यह रही कि सात समंदर पार से आई रूसी पर्यटक वोल्गा भी भारतीय संस्कृति से अभिभूत नजर आईं। उन्होंने कहा, “आज का दिन बेहद खास है। पुष्कर सरोवर भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है और महिलाएं उनके सम्मान में पगड़ी अर्पित कर रही हैं। यहां की परंपरा और आस्था ने मुझे बहुत प्रभावित किया है। लाल रंग शक्ति और सच्ची भक्ति का प्रतीक है, इसलिए मैंने भी इसे धारण किया।” महोत्सव में मेहंदी उत्सव, दीपदान और रंगोली जैसे रंगारंग कार्यक्रमों ने माहौल को और अधिक जीवंत बना दिया। भजन संध्या और महाआरती के दौरान घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ ने इस आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।
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