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April 5, 2025
चौहान वंश की कुलदेवी चामुंडा माता, सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने की थी मंदिर की स्थापना, पहाड़ी पर स्थित है प्राचीन चामुंडा माता का मंदिर, 1160 ईस्वी वर्ष पूर्व हुई थी मंदिर की स्थापना, युद्ध मे जाने से पहले माता का आशीर्वाद लेने इस मंदिर में धोक लगाते थे सम्राट पृथ्वीराज चौहान, मंदिर में पहाड़ी पर स्थित है पानी का कुंड जिसका पानी कभी नही होता खत्म, नवरात्रों में उमड़ती है हजारों श्रद्धालुओं की भीड़, सम्राट पृथ्वीराज चौहान थे चामुंडा माता के अनन्य भक्त, इसी स्थान पर माता ने दिए थे उन्हें दर्शन
अजमेर के फायसागर रोड स्थित बोराज गांव की पहाड़ी पर विराजमान प्राचीन चामुंडा माता का मंदिर जहां पर साल भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। यह लाखों लोगों का आस्था का केंद्र है। बता दें कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान ने इस मंदिर की स्थापना की थी और वे स्वयं यहां पूजा अर्चना किया करते थे।
बताया जाता है कि सम्राट पृथ्वीराज चौहान किसी भी युद्ध में जाने से पहले माता चामुंडा के चरणों में अपने हथियार रखकर माता रानी से आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद ही युद्ध के लिए कूच किया करते थे और हर युद्ध में उन्हें विजय हासिल होती थी।
मंदिर के पुजारी मदन सिंह ने बताया कि यहां अष्टमी के दिन हजारों श्रद्धालु माता रानी के दर्शन करने पहुंचते हैं और यहां कन्याओं को भोज कराकर भोजन प्रसादी का आयोजन भी किया जाता है। अलग-अलग तरह की भोजन का भोग माता रानी को लगाने के बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी कराई जाती है। उन्होंने बताया कि मंदिर पर एक ढाई बाई ढाई का पानी का कुंड बना हुआ है इस कुंड के पानी से ही मां चामुंडा का स्नान और अभिषेक किया जाता है, साथ ही मंदिर के होने वाले सभी कामों में इसी पानी का इस्तेमाल होता है। इस पानी के सेवन से रोग कष्ट दूर होते हैं। इतना उपयोग में आने के बाद और पहाड़ी पर स्थित होने के बावजूद भी आज तक इस कुंड का पानी कभी खत्म नहीं हुआ है। मां चामुंडा के भक्त अजमेर सहित पूरे देश भर में मौजूद है जो नवरात्र के दौरान यहां आकर दर्शन करते हैं और मन्नतें मांगते हैं।
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