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March 7, 2026
बीजीय मसालों के अनुसंधान और तकनीक से किसानों की बढ़ेगी आय - भागीरथ चौधरी
राष्ट्रीय मसाला बीजीय अनुसंधान संस्थान, तबीजी में आयोजित इंडस्ट्री मीट एवं किसान मेला-2026 में सम्मिलित हुए केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी
अजमेर, 7 मार्च। केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने शनिवार को केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद के अजमेर स्थित राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान संस्थान, तबीजी में आयोजित मसाला औद्योगिक संगोष्ठी एवं किसान मेला-2026 में किसानों के साथ संवाद किया। इसका आयोजन केंद्रीय कृषि अनुसंधान परिषद के बौद्धिक संपदा एवं तकनीकी प्रबंध इकाई, इंडियन सोसाइटी ऑफ सीड स्पाइसेज (आईएसएसएस) एवं डायरेक्टर ऑफ अरेकानट एंड स्पाइसेज डेवलपमेंट (डीएएसडी) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया था। कार्यक्रम में आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट सहित देशभर से आए वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित थे।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा कि बीजीय मसालों के क्षेत्र में अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और उद्योग के सहयोग से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों, उद्योग जगत और किसानों के बीच समन्वय को मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है, ताकि नई तकनीकें तेजी से खेतों तक पहुँच सके।
भागीरथ चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को आर्थिक सुरक्षा, आधुनिक तकनीक और बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट ने कहा कि किसान कृषि के क्षेत्र में अनुसंधान के लिए आवश्यक विषयों की जानकारी सरकार को प्रदान करें। इससे आवश्यकता आधारित अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा। अनुसंधान के क्षेत्र को बढ़ाने के लिए नागौरी पान मेथी को भी स्थानीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र की सूची में शामिल किया जाएगा। इसी प्रकार राजस्थानी सूखी लाल मिर्च पर भी शोध होंगे। जीरे में प्रसंस्करण की सुविधा विकसित की जानी चाहिए। धनिया के बीज के लिए कोटा को हब बनाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे धनिया के बीज को आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। प्राकृतिक जैविक खेती से मसाला उत्पादन का उत्कृष्ट केंद्र अजमेर में बनने की संभावना है। वर्तमान में भूमि सामान्य से क्षारीय अथवा अम्लीय प्रकृति की हो रही है। इससे बचने के लिए नई क्षारीय, गर्मी एवं अम्लीय प्रतिरोधी किस्मों को विकसित करने की आवश्यकता है।
स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय जोबनेर के कुलगुरु प्रो. पी. एस. चौहान ने कहा कि अनुसंधान में निवेश बढ़ाया जाना चाहिए। उद्योगों को किसानों से सीधा जोड़कर अपनी आवश्यकता के अनुसार नई फसलें पैदा करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। धानुका एग्रीटेक के डॉ. आर.जी. अग्रवाल ने कहा कि लघु एवं सीमांत कृषकों तक भी नवीन शोध पहुंचने चाहिए। वर्तमान में फसल विविधता को अपनाने की आवश्यकता है। अटारी जोधपुर के निदेशक डॉ. जे.पी. मिश्रा ने कहा कि जोधपुर में जीरा उत्पादन के लिए क्लस्टर बनाकर नई प्रजाति का प्रदर्शन किया जाएगा।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने बीज प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया। तकनीकी पुस्तिकाओं का विमोचन और बीज पैकेटों का वितरण भी किया। कार्यक्रम में प्रगतिशील किसानों और वैज्ञानिकों का सम्मान भी किया गया। अतिथियों का स्वागत राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ. विनय भारद्वाज ने किया। धन्यवाद ज्ञापन प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. एस.एस. मीणा के द्वारा प्रदान किया गया।इस अवसर पर देशभर से आए वैज्ञानिकों, कृषि विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों, उद्यमियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
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