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March 21, 2026
जयपुर। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान द्वारा उठाई गई ₹1.44 लाख करोड़ की पानी रॉयल्टी की मांग को राजस्थान सरकार ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। राज्य के जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने इस मांग को तथ्यों से परे और असंवैधानिक बताते हुए स्पष्ट किया कि पानी कोई व्यापारिक वस्तु नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय संसाधन है, जिसका उपयोग देशहित में किया जाता है।
राजस्थान सरकार का कहना है कि किसी एक राज्य द्वारा पानी पर रॉयल्टी या आर्थिक दावा करना संविधान की भावना के खिलाफ है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। मंत्री ने कहा कि जल संसाधनों का उपयोग और वितरण राष्ट्रीय स्तर पर तय नियमों के अनुसार होता है, न कि किसी राज्य की निजी शर्तों पर।
सरकार ने पंजाब द्वारा दिए गए 1920 के समझौते के हवाले को भी सिरे से खारिज कर दिया है। रावत के अनुसार यह समझौता ब्रिटिश शासनकाल में बीकानेर रियासत, बहावलपुर रियासत और ब्रिटिश सरकार के बीच हुआ था, जिसमें भुगतान ब्रिटिश सरकार को किया जाना था, न कि पंजाब को। आजादी के बाद इस समझौते की कोई वैधानिक प्रासंगिकता नहीं रह गई है।
इसके अलावा, राजस्थान सरकार ने बताया कि स्वतंत्रता के बाद 1955, 1959 और 1981 में रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के जल बंटवारे को लेकर जो समझौते हुए, उनमें कहीं भी रॉयल्टी या भुगतान का कोई प्रावधान नहीं है। इन समझौतों के आधार पर ही राजस्थान को निर्धारित मात्रा में पानी आवंटित किया गया है और वर्तमान में उसी के अनुसार जल आपूर्ति हो रही है।
राज्य सरकार ने अपने पक्ष में संविधान के अनुच्छेद 262 का हवाला देते हुए कहा कि अंतरराज्यीय नदियों के जल विवादों का समाधान संसद द्वारा बनाए गए कानूनों के तहत ही किया जा सकता है। इस संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार जल को राष्ट्रीय संपत्ति माना गया है, न कि किसी राज्य की निजी संपत्ति।
वर्तमान में राजस्थान को बीकानेर नहर, राजस्थान फीडर, भाखड़ा मेन लाइन और सरहिंद फीडर के माध्यम से पानी मिलता है, जिनका संचालन भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) द्वारा केंद्र सरकार की निगरानी में किया जाता है। इस व्यवस्था में कहीं भी पंजाब को अलग से रॉयल्टी देने का कोई प्रावधान नहीं है।
राजस्थान के इस रुख के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार इस मामले को अदालत में ले जाएगी। उन्होंने कहा कि अब इस विवाद का समाधान न्यायालय में ही होगा। इस मुद्दे के चलते दोनों राज्यों के बीच जल बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है और आने वाले समय में यह विवाद कानूनी और राजनीतिक रूप से और गंभीर रूप ले सकता है।
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