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March 29, 2026
उदयपुर में चर्चित ‘उदयपुर फाइल्स’ कथित वीडियो कांड में पुलिस ने 43 दिन बाद चार्जशीट दाखिल कर दी है, लेकिन इस केस के कई अहम सवाल अब भी अनसुलझे हैं। 27 मार्च को उदयपुर की एसीजेएम-4 कोर्ट में पेश की गई चार्जशीट ने जहां कुछ तथ्यों पर रोशनी डाली है, वहीं कई नए संदेह भी खड़े कर दिए हैं।
जांच अधिकारी डीएसपी गोपाल चंदेल द्वारा पेश की गई चार्जशीट में आरोपी के मोबाइल से बरामद वीडियो, ऑफिस में लगाए गए हिडन कैमरे और कथित घटनाओं का विस्तृत विवरण शामिल है। हालांकि, सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि FIR और पीड़िता के आरोपों में जिस AI-जनरेटेड वीडियो की बात कही गई थी, उसका चार्जशीट में कहीं भी जिक्र नहीं है।
पुलिस ने न तो किसी वीडियो को AI से बना हुआ माना और न ही उन्हें फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) भेजने का उल्लेख किया। आमतौर पर ऐसे मामलों में तकनीकी जांच अहम होती है, जिससे इस पहलू पर सवाल उठ रहे हैं। चार्जशीट के अनुसार, आरोपी ने नवंबर 2025 में एक डिजिटल घड़ी में फिट होने वाला हिडन कैमरा खरीदा था और उसी के जरिए ऑफिस में वीडियो रिकॉर्ड किए गए। ये वीडियो 12 फोल्डर्स में मिले हैं, जिनकी संख्या 2 से 3 दर्जन के बीच बताई जा रही है, हालांकि सटीक संख्या स्पष्ट नहीं की गई। बरामद वीडियो में एक महिला और एक अज्ञात व्यक्ति को विभिन्न स्थितियों में देखा गया है, जिनमें आपत्तिजनक दृश्य भी शामिल हैं। इस ‘अज्ञात व्यक्ति’ की पहचान अब तक रहस्य बनी हुई है। इस केस में 80 दस्तावेजों के साथ 12 गवाह शामिल किए गए हैं, जिनमें हिडन कैमरा बेचने वाला दुकानदार भी शामिल है। चार्जशीट इतनी जल्दी दाखिल होने पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आमतौर पर पुलिस अंतिम समय के आसपास यह प्रक्रिया पूरी करती है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि हाईकोर्ट में लंबित सुनवाई और संभावित दबाव के चलते यह तेजी दिखाई गई।
अब यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है, और 1 अप्रैल को राजस्थान हाईकोर्ट, जोधपुर में इस केस से जुड़ी रिट पर सुनवाई होनी है। आरोपी पक्ष ने भी चार्जशीट में कई खामियों का दावा किया है, जिससे आने वाले समय में यह केस और उलझ सकता है।
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